तैयारी /गाय के सरंक्षण के लिए बड़ा कदम, कंपनियों के लिए 10 प्रतिशत खाद गोबर से बनाना होगा जरूरी

  • KRIBHCO और IFFCO जैसी कंपनियां कुल उत्पादन का दस फीसदी हिस्सा गोबर व गोमूत्र से बनने वाला खाद बनाए 

money bhaskar

Apr 23,2019 01:07:08 PM IST

नई दिल्ली. लोकसभा चुनाव से तुरंत पहले बने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग सरकार से सिफारिश करेगा कि KRIBHCO और IFFCO जैसी कंपनियां अपने कुल वार्षिक उत्पादन में से 10 प्रतिशत तक गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद का निर्माण करें। आयोग के इस कदम से गायों के संरक्षण में मदद मिलेगी और विदेशों से आयातित उर्वरक पर निर्भरता कम होगी। यही नहीं कीमती विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।


92 फीसदी विदेशी खाद का उपयोग

आयोग का तर्क है कि देश में लगभग 92 प्रतिशत रासायनिक उर्वरकों का आयात किया जाता है। जैविक खाद बनने से आयातित उर्वरक पर देश की निर्भरता काफी कम हो जाएगी। वहीं, गोबर और गोमूत्र का उचित उपयोग सुनिश्चित करेगा। राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष बल्लभभाई कथिरिया ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि जैव-उर्वरक का अनिवार्य उत्पादन लोगों की मानसिकता को बदल देगा। इससे लोगों को डेयरी फार्मिंग और अन्य संबंधित गतिविधियां करने में काफी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि इसका अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक और लंबे समय तक प्रभाव रहेगा।

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कहां से मिलेगा इतना गोबर

जैव-उर्वरक के निर्माण के लिए गोबर के स्रोत में कठिनाइयों के बारे में पूछे जाने पर कथीरिया ने कहा कि ऐसी समस्या उत्पन्न नहीं होगी। देश में 1,000 गोशालाएं और कांजी हाउस हैं। इसके अलावा भी गांवों तक दूध कलेक्शन जैसे ही गोबर कलेक्शन के सेंटर बनाने से यह समस्या हल हो जाएगी। जैसे दूध गांवों से इकट्ठा किया जाता है और शहरों में लाया जाता है, वैसे ही वाहनों का उपयोग करके गाय-गोबर और गोमूत्र एकत्र किया जाएगा। वहां मैन्युफैक्चिंग संयंत्रों में जाएगा।

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नई सरकार आने पर प्रस्ताव पर होगा अमल

कथिरिया का कहना है कि नई सरकार के सत्ता में आने और बजटीय कार्य शुरू होने के बाद प्रस्ताव को रसायन और उर्वरक मंत्रालय के माध्यम से स्थानांतरित किया जाएगा। कथिरिया ने तर्क दिया कि इस कदम से कृषि क्षेत्र में संकट कम होगा। इसके अलावा जैविक खेती को बल मिलेगा जिससे कि एक स्वस्थ भारत का निर्माण होगा। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अध्यक्षता में गायों के संरक्षण, संवर्धन और विकास और उनकी संतान के लिए राष्ट्रीय कामधेनु आयोग की स्थापना को मंजूरी दी थी।

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