50 हजार लगाकर सालाना कमा सकते हैं 5 लाख रुपए तक, इस प्रोडक्ट की है देश-दुनिया में तगड़ी डिमांड 

you can earn up to 10 times in pearl farming: उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की धामपुर तहसील के रहने वाले किसान बिजेंदर चौहान ने खेती को अलग ही आयम दे दिया है। वे मोतियों की खेती करते हैं। Money Bhaskar से बातचीत में बिजेंदर ने बताया कि कोई भी व्यक्ति 50 हजार से एक लाख रुपए तक की पूंजी लगाकर साल में आसानी से कम से कम पांच गुना कमाई कर सकता है।

Money Bhaskar

Apr 03,2019 04:15:00 PM IST

नई दिल्ली.

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले की धामपुर तहसील के रहने वाले किसान बिजेंदर चौहान ने खेती को अलग ही आयम दे दिया है। यहां के गन्ना किसानों से इतर वे नए तरह की खेती करते हैं और इसमें उन्हें लाखों की कमाई होती है। वे मोतियों की खेती करते हैं। उन्होंने इस काम को दो साल पहले शुरू किया था। अब वे इसका प्रशिक्षण भी देते हैं और कई किसानों के लिए मिसाल बन चुके हैं। Money Bhaskar से बातचीत में बिजेंदर ने बताया कि कोई भी व्यक्ति 50 हजार से एक लाख रुपए तक की पूंजी लगाकर साल में आसानी से कम से कम पांच गुना कमाई कर सकता है।

यूट्यूब से सीखी मोतियों की खेती

34 वर्षीय बिजेंदर ने भी शुरुआत गन्ने की खेती से ही की थी, लेकिन बाकी किसानों की तरह उन्हें भी इसमें काफी नुकसान हुआ। इसके बाद उन्हाेंने कुछ अलग करने की सोची। वे पहले से ही फिश एक्वैरियम का बिजनेस कर रहे थे। उन्होंने एक्वाकल्चर में ही आगे बढ़ने के बारे में तय किया। ऐसे में उन्होंने आइडिया की तलाश में यूट‌्यूब पर कुछ वीडियो देखे। यहां पर उन्हें पर्ल फार्मिंग के बारे में पता चला। उन्होंने कई लोगों से इस बारे में बात की। इसके बाद नागपुर में उनकी भवन भाई पटले से बात हुई। वहां जाकर बिजेंदर ने मोतियों की खेती करने की ट्रेनिंग ली।

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अपने खेतों में बनाए तालाब

वापस लौटकर उन्होंने अपने तीन बीघा खेत में तालाब खुदवाए। उन्होंने इस काम में ट्रेनिंग ली थी लिहाजा बड़े स्केल पर काम शुरू किया। अपने खेतों की कीमत मिलाकर तालाब खुदवाने, फेंसिंग लगवाने में उन्होंने 25 लाख का निवेश किया। जैसे तालाबों में फिश फार्मिंग की जाती है, ठीक वैसे ही तालाबों में मोतियों की खेती भी होती है। इन तालाबाें में उन्होंने फिश फार्मिंग और पर्ल फार्मिंग दोनों शुरू कीं। पहली बार में उनकी दो लाख रुपए की मछलियां निकलीं और पांच लाख रुपए के मोती निकले। इस साल उन्हें और अधिक कमाई होने की उम्मीद है।

 

 

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जयपुर, देहरादून, मुंबई में बेचते हैं मोती

उनके मोतियों के खरीदारों में जयपुर, देहरादून, मुंबई में अपने मोती बेचते हैं। अभी तक तो वे मोतियों को ऐसे ही बेचते आए हैं। जल्द ही वे माेतियों की ज्वेलरी बनाकर बेचना शुरू करेंगे। इसके लिए वे जयपुर के कारीगरों और खरीदारों से बातचीत कर रहे हैं। अगर मोतियों की ज्वेलरी बनाकर बेची जाने लगेगी तो इससे किसानों को ज्यादा मुनाफा मिलेगा। अभी जो मोती 250 से 300 रुपए का बिकता है, वह 800 से 1,000 रुपए का बिकने लगेगा। जबकि ज्वेलरी बनाने में 50 से 100 रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा।

 

 

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सिर्फ 50 हजार की शुरुआती पूंजी लगेगी

अगर कोई किसान 50 गुना 20 या 50गुना 30 का एक तालाब तैयार कर लेता है, तो कच्चे तालाब को बनाने में 20 हजार की लागत आती है। पक्का तालाब बनाने में 50 हजार की लागत आएगी। इसके बाद अन्य लागत 30 से 40 हजार रुपए आएगी। यानी कच्चे तालाब में खेती के लिए 50 से 60 लाख रुपए और पक्के तालाब में खेती के लिए 90 हजार से 1 लाख रुपए लगेंगे। इसमें आसानी से पांच हजार सीप डाले जा सकते हैं। सारे खर्चे निकालने के बाद आराम से चार से पांच लाख रुपए बच जाएंगे। इसके बाद साल दर साल कमाई बढ़ती ही जाएगी।

 

ऐसे होती है मोतियों की खेती

बिजेंदर ने बताया कि नजदीक के तालाब और नदियों में से सीप कलेक्ट किए जाते हैं। उन सीपियों को तालाब के क्लाइमेंट के मुताबिक ढालने के लिए 10 से 12 दिनों के लिए तालाब में छोड़ दिया जाता है। इसके बाद हम अपनी जरूरत के हिसाब से उन सीपों की सर्जरी करते हैं। अगर सीपियों को बाहर से लाकर सीधे ऑपरेट कर दिया जाएगा तो उनकी मृत्यु दर बढ़ जाती है।

 

 

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ऐसे बनते हैं गोल और डिजायनर मोती

सीपियों की बाहरी परत और भीतरी परत में अलग-अलग सर्जरी की जाती है। बाहरी परत में दोनों तरफ से मोती डाले जाते हैं जो सीप के अंदर बढ़ते हैं और इससे डिजायनर मोती बनता है। भीतरी परत में सर्जरी करके सीप के पेट में मोती का न्युक्लियस डाला जाता है। इससे गोल मोती तैयार होता है। गोल माेती तैयार करने के लिए सीप का वजन 250 ग्राम से 300 ग्राम के बीच होना चाहिए। अगर इससे कम वजन के सीप के पेट में पर्ल न्युक्लियस डाला जाएगा तो सीप मर जाएगा। डिजायनर मोती के लिए 60 ग्राम वजनी सीप लगता है। बड़ी सीप में तीन से चार मोती डाले जा सकते हैं और एक गोल मोती तैयार हो जाता है। हालांकि ऐसी बड़ी सीपें बहुत कम मिलती हैं, इसलिए देश में डिजायनर मोतियों का काम होता है।

 

 

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सिर्फ भारत में होते हैं डिजायनर मोती

बिजेंदर के मुताबिक विदेशों में ज्यादा डिमांड गोल मोती की होती है। लेकिन डिजायनर मोती नया कॉन्सेप्ट है और यह सिर्फ भारत में होता है, इसलिए डिजायनर मोती के लिए काफी बड़ा मार्केट है। विदेश में मोतियों की खेती समुद्र में होती है, वहां फ्रेश वाम्टर में कोई मोतियों की खेती नहीं करता है। वहां एक ही सीप में 80 से 100 मोती मिल जाते हैं। भारत में फ्रेश वॉटर पर्ल फार्मिंग होती है।

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