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इस साल कश्‍मीरी अखरोट 100 रुपए तक हुआ सस्‍ता, बादाम की कीमतें 12% उछलीं

कश्‍मीरी अखरोट के सस्‍ता होने की वजह इसके एक्‍सपोर्ट में गिरावट और लोकल मार्केट में पैदावार की ज्‍यादा आवक है।

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नई दिल्‍ली. सर्दियां आने के साथ ही बाजार में अखरोट और बादाम की बिक्री में इजाफा होने लगा है। हालांकि इस बार इनमे कीमतों में अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहा है। इस साल कश्‍मीरी अखरोट पिछले साल से 25 फीसदी सस्‍ता है तो बादाम की कीमत में 12 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है। कश्‍मीरी अखरोट के सस्‍ता होने की वजह इसके एक्‍सपोर्ट में गिरावट और लोकल मार्केट में पैदावार की ज्‍यादा आवक है। पिछले साल कश्‍मीरी अखरोट का भाव 250 से 400 रुपए किलो था लेकिन इस बार इसकी कीमत 200 से 300 रुपए किलो है। वहीं दूसरी ओर बादाम की पैदावार कम होने से इस साल कश्‍मीरी बादाम के दाम 350 रुपए प्रति किलो तक हैं। पिछले साल इसके दाम 310 रुपए किलो तक थे। 

 

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मार्केट में 70 फीसदी अखरोट जम्‍मू-कश्‍मीर का 

बता दें कि देश में अखरोट और बादाम दोनों के प्रोडक्‍शन के मामले में जम्‍मू-कश्‍मीर अव्‍वल है, लेकिन ज्‍यादा पैदावार अखरोट की है। इंडिया में अखरोट के कुल प्रोडक्‍शन का सबसे ज्‍यादा 90 फीसदी कश्‍मीर में है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और उत्‍तराखंड के इलाकों में भी इसकी पैदावार होती है। देश में मिलने वाले अखरोट में से 70 फीसदी जम्‍मू-कश्‍मीर का ही होता है। 

 

500 से 700 रुपए है अखरोट की गिरी का दाम 

जम्‍मू फ्रूट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट व जम्‍मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्‍ट्री के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट राजेश गुप्‍ता ने moneybhaskar.com को बताया कि इस बार अखरोट का दाम 200 से 300 रुपए किलो तक है, जबकि पिछले साल यह 250 से 400 रुपए था। शेल वाले अखरोट में सबसे अच्‍छा अखरोट कागजी माना जाता है। अखरोट की गिरी का दाम उसकी वेरायटी के हिसाब से होता है। सबसे ज्‍यादा दाम व्‍हाइट हाफ गिरी का होता है। इस वक्‍त मार्केट में इस वेरायटी वाली गिरी का दाम 500 रुपए से 700 रुपए तक है। पिछले साल इस गिरी का दाम 800 से 1000 रुपए तक था। 

 

कम है पैदावार लेकिन क्‍वालिटी है अच्‍छी 

गुप्‍ता के मुताबिक जम्‍मू-कश्‍मीर में अखरोट की पैदावार इस साल पिछले साल की तुलना में 15 फीसदी कम हुई। हालांकि इस बार के अखरोट की क्‍वालिटी पिछले साल के मुकाबले अच्‍छी है। उन्‍होंने बताया कि वैसे तो बड़े पैमाने पर देश में यहां का प्रोक्‍शन ही बिकता है लेकिन 3-4 सालों से बाहर से आने वाले अखरोट ने लोकल प्रोडक्‍शन को नुकसान पहुंचाया है। अखरोट की क्‍वालिटी कैसे प्रभावित होती है, इस पर गुप्‍ता ने बताया कि अगर अखरोट की गिरी के पूरा पकने से पहले ही फल तोड़ लिया जाता है और अप्राकृतिक तरीके से उसे फोड़ा जाता है तो अखरोट की गिरी कच्‍ची रह जाती है और उसकी क्‍वालिटी खराब हो जाती है। क्‍वालिटी बनाए रखने के लिए उसे पूरा पकने देना चाहिए। अक्‍सर फेस्टिव सीजन पहले आने की वजह से डिमांड को देखते हुए ग्रोअर उसे पहले ही तोड़ लेते हैं। ऊपर से इस साल बारिश भी कम रही है, इसकी वजह से भी क्‍वालिटी अच्‍छी है। 

 

4-5 सालों में 30 फीसदी तक गिरा अखरोट का एक्‍सपोर्ट 

गुप्‍ता ने बताया कि जम्‍मू-कश्‍मीर से अखरोट की गिरी का एक्‍सपोर्ट होता है। भारत से अखरोट का एक्‍सपोर्ट मुख्‍यत: फ्रांस, यूके, नीदरलैंड, यूनाइटेड अरब रिपब्लिक, नेपाल, जर्मनी और स्‍वीडन हैं। पिछले 4-5 सालों से अखरोट की लोकल खपत बढ़ी है। इसलिए एक्‍सपोर्ट में लगभग 30 फीसदी तक की गिरावट आई है। ऊपर से बाहर के बाजारों में भी कैलिफोर्निया अखरोट की डिमांड ज्‍यादा है। इसकी वजह है कि उनकी शेप और क्‍वालिटी हमेशा एक सी रहती है और उनका दाम भी 250 से 350 रुपए तक ही होता है। पहले लोकल प्रोडक्‍शन के 70 से 80 फीसदी तक का एक्‍सपोर्ट होता था लेकिन अब केवल 30 फीसदी तक का ही एक्‍सपोर्ट होता है। भारत ने 2016-17 में 21,911 लाख टन अखरोट का एक्‍सपोर्ट किया था, जो 55 .27 करोड़ रुपए का था। 

 

इस साल 350 रुपए किलो है कश्‍मीर का बादाम 

गुप्‍ता ने बताया कि कश्‍मीर में पिछले कुछ सालों में बादाम के प्रोडक्‍शन में 80 फीसदी तक की गिरावट आई है। इसकी वजह है यहां के बादाम का बाहर से आने वाले कैलिफोर्निया बादाम से क्‍वालिटी बेसिस पर मुकाबला न कर पाना। इसकी कीमत की बात करें तो इस साल कश्‍मीर से आने वाले बादाम के दाम 350 रुपए प्रति किलो तक हैं, वहीं पिछले साल दाम 310 रुपए किलो तक थे। इस साल कीमतों में बढ़ोत्‍तरी की वजह कश्‍मीर में बादाम की कम पैदावार है। 

 

 

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