बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Agri-Biz2 माह के कोर्स ने बदली कि‍स्‍मत, हर माह 1.2 लाख कमा रहे रेड्डी

2 माह के कोर्स ने बदली कि‍स्‍मत, हर माह 1.2 लाख कमा रहे रेड्डी

ट्रेनिंग का सहारा लेते हुए सब्‍जि‍यों की फार्मिंग शुरू की और आज उनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपए पहुंच गया है।

1 of
नई दिल्‍ली। आई वॉक फार्मिंग, आई टॉक फार्मिंग, आई ब्रीद फार्मिंग - कुछ ऐसा कहते हैं 52 साल के श्री के रंगा रेड्डी, जो आज बेहद सफलतापूर्वक 'ताजी-ताजी सब्‍जी' के नाम से एग्री बि‍जनेस कर रहे हैं। फरवरी 2010 में उन्‍होंने नई तकनीकों और ट्रेनिंग का सहारा लेते हुए सब्‍जि‍यों की फार्मिंग शुरू की और आज उनका सालाना टर्नओवर 1 करोड़ रुपए पहुंच गया है। तेलंगाना के चंदापुर गांव के रहने वाले रेड्डी अब इलाके के लोगों के लि‍ए मि‍साल बन गए हैं। वह हैराबाद के कृषि‍ विश्‍वविद्यालयों व इंस्‍टीट्यूट में फाइनल ईयर के छात्रों को लेक्‍चर  भी देते हैं। वह आसपास के कि‍सानों को खेतीबाड़ी के आधुनि‍क तौर तरीकों से वाकि‍फ कराते हैं। आगे पढ़ें 

काम की तलाश में गए सऊदी 
रेड्डी ने एग्रीकल्‍चर में ग्रेजुएशन की मगर भारत में खेती उतनी लाभदायक साबि‍त नहीं हुई। काम की तलाश में वह सऊदी चले गए। उनके पास कोई टेक्‍नि‍कल डि‍ग्री तो थी नहीं इसलि‍ए उन्‍हें वहां फार्म हाउस पर काम मि‍ल गया। खेतीबाड़ी की जानकारी होने की वजह से यहां उन्‍हें तवज्‍जो मि‍ली और वह खेतीबाड़ी के काम में जुटी कंपनी में प्रोडक्‍शन मैनेजर हो गए। 
रेड्डी ने देखा कि कैसे खेती के लि‍ए अनुकूल माहौल न होने के बावजूद सऊदी में तकनीक की बदौलत सब्‍जि‍यां पैदा की जा रही हैं। वर्ष 2010 में उन्‍होंने भारत लौटने का मन बना लि‍या। रेड्डी के दि‍माग में सब्‍जि‍यों वाली बात घूमती रही और यहां आकर उन्‍होंने सब्‍जी की खेती शुरू कर दी।  आगे पढ़ें 

 

कि‍या दो महीने का कोर्स 
रेड्डी के पास खेतीबाड़ी का करीब 25 साल का अनुभव है। मगर उन्‍होंने इसकी बारीकि‍यां सीखने के लि‍ए पार्टि‍सि‍पेटरी रूरल डेवलपमेंट इनि‍शि‍एटि‍व सोसायटी  से दो महीने का कोर्स कि‍या। यह कोर्स नि‍शुल्‍क था। इसके बाद उन्‍होंने पंडाल और शेड का यूज करते हुए सब्‍जि‍यों की हाईटेक खेती शुरू की।  
उन्‍होंने एक मोबाइल वैन तयार की जि‍ससे वह सब्‍जयों को नजदीकी दुकानों और बाजार तक पहुंचाते हैं। जब सब्‍जि‍यों का प्रोडक्‍शन ज्‍यादा हो जाता है तो वह अपनी वैन लेकर सरकारी दफ्तरों के बाहर पहुंच जाते हैं। यहां सरकारी कर्मचारी शाम को दफ्तर से  लौटते हुए सस्‍ती सब्‍जि‍यां ले पाते हैं। 
इसके अलावा वह सब्‍जि‍यों और फलों की खेती करने वाले कि‍सानों को सलाह भी मुहैया कराते हैं। आसपास के इलाकों के कई कि‍सान इनके खेतों को देखने के लि‍ए यहां आते हैं। उनकी सफलता को देखते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा ने उन्‍हें 25 लाख का लोन भी दि‍या है ताकि वह अपने काम का वि‍स्‍तार कर सकें। रेड्डी से इस मेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं - krreddy28@yahoo.com 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट