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गेहूं के भूसे और सड़ी हुई फूस के ढेर से कर रही है मोटी कमाई

'मशरूम गर्ल' के नाम से प्रसिद्ध है बिहार की यह बेटी

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नई दिल्ली.

बिहार के सीतामढ़ी जिले के वरहरि बेहटा गांव की रहने वाली अनुपम कुमारी अपने इलाके के लोगों, खासतौर से महिलाओं के लिए मिसाल हैं। ऐसा इसलिए कि उन्होंने खेती से अपने परिवार की किस्मत तो चमकाई ही, साथ ही गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने पैरों पर खड़े होने का हुनर सिखाया। 24 वर्षीय अनुपम मशरूम की खेती करती हैं। 2010 में उन्हाेंने महज 500 वर्ग फुट के खेत में 500 रुपए लगाकर यह काम शुरू किया था और वह अब कई गुना अधिक कमाई कर रही हैं।

 

ऐसे बनीं किसान

अनुपम के पिता किसानी करने के साथ एक निजी कॉलेज में अस्थायी तौर पर शिक्षक की नौकरी भी करते थे। जब अनुपम ने देखा कि पिता नौकरी में परेशान हो रहे हैं और कमाई ज्यादा नहीं हो रहीं है, तो उसने उन्हें नौकरी छोड़कर खेती में जुटने को मनाया। तब तक वह गांव के स्कूल से 12वीं और मिथिला यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई कर चुकी थी। खेती में कुछ नया करने के लिए दोनों कृषि विज्ञान केंद्र जा पहुंचे। यहां पर उन्होंने मशरूम की खेती के बारे में सीखा। अनुपम ने मशरूम उत्पादन और केंचुआ खाद उत्पादन विषयों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया। सीतामढ़ी, पटना और दिल्ली के विभिन्न शोध संस्थानों और कृषि केंद्रों से खेती की बारीकियां सीखीं। इसके बाद अनुपम अपने गांव में ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन शुरू किया।

 

 

साधारण किसान से बनीं मशरूम गर्ल

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक जब अनुपम ने मशरूम की खेती शुरू की तो गांव की औरतों ने उसपर तेज कसे कि वह 'गोबर चट्‌टाउगा रही है। गांव में मशरूम को इसी नाम से जाना जाता था। लेकिन जब खेती शुरू करने के तीन महीने में ही अनुपम की 10,000 रुपए की कमाई हुई तो सबके मुंह बंद हो गए। 500 रुपए लगाकर अनुपम को 20 गुना अधिक कमाई हुई थी। इसके बाद उन्हीं औरतों ने उससे प्रशिक्षण लेना शुरू किया। आज अनुपम हर तीन महीने में 50 क्विंटल मशरूम की बिक्री करती हैं। वे ऑयस्टरबटन और मिल्की व्हाइट मशरूम उगाती हैं। अब लोग उन्हें मशरूम गर्ल के नाम से जानते हैं।

 

 

खुल गए कमाई के रास्ते

इसके अलावा वह गांव में केंचुआ खाद उत्पादन (वर्मी कमोस्टकी जानकारी भी कृषकों को दे रही। साथ ही उन्होंने मछली पालन और बागवानी भी शुरू की है। वे कृषि महकमे के प्रशिक्षित लोगों में शामिल हैं और महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए उन्हें हर महीने 15 हजार रुपए मिलते हैं। उन्हें खेती ने राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाई। उन्हें ‘अभिनव किसान’ सम्मान मिला और इस साल वे देश के सर्वश्रेष्ठ किसानों में चुनी गईं।

 

 

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