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यूरोप में था 35 लाख का पैकेज, उसे छोड़कर लौट आए अपने देश, अब किसानों को सिखा रहे खेती का हुनर

पारंपरिक खेती के नुस्खों और नेचुरल प्रोडक्स से होता है 25 लाख का टर्नओवर

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नई दिल्ली. विदेश में नौकरी हासिल करके लग्जरी लाइफ जीना ज्यादातर भारतीयों खासकर युवाओं का सपना होता है। हालांकि कुछ ऐसे लोग होते हैं, जिनमें कहीं न कहीं अपने देश और अपने लोगों के लिए कुछ करने की चाहत होती है। यहीं चाहत उन्हें अपने देश खींच लाती है। इन्हीं तरह के लोगों में समर्थ जैन जैसे निकलकर सामने आते है, जो साल 2013 में यूरोपीय देश बेल्जियम में बतौर रिसर्च साइंटिस्ट की 35 लाख पैकेज की नौकरी छोड़कर भारत आ जाते हैं और खेती को लेकर लोगों को जागरुक करते हैं। साथ ही उन्हें खेती के पुराने तरीकों को अपनाकर रासायनिक खाद के प्रयोग से होने वाले नुकसान से बचाने की कोशिश करते हैं। 

 

नौकरी छोड़कर और खेती करने पर मिला परिवार का साथ

समर्थ जैन की आज अपनी कसल्टेंसी फर्म है। साथ ही वे नेचुरल प्रोडक्ट बनाते हैं। इससे एक साल में 25 लाख रुपए तक का टर्नओवर हो जाता है। इसके अलावा उन्होंने गांव के दर्जनों लोगों को रोजगार दिया है। समर्थ की कोशिश रहती है, कि उनके प्रयास से गांव के लोग बेहतर कर सकें। समर्थ की इस कोशिश में उनकी पत्नी और पूरा परिवार उनके साथ है। 

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वैदिक वाटिका नाम से बनाया अपना प्रोजेक्ट

समर्थ जैन छतीसगढ़ के एक छोटे से पहाड़ी जिले जशपुरनगर के रहने वाले हैं। उन्होंने नोएडा के एमिटी यूनिवर्सिटी से एमटेक किया और यूरोपीय देश बेल्जियम में रिसर्च साइंटिस्ट की नौकरी हासिल की। समर्थ जैन बेल्जियम में जहां रहते थे, वहां उन्होंने पारंपरिक तरीके से खेती के हुनर के बारे में जाना। इसके बाद उन्हें अपने देश में पुरखों की पड़ी पुश्तैनी जमीन पर खेती करने का आइडिया आया। इसी आइडिया के साथ समर्थ ने जशपुरनगर में अपना एक प्रोजेक्ट शुरू किया। इसका नाम रखा 'वैदिक वाटिका'। समर्थ ने वैदिक वाटिका में एक प्रयोगशाला भी बना रखी है, जिसमें वो अपनी पढ़ाई और नौकरी से मिले अनुभवों का बखूबी इस्तेमाल कर अपनी खेती को और सफल बनाने में जुटे रहते हैं। इस प्रयोगशाला में वो अपनी जमीन के अलग-अलग हिस्सों की मिट्टी का सैम्पल लेकर उसका परीक्षण करते हैं। इसके अलावा वो दैनिक इस्तेमाल के ऑर्गैनिक प्रोडक्ट्स बनाने और उसे मार्केट में पहुंचाने का काम भी कर रहे हैं। 

 

 

पारंपरिक खेती पर दिया जोर 

समर्थ जैन अपनी वाटिका में खेती में काम आने वाले कई तरह के प्रोडक्ट बनाते हैं। साथ ही स्थानीय किसानों को खेती के पारंपरिक नुस्खों और नेचुरल प्रोडक्ट के बारे में बताते हैं। समर्थ जैन का कहना है, "रासायनिक खादें और दवाएं पर्यावरण, जमीन, फसल और इंसानों को किस कदर नुकसान पहुंचा रही हैं, इस बात से अब कोई भी अंजान नहीं है। लेकिन लोग फिर भी रसायनों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि इसका कोई विकल्प नहीं है। हम उन्हें दिखा देना चाहते हैं कि जैविक खेती हर लिहाज से फायदेमंद है। एक बहुत जरूरी बात मैं लोगों को समझाना चाहता हूं कि केमिकल फार्मिंग में प्लांट को फीड करते हैं, जबकि ऑर्गेनिक फार्मिंग में हम मिट्टी को फीड करते हैं, क्योंकि मिट्टी का स्वास्थ्य अच्छा होगा तो फसलें अपने आप अच्छी होती रहेंगी।"

 

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