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बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Agri-Bizक्या इथेनॉल से दूर होगा किसानों का संकट, जानिए एक्सपर्ट की राय

क्या इथेनॉल से दूर होगा किसानों का संकट, जानिए एक्सपर्ट की राय

नई दि‍ल्‍ली। महंगे क्रूड और गन्ना किसानों की बढ़ती प्रॉब्लम ने एक बार फिर इथेनॉल मिक्सिंग की मांग को बढ़ा दिया है। मनीभास्कर ने इस संबंध में एनर्जी एक्सपर्ट और एग्री एक्सपर्ट से बातचीत की। उनसे यह समझा कि क्या इथेनॉल 5.65 लाख करोड़ के क्रूड बिल और 20 हजार करोड़ का बकाया झेल रहे गन्ना  किसानों की समस्या दूर कर सकता है।

 

 

सरकार का क्या है प्लान

 

 केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 तक पेट्रोल में इथेनॉल की मिक्‍सिंग को 20% करने का प्‍लान बनाया है मगर हम अभी 2.1 फीसदी ब्‍लेंडिंग ही कर पा रहे हैं।  वहीं ब्राजील और अमेरिका जैसे देश पेट्रोल में 10-25 फीसदी एथेनॉल की मिक्सिंग कर रहे हैं।

 

 

गन्‍ने से बनता है इथेनॉल 


इथेनॉल गन्‍ने से तैयार कि‍या जाता है। वर्ष 2003 में भारत में पेट्रोल में 5 फीसदी की इथेनॉल मि‍क्‍सिंग को अनिवार्य कि‍या गया था। इसका मकसद था पर्यावरण की सुरक्षा, वि‍देशी  मुद्रा की बचत और कि‍सानों का फायदा। अभी 10% तक ब्‍लेंडिंग की जा सकती है।  बड़ी मात्रा में गन्‍ने का उत्‍पादन करने वाले महाराष्‍ट्र जैसे राज्‍य पहले से इसकी वकालत करते आ रहे हैं।  इथेनॉल का प्रोडक्शन बढ़ाया जाय इसके लिए अभी हाल ही  में जीएसटी काउंसि‍ल की  में इथेनॉल पर लगने वाले जीएसटी को 18 से घटाकर 12% कर दिया गया है।  

 

क्या किसानों का संकट हो जाएगा खत्म

 

 

एग्री बि‍जनेस एक्‍सपर्ट विजय सरदाना के मुताबि‍क, अगर सरकार इथेनॉल के उत्‍पादन और खपत को बूस्‍ट करे तो हमारे कि‍सानों को काफी फायदा होगा। गन्‍ना के बकाये जैसी समस्‍या खत्‍म हो जाएगी और हमारे लगातार बढ़ते क्रूड बि‍ल को कम करने में मदद मि‍लेगी। 

 

 

सरदाना के मुताबि‍क, पेट्रोल में 20 परसेंट की इथेनॉल ब्लेडिंग को अनिवार्य कर दिया जाए। भारत करीब 5.65 लाख करोड़ का क्रूड ऑयल इंपोर्ट कर रहा है। अगर हम इथेनॉल मि‍क्‍सिंग को अनि‍वार्य कर दें और सारा प्रोडक्‍शन खुद करें तो क्रूड बि‍ल में करीब 1 लाख करोड़ रुपए बचा सकते हैं। इसके एक हिस्‍से का इस्‍तेमाल किसानों के वेलफेयर में किया जा सकता है और बकाया जैसी समस्‍या तो पूरी तरह से खत्‍म हो जाएगी। 

 

 

इथेनॉल की भी सीमा है 


पेट्रोल में इथनॉल की ब्‍लेंडिंग बढ़ाना एक अच्‍छा ऑप्‍शन तो है मगर इसकी सीमाएं भी हैं। एनर्जी एक्‍सपर्ट नरेंद्र तनेजा के मुताबि‍क, सरकार इथनॉल ब्‍लेडिंग को प्रोत्‍साहि‍त कर रही है मगर हमें एक बैलेंस बनाकर भी चलना होगा। जाहि‍र सी बात है ज्‍यादा इथेनॉल बनाने के लि‍ए हमें गन्‍ने का और उत्‍पादन करना होगा। गन्‍ने की खेती में पानी काफी लगता है और फि‍लहाल सिंचाई की व्‍यवस्था उतनी दुरुस्‍त नहीं है। 

 

ब्राजील के लिए ऐसा करना क्यों आसान


तनेजा के अनुसार ब्राजील जैसे देश के लि‍ए यह करना आसान इसलि‍ए हुआ क्‍योंकि उनके पास भारत से तीन गुना जमीन और आबादी यूपी जितनी है । हमारे पास जमीन और उत्‍पादन क्षमता सीमि‍त है। 

 

ज्यादा फोकस खाद्यान्न की भी कर सकता है कमी

 

अगर हम गन्‍ने पर बहुत ज्‍यादा फोकस करेंगे तो ऐसा ना हो कि हमें खाद्यान का आयात करना पड़े। इसलि‍ए हमें एक बैलेंस बनाकर चलना होगा। ब्राजील में पेट्रोल में 20 से 25 फीसदी की इथनॉड ब्‍लेंडिंग की जाती है। बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इथेनॉल ब्‍लेंडिंग को बढा़ने पर ध्‍यान देना चाहि‍ए, साथ ही भूमि सुधार और सिंचाई की अच्‍छी व्‍यवस्‍था भी होनी चाहि‍ए। ऐसा नहीं है कि‍ ब्‍लेंडिंग बढ़ा देने से अचानक भारत के क्रूड बि‍ल में कमी आ जाएगी क्‍योंकि हमारी खपत भी हर सालाना 8.5 फीसदी की दर से बढ़ रही है। 

 

 

 

पीएसयू कंपनियों का बढ़ाया जाय रोल

 


सरदाना के अनुसार   देश की सभी पेट्रोलियम कंपनियां सार्वजनिक हैं। अगर प्राइवेट मिलों में किसी तरह का इश्यू है तो ये कंपनियां इथेनॉल प्रोडक्‍शन के लिए उनमें स्‍टेक ले सकती हैं। इथेनॉल की फैक्‍ट्री एक साल में प्रोडक्शन के लिए तैयार हो जाती है। सारी कैलकुलेशन सामने है। सरकार इसके जरिए इथेनॉल का ऐसा रेट तय करे, जिससे किसानों को लाभ मिले और निवेशक को वाजिब रिटर्न मिले। सरकार को इसके प्रोडक्‍शन को प्रोत्‍साहन देना चाहिए।

 

 
 

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