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एमपी के दो कि‍सानों ने उगाई 50 लाख की अफीम, इस एक गलती से सब खत्‍म

अफीम के खेती बहुत ही फायदे का सौदा होती है, लेकि‍न तभी जब उसे सभी कानूनी औपचारि‍कताएं पूरी करने के बाद कि‍या जाए।

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सतना। अफीम के खेती बहुत ही फायदे का सौदा होती है, लेकि‍न तभी जब उसे सभी कानूनी औपचारि‍कताएं पूरी करने के बाद कि‍या जाए। वरना वह फसल अवैध हो जाती है। जानबूझकर या अनजाने में कानूनी मंजूरी लि‍ए बि‍ना इसकी खेती गैरकानूनी मानी जाती है। मध्यप्रदेश के सतना जिले में  सभापुर थाना क्षेत्र के रूइया गांव में सुरजीत सिंह और राजा सिंह ने करीब आधा एकड़ जमीन में अफीम की खेती की थी। बीते मंगलवार को पुलि‍स ने न केवल दोनों को गि‍रफ्तार कर लि‍या बल्‍कि उनकी करीब 50 लाख रुपए मूल्‍य की अफीम की फसल को जब्‍त कर लि‍या। अगर इन कि‍सानों ने केवल एक वि‍भाग से मंजूरी ले ली होती तो कोई इनकी फसल को हाथ नहीं लगाता। आगे पढ़ें 

 

 

नारकोटि‍क्‍स की मंजूरी जरूरी 
अफीम की खेती भारत, चीन, एशिया माइनर, तुर्की आदि देशों में होती है। इसे पोस्‍त कहा जाता है। भारत में यूपी, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान में कई कि‍सान इसकी खेती करते हैं। इसकी खेती बहुत फायदे का सौदा है इसीलि‍ए अब धीरे धीरे अफीम की खेती करने वालों की गि‍नती बढ़ रही है। इसका इस्‍तेमाल दवाएं बनाने में होता है। मगर एक सच ये भी है कि‍ अफीम की खेती गैरकानूनी है। अगर कोई कि‍सान इसे बोना चाहता है तो उसे पहले आबकारी वि‍भाग से इसकी मंजूरी लेती होती है।  आगे पढ़ें इस तरह की जमीन में होती है अच्‍छी खेती 


 

चाहि‍ए ऐसी जमीन 
इसकी खेती के लिए 20-25 डिग्री सेल्सियम तापमान की आवश्यकता होती है। इसे सभी प्रकार की जमीन में उगाया जा सकता है। हालांकि उचित जल निकास एवं पर्याप्त जीवांश पदार्थ वाली मध्यम से गहरी काली मिट्टी जिसका पी.एच. मान 7 हो तथा जिसमें विगत 5-6 वर्षों से अफीम की खेती नहीं की जा रही हो ज्‍यादा उपयुक्त मानी जाती है। जवाहर अफीम-16, जवाहर अफीम-539 एवं जवाहर अफीम-540 आदि मध्य प्रदेश के लिए अनुसंशित किस्में हैं । इसकी बुवाई अक्टूबर के अन्तिम सप्ताह से नवम्बर के दूसरे सप्ताह तक की जाती है। आगे पढ़ें इस तरह होती है बुवाई 

इस तरह होती है बुवाई 
अफीम का बीज छोटा होता है इसलि‍ए खेत को तैयार करना पड़ता है। इसमें खेत की दो बार खड़ी और आड़ी जुताई की जाती है। गोबर की खाद से फसल को काफी फायदा पहुंचता है इसलि‍ए इसलि‍ए खेत के साइज के हि‍साब से उचि‍त मात्रा में गोबर की खाद जरूर मि‍लाएं। बीच बोने के लि‍ए करीब 3 मीटर लंबी और 1 मीटर चौड़ी क्‍यारि‍यां बनाई जाती हैं। बीजों को आधे से एक सेंटीमीटर गहराई पर 30 सेंटीमीटर कतार से कतार बुवाई करें। एक पौधे और दूसरे के बीच करीब 10 सेंटीमीटर का अंतर रखें। इसमें बुवाई के तुरन्त बाद सिंचाई करनी चाहि‍ए।

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