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Home » Industry » Agri-BizPM-Kisan Scheme: Direct cash assistance to be late

पीएम मोदी की 6000 रुपए देने की योजना पर अड़ंगा, इन राज्यों के किसानों को नहीं मिल सकेगा इसका फायदा

24 फरवरी को पीएम मोदी करेंगे योजना की शुरूआत, लाभार्थियों को देंगे 2000 रुपए का चेक

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नई दिल्ली. केंद्र ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) की घोषणा काफी जोरशोर से की थी। लेकिन अब यह योजना राजनीति भेंट चढ़ती दिख रही है। ऐसे में इस योजना का फायदा फिलहाल देश के कई राज्यों के किसानों को नहीं मिल सकेगा। केंद्र और राज्य सरकार दोनों स्तर पर अपना राजनीतिक फायदा ढ़ूढ़ रही है। 

 

गैर भाजपा शासित राज्यों के किसानों को देर से मिलेगा योजना का फायदा 

जहां एक तरफ गैर भाजपा शासित राज्यों की ओर से किसानों का नाम केंद्र को भेजने में देरी हो रही है। वही केंद्र की ओर से गैर भाजपा शासित राज्यों के किसानों के नाम को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है। बता दे कि अब तक मध्य प्रदेश, राज्यस्थान और छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की ओर से किसानों के नाम भेजने की रफ्तार काफी कम है। केंद्र सरकार के पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) ने अब तक राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के एक भी किसानों को योजना की लाभार्थियों की लिस्ट में शामिल नहीं किया है, जबकि छत्तीसगढ़ के एक और पंजाब के 5 हजार किसानों को शामिल किया गया है। 

 

सबसे ज्यादा यूपी के किसानों को मिलेगा फायदा 

भाजपा शासित राज्यों की बात करें, तो  इसमें 2.25 लाख के साथ उत्तर प्रदेश सबसे आगे हैं, जबकि दुसरे स्थान पर गुजरात, तीसरे पर तमिलनाडु और चौथे स्थान पर महाराष्ट्र है, जबकि राजस्थान, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल के एक भी किसान को अब तक लाभार्थियों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार ने छ्त्तीसगढ़ के एक और पंजाब के 5103 नामों को फाइनल कर दिया है।  PFMS की ओर से अब तक 5.4 लाख किसानों के नाम को योजना के लाभार्थियों की लिस्ट में शामिल किया गया है। इन योजना के लिए राज्यों की ओर से कुल 2 करोड़ किसानों के नाम इनरोल्ड किए हैं। इसमें से ज्यादातर किसान भाजपा शासित राज्यों के हैं। बता दें कि पीएम मोदी 24 फरवरी को योजना की पहली 2000 रुपए की किस्त किसानों को देंगे। योजना के तहत 120 मिलियन किसानों तक फायदा पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। 

 

 

केंद्र को नाम भेजने में साउथ के राज्य आगे 

साउथ के राज्य कर्नाटक ने सबसे ज्यादा किसानों के नाम भेज दिए हैं। कर्नाटक में पहले से ऐसी ही योजना जारी है। इसलिए राज्य सरकार के पास किसानों के जमीन का डाटा पहले से मौजूद है।  जिन राज्यों की ओर से केंद्र को डाटा नहीं भेजा गया है, उन राज्यों के किसानों को योजना का लाभ मिलने में देरी हो सकती है। ऐस में लोकसभा चुनाव होने तक इंतजार करना पड़ सकता है। 

 

 

योजना के लाभार्थियों की तीन स्तर पर होती है जांच

किसानों को योजना का फायदा देने के लिए तीन स्तर पर जांच होती है। सबसे पहले राज्यों को अपने किसानों की जानकारी पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) को देनी होती है। मतलब इनरोल्ड कराना होता है। जो लाभार्थियों के नाम की जांच करने के बाद उन्हें केंद्रीय कृषि मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के पास भेजना होता है, जहां से किसानों के खाते और दूसरी डिटेल की जानकारी को आगे बढ़ाया जाता है। सारी जांच के बाद किसानों को पहली किस्त जारी की जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में काफी वक्त लगता है. ऐसे जिन राज्यों ने किसानों के नाम नहीं भेजे है, उन राज्यों के किसानों को योजना का लाभ देर से मिल सकेगा। 

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