बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Agri-Bizकभी मजदूरी करने को था मजबूर, खड़ा कर दि‍या 50 लाख का कारोबार

कभी मजदूरी करने को था मजबूर, खड़ा कर दि‍या 50 लाख का कारोबार

राजेश कुमार अर्जि‍या अब एक सफल एग्री बि‍जनेसमैन के तौर पर जाने जाते हैं।

1 of

नई दि‍ल्‍ली। राजस्‍थान के भीलवाड़ा के गरीब परि‍वार में पैदा हुए राजेश कुमार अर्जि‍या अब एक सफल एग्री बि‍जनेसमैन के तौर पर जाने जाते हैं। वह विजयनगर में दीपक फि‍श एंड फि‍श सीड्स के नाम से कंपनी चलाते हैं। उनके पास करीब 20 तलाब हैं और वह बि‍जनेस का लगातार वि‍स्‍तार कर रहे हैं। मगर यहां तक सफर तय करने के लि‍ए राजेश ने काफी मेहनत की है। 


सन 1994 में वि‍जयनगर आकर बसे राजेश कॉलेज ड्रॉप आउट हैं। कमाई का कोई जरि‍या न होने के चलते वह दि‍हाड़ी मजदूर का काम करने लगे। करीब 10 साल तक उनका गुजर बसर माल की ढुलाई जैसे कामों से होने वाली मामूली आय पर ही चलता रहा। मगर तंगहाली में मछली पकड़ने के एक अनुभव ने उन्‍हें आज फि‍श कंपनी का मालि‍क बना दि‍या, जि‍सका टर्नओवर करीब 40 से 50 लाख रुपए सालाना है।  आगे पढ़ें - जब घर में बचे थे केवल 50 रुपए 

घर में बचे थे 50 रुपए 
राजेश ने बताया, कि‍ मजदूरी करते करते मुझे शराब पीने की लत भी लग गई थी। एक दि‍न की बात है मेरे घर में केवल 50 रुपए थे। मैंने सोचा अगर इन पैसों की भी शराब पी ली तो खाने को कुछ नहीं बचेगा। ऐसे में मैंने अपने बेटे को साथ लि‍या और हम नदी पर मछली पकड़ने गए। यहां हमने खूब मछि‍लयां पकड़ीं और करीब 800 रुपए में बाजार में बेच दीं। यहीं से मुझे कमाई का दूसरा आइडि‍या आया। मैं घूम घूम कर मछि‍लयां पकड़ने और बेचने का काम करने लगा। मैंने उसी दि‍न शराब पीना छोड़ दि‍या था। आगे पढ़ें 

 

11 हजार में लि‍या ग्रामीण तलाब
इसके बाद मैंने 11000 रुपए के ठेके पर ग्रामीण तलाब ले लि‍या। मछली पालन के बारे में पूरी जानकारी हासि‍ल करने के लि‍ए मैंने मत्‍सय वि‍भाग से संपर्क कि‍या और वहां से ट्रेनिंग ली। ट्रेनिंग की कोई फीस नहीं थी बल्‍कि‍ 50 रुपए का स्‍टाइफंड भी मि‍लता था। जानकारी बढ़ी तो आत्‍मवि‍श्‍वास भी बढ़ा और फि‍र मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। मैंने अपने बेटों, बेटी और पत्‍नी को भी ट्रेनिंग दि‍लवाई ताकि‍ सभी लोग मि‍लकर बिजनेस का हि‍स्‍सा बन सकें। धीरे-धीरे मैं अपने कारोबार को बढ़ाता चला गया। आगे पढ़ें 

 

 

 

शुरुआत ग्रामीण तालाब से करें

आज राजेश की इलाके में अपनी एक पहचान है। मत्‍स्‍य वि‍भाग उन्‍हें अलग अलग राज्‍यों में नि‍शुल्‍क भेजता है ताकि‍ वह यह सीख सकें कि‍ बाकी राज्‍यों के लोग मछली पालन में कि‍स तरह के नए प्रयोग कर रहे हैं। उनका अगला मकसद मत्‍स्‍य बीज उत्‍पादन व चारा उत्‍पादन शुरू करना है, जि‍से वह अगले साल शुरू कर देंगे।
अगर कोई मछली पालन करना चाहता तो राजेश उसी यही सलाह देते हैं कि‍ शुरुआत ग्रामीण तलाब को ठेके या पट्टे या कि‍राये पर लेकर करें या फि‍र अगर आपकी जमीन डूब में है तो वहां आप इसे ट्रार्इ कर सकते हैं। 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट