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मीट एक्‍सपोर्ट में दोबारा तेजी आने की उम्‍मीद, सरकार के यू टर्न का होगा असर

भारत दुनि‍या में बीफ का तीसरा सबसे बड़ा एक्‍सपोर्टर है।

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नई दि‍ल्‍ली। पशुवध को लेकर कड़े कानून की वजह से मीट एक्‍सपोर्ट में आई करीब 18% गि‍रावट के बाद सरकार ने नि‍यमों में ढि‍लाई का मसौदा तैयार कि‍या है। मीट कारोबारि‍यों को उम्‍मीद है कि‍ नए नि‍यमों से नि‍र्यात एक बार फि‍र अपनी रफ्तार पकड़   लेगा। यह अभी ड्राफ्ट है, मगर बहुत उम्‍मीद है कि‍ जल्‍द ही यह कानून पुराने कानून की जगह ले लेगा। 


पि‍छले साल 23 मई को लागू हुए प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलि‍टी टू एनि‍मल्‍स रूल्स 2017 को लेकर पूरे देश में काफी हंगामा हुआ था। इसके तहत वध करने के लि‍ए मार्केट में दुधारू पशुओं की खरीद फरोख्त पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। इस नि‍यम का कारोबारि‍यों ने काफी विरोध कि‍या था। हालांकि तब सरकार ने अपना स्‍टैंड नहीं बदला, जि‍सका खामि‍याजा एक्‍सपोर्ट में गि‍रावट के रूप में भुगतना पड़ा। 


वर्ष 2015-16 के मुकाबले वर्ष 2016-17 में गौवंश (MEAT OF BOVINE ANIMALS, FRESH AND CHILLED) के मीट के एक्‍सपोर्ट में करीब 18 फीसदी की गि‍रावट दर्ज की गई थी। 


सरकार के कदम का स्‍वागत करते हैं 
इंडिया फ्रोजन फूड के मोहम्‍मद हाजी इमरान ने कहा कि सरकार का यह कदम स्‍वागतयोग्‍य है। मौजूदा नि‍यमों की वजह से कई बार बेवहज परेशानि‍यों का सामना करना पड़ता है। मीट एक्‍सपोर्ट के मामले में दुनि‍या में हमारी पोजीशन काफी मजबूत है, मगर पि‍छले साल नए नि‍यम आने के बाद हमारे कारोबार में करीब 30% की गि‍रावट आ गई। 


अब  नि‍यमों में जो ढील दी गई है उसका पॉजि‍टि‍व असर आने वाले वक्‍त में दि‍खाई देगा। मीट के एक्‍सपोर्ट से हमारे देश को वि‍देशी मुद्रा मि‍लती है। हम चीन, यूरोप, यूएई, मलेशि‍या, इंडोनेशि‍या को मीट व अन्‍य संबंधि‍त प्रोडक्‍ट भेजते हैं। अब नि‍यमों में जो बदलाव प्रस्‍तावि‍त हैं उससे कामकाज करने में और आसानी होगी। घरेलू कारोबारी को भी इससे बल मि‍लेगा। 

 

बीफ का एक्‍सपोर्ट  

वर्ष वैल्‍यू लाख रुपए में    गि‍रावट
2015-16 44442.77  -----
2016-17 36517.22   17.83 %

इसमें ताजा और प्रसंस्‍कृत मांस शामि‍ल है। 

स्रोत - डि‍पार्टमेंट ऑफ कॉमर्स 


तीसरा सबसे बड़ा एक्‍सपोर्टर है भारत 
भारत दुनि‍या में बीफ का तीसरा सबसे बड़ा एक्‍सपोर्टर है। फूड एंड एग्रीकल्‍चर ऑर्गनाइजेशन  (FAO) और ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमि‍क कॉपरेशन (OECD)की रिपोर्ट के मुताबि‍क, अगले कम से कम एक दशक तक भारत इस पोजीशन पर बरकरार  रहेगा। OECD-FAO की एग्रीकल्‍चर आउटलुक 2017-2026 की रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, वर्ष 2026 में कुल बीफ एक्‍सपोर्ट में 16 फीसदी हिस्‍सेदारी भारत की होगी।  वर्ष 2016-17 में भारत ने कुल 29,532.65 करोड़ रुपए का पशु उत्‍पादों का नि‍र्यात कि‍या था। भेंड, बकरी, बीफ, पोल्‍ट्री प्रोडक्‍ट,  के अलावा प्रोसेस्‍ड मीट, अंडे, दूध और शहद शामि‍ल है।   आगे पढ़ें क्‍या हैं नए नि‍यम 

क्‍या हैं नए नि‍यम 


- मंत्रालय ने ड्राफ्ट नि‍यमों से 'वध' - ‘slaughter’ शब्‍द को हटा दि‍या है। पि‍छले नि‍यमों में यह साफतौर पर लि‍खा था कि 'कोई भी व्‍यक्‍ति कि‍सी जानवर को कटने के लि‍ए बाजार नहीं लाएगा।' इस नि‍यम में से केवल एक लाइन नए नि‍यमों में शामि‍ल की गई है जि‍समें कहा गया है कि 'पशु बाजार में कोई बीमार या जवान जानवर नहीं बेचा जाएगा।' इसके अलावा नि‍यम की उस लाइन को भी हटा दि‍या गया है जि‍सके तहत इस तरह का सर्टीफि‍केट लेना होता था कि जि‍स जानवर को बेचा जा रहा है वह वध के लि‍ए नहीं है। 
- नए नि‍यमों के तहत जानवरों के प्रति क्रूरता को रोकने के लि‍ए एक समि‍ति बनाने का प्रावधान है जो नए पशु बाजारों को सर्टीफि‍केट देगी, जानवरों की खरीद फरोखत का रि‍कॉर्ड रखेगी और इस बात का ध्‍यान रखेगी कि बाजार में साफ सफाई मेनटेन रहे। 
- पुराने नियमों के तहत कि‍सी भी राज्‍य की सीमा के 25 कि‍लोमीटर और इंटरनेशनल बॉर्डर के 50 कि‍लोमीटर के इलाके में पशु बाजार पर रोक थी। हालांकि नए नि‍यमों के तहत इसमें ढील दी गई है और इसमें केवल सीमाई इलाकों में जानवरों के ट्रांसपोर्ट पर रोक लगाई गई है। 

 

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