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मनमोहन सरकार में बंद होने की कगार पर खड़ी थी ये सहकारी संस्था, मोदी कार्यकाल में की रिकार्डतोड़ कमाई

दलहन व तिलहन की सरकारी खरीद में नैफेड का रहा शानदार प्रदर्शन

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नई दिल्ली. सरकारी संस्था नेशनल एग्रीकल्चर कॉपरेशन मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) ने वित्त वर्ष 2017-18 में 252 करोड़ रुपए की रिकार्डतोड़ कमाई की है। इस बारे में नैफेड के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव कुमार चड्डा ने मनी भास्कर को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नैफेड ने सिर्फ मुनाफा कमाया है, बल्कि देश की गरीब जनता तक सब्सिडाइज्ड रेट पर दालों की बिक्री की है। नैफेड ने अब तक 5.50 लाख टन दाल को देश के 11 राज्यों में सब्सिडाइज्ड रेट पर पीडीएस और अन्य वेल्फेयर स्कीम के तहत गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में आवंटित किया गया है।  

 

मनमोहन सरकार में बंद होने के कगार पर थी नैफेड

मनमोहन सरकार के कार्यकाल यह सस्था घाटे के दौर से गुजर रही थी। एजेंसी के लिए बैंकों का कर्ज को चुकाना मुश्किल था और बंद होने के कगार पर थी। ऐसा इसलिए क्योंकि पिछली सरकार के दौरान नैफेड का वित्तीय दोहन किया गया, जिससे एजेंसी भारी घाटे के दौर में चली गई थी। मौजूदा सरकार ने वित्तीय मदद के साथ यहां पेशेवर लोगों को नियुक्त किया है। इसके चलते एजेंसी को जहां भारी मुनाफा हुआ। 

बैंक गारंटी के तौर पर नैफेड को दिया 42 करोड़ रुपए 

हालांकि मोदी सरकार ने एजेंसी को संकट से उबरने के बैंक गारंटी 42 हजार करोड़ रुपए कर दी। इससे एजेंसी के कारोबार ने रफ्तार पकड़ी और पिछले चार सालों में समर्थन मूल्य पर 64 लाख मीट्रिक टन दलहन व तिलहन की रिकार्ड खरीदारी की। नेफेड ने वर्ष 2017-18 में 31.91 लाख मीट्रिक टन दलहन और तिलहन खरीद का रिकॉर्ड बनाया, जबकि यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान 2011-14 के बीच में नेफेड ने किसानों से सिर्फ आठ लाख मीट्रिक टन दलहन एवं तिलहन की खरीद की थी। 

बैंक को 220 करोड़ रुपए देकर की कर्ज अदायगी 

 नैफेड ने रिकार्ड कमाई के बाद बैकों को 220 करोड़ रुपए की अदायगी की। साल 2017-18 में खरीद सीजन में इस सहकारी एजेंसी ने कुल 32 लाख टन दलहन व तिलहन खरीद कर एक रिकार्ड कायम किया है। 

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