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यूपी-बिहार के मजदूर पंजाब में लिख रहे खेती की नई इबारत, 1 लाख रुपए प्रति एकड़ तक हो रही कमाई

गेहूं और धान की खेती से इतर सब्जियों उगाकर पहले से कई गुना ज्यादा कमा रहे है

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नई दिल्ली.

अपनी गेहूं और बाजरे की फसलों के लिए जाने जाने वाला पंजाब उत्तर प्रदेश और बिहार के किसानों की किस्मत चमका रहा है। इन राज्यों से आए कई प्रवासी किसानों ने पंजाब को ही अपना घर बना लिया है। वे यहां सब्जियां उगा रहे हैं और उत्तर प्रदेश और बिहार में गेहूं और धान की खेती से ज्यादा कमा रहे हैं। अधिकतर प्रवासी किसानों ने बड़े किसानों के खेतों में मजदूरी से शुरुआत की, लेकिन जल्द ही वे सब्जियों की खेती करने लगे और अब पहले से कई गुना ज्यादा कमा रहे हैं।

 

1 लाख प्रति एकड़ तक हो जाती है कमाई

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पंजाब में फिलहाल तकरीबन 4 से 5 लाख प्रवासी मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें से बिहार के सीतामढ़ी के मदन शाह ने बताया कि उन्होंने पंजाब के स्थानीय किसान से 50,000 रुपए के सालाना किराए पर 15 एकड़ जमीन ली है। इसपर वे पत्तागोभी, धनिया, शलजम, गाजर और ब्रॉकली उगाते हैं। अगर फसल अच्छी हो जाती है तो उन्हें पास के खन्ना और लुधियाना बाजारों में उनकी अच्छी कीमत मिल जाती है। कई बार वे प्रति एकड़ फसल से 1 लाख रुपए तक कमा लेते हैं। फसल अच्छी न होने पर नुकसान भी होता है, लेकिन यह धान और गेहूं उगाने से बेहतर है, क्योंकि उसमें फसल 6 महीने में तैयार होती है और प्रति एकड़ सिर्फ 25000 रुपए तक की कमाई होती है। सीतामढ़ी के ही एक अन्य मजदूर छोटे लाल ने बताया कि, साल में सब्जियों की तीन फसलें उनकी अच्छी कमाई करा देती हैं। 

 

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मजदूर ही है मालिक

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरपुर के 52 वर्षीय गणेश प्रसाद 20 साल तक दूसरों के खेतों में मजदूर के तौर पर काम करने के बाद इतनी हिम्मत जुटा पाए कि खुद खेती शुरू कर सकें। अब वे पिछले कुछ सालों से 15 एकड़ जमीन पर सब्जियां उगा रहे हैं। यह जमीन उन्होंने स्थानीय किसान से किराए पर ली है। उनका कहना है कि, सब्जियां भले ही कम समय में उग जाती हैं, लेकिन उन्हें बहुत रखरखाव की जरूरत होती है। वे दिन के 16 घंटे काम करते हैं। उनका कहना है कि यह सब उन्हें फायदे का सौदा लगता है और वे खुद काे जमीन का मालिक महसूस करते हैं।

 

 

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पंजाब में ही बस गए हैं ये मजदूर

कई मजदूर साल में दो बार काम की तलाश में पंजाब जाते थे। इसके बाद वे लौट आते थे। लेकिन बिहार और उत्तर प्रदेश में खेती में कम लाभ देखकर इन मजदूरों ने पंजाब में ही बसने का सोचा। पंजाब में इन दोनों राज्यों के मजदूरों की डिमांड काफी ज्यादा है। यहां के किसान सालों से रेलवे स्टेशनों पर ट्रेन का इंतजार करते थे, कि मजदूर उतरें और वे उन्हें अपने खेतों में गेहूं और धान की गुवाई के लिए लगा लें। अब इन मजदूरों ने पंजाब के घरों में सब्जियां सप्लाई करने की जिम्मेदारी ले ली है।

 

 

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छोटी सी जमीन से कर रहे तगड़ी कमाई

पंजाब में रबी और खरीफ के दौरान कुल 78 लाख हेक्टेशर जमीन पर फसलों की पैदावार होती है। सब्जियों की खेती के लिए 2.73 लाख हेक्टेयर जमीन मौजूद है। यह कुल जोत का 3.5 फीसदी है। इसी छोटी सी जमीन पर बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों मजूदर सब्जियां उगाकर अपनी किस्मत बदल रहे हैं। जबकि यहां के लोकल पंजाबी किसान अब तक गेहूं और धान की ही खेती कर रहे हैं। इन किसानों का कहना है कि अलग फसलें उगाने में निश्चित कमाई की उम्मीद कम हाे जाती है, इसलिए वे गेहूं और धान ही उगा रहे हैं।

 

 

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