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खेती-किसानों में नहीं लग रहा युवाओं का मन, 2017 में हर हफ्ते 25% गिरी जॉब सर्च: रिपोर्ट

इसकी वजह इस क्षेत्र में जॉब सिक्‍योरिटी की कमी, इसमें स्‍कोप को लेकर कम जागरुकता और एंटरप्रेन्‍योरियल स्पिरिट की कमी है

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नई दिल्‍ली. युवाओं को सबसे कम रुचि कृषि क्षेत्र में है। इसकी वजह इस क्षेत्र में जॉब सिक्‍योरिटी की कमी, इसमें स्‍कोप को लेकर कम जागरुकता और एंटरप्रेन्‍योरियल स्पिरिट की कमी है। यह बात जॉब वेबसाइट इनडीड की एक ताजा स्‍टडी से सामने आई है। स्‍टडी में कहा गया कि 2017 के दौरान प्रति सप्‍ताह कृषि संबंधित जॉब सर्च के एवरेज आंकड़ों में 25 फीसदी की गिरावट आई। 

 
हालांकि कृषि में प्रॉमिसिंग ग्रोथ अभी भी है। इसकी वजह भारतीय किसानों द्वारा बड़े पैमाने पर मैकेनाइजेशन को अपनाना है। इसी के चलते एक्‍सपर्ट्स भी 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सरकार के महत्‍वाकांक्षी लक्ष्‍य में भरोसा रख रहे हैं। 
 

31 से 35 साल वालों की रुचि एवरेज से ज्‍यादा 

स्‍टडी के मुताबिक, 21 से 25 वर्ष वाले युवाओं ने कृषि संबंधित नौकरियों में सबसे कम रुचि दर्शाई है। हालांकि 31 से 35 उम्र वाले लोगों की इस कैटेगरी वाली नौकरियों में रुचि एवरेज से ज्‍यादा है। ऐसा अनुमान है कि इसका कारण है कि उन्‍होंने कृषि क्षेत्र के प्रमुख अवरोधों को पार करने के लिए जरूरी नॉलेज और स्किल्‍स को हासिल कर लिया है। 
 

2007 के बाद 4% बढ़े कृषि से जुड़ने वाले युवा 

स्‍टडी में यह भी सामने आया कि भले ही युवाओं को कृषि में रुचि सबसे कम है लेकिन फिर भी 2007 के बाद से इस क्षेत्र से जुड़ने वाले यु‍वाओं की संख्‍या में 4 फीसदी का इजाफा हुआ है। ये आंकड़े इस सेक्‍टर में रोजगार में बढ़ोत्‍तरी की ओर इशारा करते हैं। आगे कहा गया कि कृषि क्षेत्र के विकास को सरकार की ओर से मिले रहे प्रोत्‍साहन और ग्रामीण इकोनॉमी में आ रही मजबूती को देखते हुए जॉब ढूंढने वालों को कृषि और कृषि संबंधित बाजार में आने के लिए प्रोत्‍साहित करना समय की जरूरत है।
 

अत्‍याधुनिक कोर्स से कृषि में कोई भी बन सकता है अच्‍छा प्रोफेशनल 

इनडीड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्‍टर शशि कुमार ने कहा कि आज भारत में कृषि क्षेत्र करियर बनाने के लिए एक भरोसेमंद जगह है। ऐसा भारत की उत्‍पादन क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार के प्रयासों के कारण है।  
एग्रीबिजनेस, एग्रीकल्‍चरल रिसोर्स मैनेजमेंट, फूड साइंसेज और टेक्‍नोलॉजी इत्‍यादि जैसे उभरते अत्‍याधुनिक कोर्सेज की वजह से कोई भी कृषि क्षेत्र में एक अच्‍छा प्रोफेशनल बनने के बारे में सोच सकता है। 
 

क्‍लीन लेबलिंग कंपनियों को चाहिए होगा टैलेंट 

हाल ही में कई भारतीय स्‍टार्टअप्‍स ने क्‍लीन लेबलिंग का ट्रेंड अपनाया है। इसमें वे अपने प्रॉडक्‍ट्स में पूरी तरह से नेचुरल सब्‍सटेंस का इस्‍तेमाल करते हैं। इसलिए काफी संभावना है कि स्‍टडी के मुताबिक, भारत में रॉ (RAW) प्रेशरी, एपिगेमिया, पेपरबोट, जस डिवाइन, एंटीडॉट, 24 मंत्रा आदि जैसी क्‍लीन ले‍बलिंग कंपनियां अपने ग्राहकों को पौष्टिक जीवनशैली उपलब्‍ध कराने के लक्ष्‍य को आगे बढ़ाने के लिए टैलेंटेड लोगों की तलाश करें। 
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