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बड़े भाई की मौत के बाद नौकरी छोड़ शुरू की खेती, U.P में धान की सबसे ज्यादा पैदावार का बनाया रिकॉर्ड

सरकार की तरफ से मिल चुके हैं कई पुरस्कार, मिला प्रगतिशील किसान का दर्जा

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नई दिल्ली. अक्सर लोग जिंदगी में कुछ न कर पाने के लिए अपने हालात को जिम्मेदार ठहरा देते हैं। लेकिन कुछ लोग इसी मुश्किल हालत में नई राह खोज निकालते हैं। इन्हीं में उत्तर प्रदेश के मंशाराम हैं, जो लखनऊ की एक रियल एस्टेट कंपनी में काम करते थे। लेकिन अचानक ही उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट गया। 

 

भाई की मौत ने बदल दी जिंदगी 

हुआ यूं कि मंशाराम के बड़े भाई की अचानक मौत हो गई। ऐसे में घर के सारी जिम्मेदारी उनके कंधो पर आ गई। इस हालात में भाभी और बूढ़े माता-पिता को गांव में छोड़कर नौकरी करना मुश्किल था। साथ ही मंशाराम के पिता को अपने गांव और खेतों से दूर जाना मंजूर न था। ऐसे में मंशाराम ने अपनी जमी-जमाई नौकरी छोड़कर खेती करने का निर्णय लिया।

 

गेहूं धान का रिकार्ड उत्पादन 

मंशाराम के पिता के पास पुरानी पद्धति से खेती करने का हुनर था, जो मंशाराम को विरासत में मिली। साथ ही उन्होंने खेती को उन्नत बनाने के लिए नजदीक के कृषि विज्ञान केंद्र का फायदा उठाया। उन्होंने यहां से नई तकनीकी से खेती करने की जानकारी हासिल की और उन पर अमल किया। मंशाराम ने पिता की पुरानी और कृषि केंद्र की नई तकनीक के मेल से वैज्ञानिक तरीके से खेती शुरू की। कुछ वर्षों के बाद उन्होंने गेंहू और धान का रिकार्ड उत्पादन किया।

 

सरकार से मिले पुरस्कार 

मंशाराम यूपी में सबसे ज्यादा गेंहू और धान का उत्पादन कर रहें हैं। वो प्रति हेक्टेयर 107 क्विंटल धान और प्रति हेक्टेयर 170 क्विंटल गेंहू का रिकार्ड उत्पादन करते हैं। साथ ही प्रति एकड़ 22 से 25 क्विंटल चना का उत्पादन करते हैं। उनकी इस कामयाबी के लिए राज्य सरकार की तरफ से साल 2013-14 में उत्तर प्रदेश में धान उत्पादन के लिए सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार दिया गया था।  साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी की तरफ से एग्री समृद्धि अवार्ड दिया गया है। मंशाराम को प्रगतिशील किसान का दर्जा दिया गया है।

 

 

सालाना 700 से 800 किसानों को देते हैं ट्रेनिंग

मंशाराम ने अपने पिता की पुश्तैनी 15 एकड़ जमीन से खेती शुरू की थी और आज उसी खेती की कमाई के दम पर दो एकड़ की जमीन खरीदी है। साथ ही किराए की 15 एकड़ पर जमीन करते हैं। साथ ही मंशाराम खेती के अपने तरीकों के बारे में अन्य किसानों को ट्रेनिंग देते हैं। वो सालाना 700 से 800 किसानों को प्रशिक्षित करते हैं। उनके पास यूपी, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से किसान ट्रेनिंग के लिए आते हैं। वो किसानों को बर्मी कंपोस्ट खाद के उपयोग के जरिए आर्गेनिक खेती करने के तरीके की भी जानकारी देते हैं।   

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