बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Agri-Biz2 लाख से घटकर 50,000 रह गई मशरूम उगाने की लागत, इस लड़की ने इजाद की तकनीक

2 लाख से घटकर 50,000 रह गई मशरूम उगाने की लागत, इस लड़की ने इजाद की तकनीक

यह किसान हैं सौम्‍या फूड्स की फाउंडर दिव्‍या रावत।

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देहरादून. उत्‍तराखंड के देहरादून में एक महिला किसान सरल और इनो‍वेटिव तरीकों के इस्‍तेमाल से मशरूम उगा रही है। ऐसा करके उन्‍होंने अपनी खेती की लागत को काफी घटा लिया है। यह किसान हैं सौम्‍या फूड्स की फाउंडर दिव्‍या रावत। ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 26 वर्षीय दिव्‍या ने इनोवेशन के जरिए खुद तो फायदा कमाया ही है साथ ही वे इसे प्रमोट भी कर रही हैं। इसके जरिए वे उत्‍तराखंड के कई लोगों को आजीविका कमाने में मदद भी कर रही हैं। 

 

क्‍यों शुरू की थी मशरूम की खेती 

आय का कोई फिक्‍स्‍ड सोर्स न होने और धान व सब्जियों की परंपरागत खेती में अच्‍छा भविष्‍य न दिखने के चलते उत्‍तराखंड के लोग रोजगार की तलाश में अपना गांव छोड़कर शहरों में जा रहे हैं। इसी समस्‍या का हल ढूंढने के लिए रावत ने मशरूम की खेती शुरू की। इसका आइडिया उन्‍हें देहरादून के होलसेल मार्केट्स में मिला। उन्‍होंने पाया कि मशरूम की कीमत अन्‍य सब्जियों की तुलना में कहीं ज्‍यादा है। इसे 200 रुपए प्रति किलो पर बेचा जाता है और हर साल कीमतें 200 रुपए से लेकर 400 रुपए तक जाती हैं। यह जानकर उन्‍होंने इसी पर काम करने का सोचा। चूंकि मशरूम को घर के अंदर भी उगाया जा सकता है, इसलिए प्राकृतिक आपदाओं या जंगली जानवरों से उपज खराब होने का खतरा भी नहीं रहता है। इसके बाद रावत ने सोलन के इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्‍चरल रिसर्च (ICAR)- डायरेक्‍टोरेट ऑफ मशरूम रिसर्च से मशरूम फार्मिंग की ट्रेनिंग ली और खुद की मशरूम कल्‍टीवेशन यूनिट शुरू की। 

 

आगे पढ़ें- कैसे घटा ली लागत 

इनोवेशन से कैसे घटाई लागत 

इसमें आई लागत पर रावत ने बताया कि यूनिट लगाने में लागत ज्‍यादा थी। इसलिए मैंने कुछ बदलाव किए ताकि पूरी प्रोसेस को कम लागत पर किया जा सके। मैंने वर्टिकल मशरूम कल्‍टीवेशन के लिए एल्‍यूमीनियम/स्‍टील रैक्‍स को बांस की रैक से बदल दिया। साथ ही हैंगिग मेथड से मशरूम कल्‍टीवेशन के लिए नायलॉन की रस्‍सी का इस्‍तेमाल किया। इससे मशरूम उगाने पर आने वाली लागत घटकर 40-50 हजार रुपए पर आ गई, जो पहले 2 लाख रुपए से भी ज्‍यादा थी। 

 

आगे पढ़ें- सीजन और टेंपरेचर के हिसाब से उगाई मशरूम

टेंपरेचर के हिसाब से उगाईं अलग-अलग वैरायटी 

रावत ने इन बदलावों के अलावा भी एक बदलाव किया। उन्‍होंने सीजन और उत्‍तराखंड नैचुरल क्‍लाइमेटिक कंडीशंस के हिसाब से तीन अलग-अलग तरह की मशरूम उगाना शुरू किया। ऐसा करके उन्‍होंने अलग-अलग टेंपरेचर का फायदा लिया। इससे फसल के लिए एयरकंडीशनर्स, ह्यूमीडिफायर्स या अन्‍य टेंपरेचर कंट्रोलर्स की जरूरत खत्‍म हो गई। रावत के मुताबिक, हमने गर्मी में मिल्‍की मशरूम उगाया, इसके लिए 30-40 डिग्री सेल्सियस टेंपरेचर चाहिए होता है। उसके बाद जब टेंपरेचर थोड़ा कम होने का सीजन होता है, तब हमने ओइस्‍टर मशरूम उगाया और सर्दियों में विंटर बटन मशरूम उगाया। 

 

आगे पढ़ें- आ रहा है बदलाव

दिखने लगा है बदलाव 

मशरूम फार्मिंग में आया हालिया तेज उछाल कैसे लोगों की जिंदगी प्रभावित कर रहा है, इस पर रावत ने कहा कि इस ग्रोथ से मेरे गांव में बड़ा बदलाव आया है। अब ये बदलाव राज्‍य के अन्‍य हिस्‍सों में भी आ रहा है। लोग गांव वापस आ रहे हैं लेकिन ऐसा बड़े पैमाने पर दिखने में अभी थोड़ा वक्‍त लगेगा।

 

आगे पढ़ें- आगे के लिए क्‍या है कहना 

अभी तय करना है लंबा सफर 

रावत का कहना है कि फिलहाल मैं हमसे जुड़े किसानों को सही टेक्निकल और इंप्‍लीमेंटेशन को लेकर मार्गदर्शन उपलब्‍ध करा रही हूं। हम हर रोज तेजी से आगे बढ़ रहे हैं लेकिन यहां डायरेक्‍टोरेट ऑफ मशरूम लाने और उत्‍तराखंड को भारत की मशरूम कैपिटल बनाने के अपने लक्ष्‍य को पाने के लिए अभी हमें लंबा सफर तय करना है। 

 

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