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मोदी राज में गेहूं और चावल का बढ़ा इतना स्टॉक, अब इसकी सस्ते में होगी बिक्री 

FCI plan to offload excess rice

FCI plan to offload excess rice: केंद्र सरकार गेहूं और चावल के बढ़े स्टॉक को खुले बाजार में सस्ते दामों में बेचा जा सकता है।

नई दिल्ली. केंद्र सरकार गेहूं और चावल के बढ़े स्टॉक को खुले बाजार में सस्ते दामों में बेचा जा सकता है। आटा मिलों और अन्य थोक ग्राहकों को इसे बेचा जाएगा। कमेटी ऑफ सेक्रेट्री (CoS) कई दिनों पहले एक मीटिंग की, जहां गेहूं और चावल के स्टॉक को खुल बाजार में बेचने का निर्णय लिया गया। प्रस्ताव के कमेटी और वित्त मंत्रालय से पास होने के बाद चुनाव आयोग से इसकी इजाजत ली जाएगी। 

अनाज स्टॉक की स्पेस के ही कंपनी 

मौजूदा वक्त में फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के पास 26.3 मिलियन टन चावल और 20.1 मिलियन टन गेंहू है। वही सरकार ने आगामी खरीफ और रवि की फसल से 45 मिलियन टन चावल और 35.7 मिलिटन टन गेंहू खरीदने का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में सरकार पिछले साल का 10 मिलियन चावल और 2 मिलियन टन गेंहू खुले मार्केट में बेचेगी। सरकारी अनाज की खऱीददारी करने वाली एजेंसी एफसीआई के पास जगह की कमी है। इसके चलते ऐसा निर्णय लिया गया है।

 

बिक्री का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल 

एफसीआई के अधिकारियों के मुताबिक अनाज की बिक्री का लक्ष्य हासिल करना शायद मुश्किल होगा क्योंकि मार्केट में गेंहू की डिमांड ज्याद नहीं है। सरकारी आंकड़ों की मानें, तो साल 2018-19 में भारत में 115.60 मिलियन टन चावल और 99.12 मिलियन टन गेंहू के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। 

 

सस्ते दरों पर हो सकती है अनाज की बिक्री 

आमतौर पर सरकार एक्स्ट्रा स्टॉक को फसल सीजन के बाद मार्केट में बिक्री के रखती थी। लेकिन इस बार एफसीआई इसका ई-ऑक्शन को जून में कर सकती है।एंजेसी के अधिकारियों की मानें, तो उनके पास काफी मात्रा में खाद्यान पड़ा है और फिर से गेंहू की खरीद का मौसम आ गया है। ऐसे में इस स्टॉक को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में इसे सस्ती दरों पर बेचा जा सकता है। बता दें कि सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य के तहत किसानों से गेंहू और धान की खरीददारी करनी होती है। 

 

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