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तीन फॉर्मूलों से गन्‍ना कि‍सानों को राहत देगी सरकार, जीओएम में हुई चर्चा

गन्‍ना कि‍सानों का बकाया दि‍लवाने के लि‍ए सरकार तीन फॉर्मूलों पर वि‍चार कर रही है।

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नई दि‍ल्‍ली। गन्‍ना कि‍सानों का बकाया दि‍लवाने के  लि‍ए सरकार तीन फॉर्मूलों पर वि‍चार कर रही है। समस्‍या का हल नि‍कालने के लि‍ए केंद्रीय मंत्रि‍यों की समि‍ति की बैठक में चीनी पर सेस लगाने, गन्‍ना कि‍सानों को प्रोडक्‍शन सब्‍सि‍डी देने और एथनॉल पर  लगने वाले   जीएसटी में कटौती पर वि‍चार कि‍या गया। इस समित‍ की अध्‍यक्षता परि‍वहन मंत्री नि‍ति‍न गडकरी कर रहे हैं। बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रामवि‍लास पासवान, पेट्रोलि‍यम मि‍नि‍स्‍टर धर्मेंद प्रधान सहि‍त कुछ खास अधि‍कारी मौजूद थे।  देश के गन्‍ना कि‍सानों का करीब 20, 000 करोड़ रुपए चीनी मि‍लों पर बकाया है। 


नोट तैयार कि‍या जाएगा 
पासवान ने कहा कि जल्‍द ही इस बारे में एक ड्राफ्ट कैबि‍नेट नोट तैयार कि‍या जाएगा। कैबि‍नेट के समक्ष रखने से पहले इन सुझावों को अन्‍य मंत्रालयों में भी भेजा जाएगा। चीनी मि‍लों का कहना है कि वह घरेलू बाजार में चीनी की दाम घटने की वजह से वह गन्‍ना कि‍सानों को भुगतान करने में अक्षम हैं। इस सीजन में चीनी का प्रोडक्‍शन करीब 50% ज्‍यादा हुआ है। इस बार चीनी का उत्‍पादन करीब 310 लाख टन हुआ है। 


बैठक के बाद पासवान ने कहा कि बैठक में जो सबसे महत्‍वपूर्ण सुझाव सामने आए उनमें पहला ये है कि हम कि‍सानों को सब्‍सि‍डी देना चाहते हैं। दूसरा चीनी पर सेस लगाया जाए और तीसरा एथनॉल पर जीएसटी को घटाकर 5 फीसदी कर दि‍या जाए। 


नकदी संकट से जूझ  रही है चीनी मि‍ल 
देश की चीनी मि‍लें और गन्‍ना कि‍सान कड़े दौर से गुजर रहे हैं। नेशनल फेडरेशन ऑफ कॉपरेटि‍व शुगर फैक्‍ट्रीज लिमि‍टेड (एनएफसीएसएफ) के मुताबिक, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में गिरावट के कारण चीनी मिलें नकदी की समस्या से जूझ रही हैं और किसानों को गन्‍ने की कीमतों का भुगतान नहीं हो पा रहा है। चीनी मिलों पर गन्ना उत्पादकों का बकाया बढ़कर करीब 20,000 करोड़ हो गया है। चीनी उद्योग संगठनों ने सरकार से चीनी निर्यात पर 1,000 रुपये प्रति क्‍विंटन अनुदान व प्रोत्साहन की मांग की है। 


उत्‍पादन 53 फीसदी बढ़ा 
एनएफसीएसएफ के मुताबि‍क 12 अप्रैल तक देश की चीनी मिलों ने 2,775 लाख टन गन्‍ने (पिछले साल के मुकाबले 49 फीसदी अधिक) की पेराई कर 296 लाख टन (पिछले साल से 53 फीसदी अधिक) चीनी का उत्पादन किया। उन्होंने कहा कि कम से कम 40-50 लाख टन चीनी निर्यात होने पर ही उद्योग की हालत सुधरेगी और चीनी मिलें किसानों को गन्ने के दाम देने की स्थिति में होंगी। 

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