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चने और पाम ऑयल पर आयात शुल्‍क बढ़ा, घरेलू मार्केट को मि‍लेगी राहत

घरेलू मार्केट को बचाने के लिहाज से सरकार ने चने और पाम ऑयल पर आयात शुल्‍क बढ़ा दि‍या है।

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नई दि‍ल्‍ली। घरेलू मार्केट को बचाने के लिहाज से सरकार ने चने और पाम ऑयल पर आयात शुल्‍क बढ़ा दि‍या है। चने पर आयात शुल्क 50 फीसदी से बढ़ाकर 60 फीसदी कर दिया गया है। इससे पहले फरवरी के पहले सप्ताह में सरकार ने चना पर आयात शुल्क 30 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया था। बढ़ा हुआ आयात शुल्क एक मार्च 2018 से लागू है। वहीं कच्चे पाम तेल (सीपीओ) पर आयात शुल्क 30 फीसदी से बढ़ाकर 44 फीसदी कर दिया गया है। तथा रिफाइंड पाम तेल पर आयात शुल्क 40 फीसदी से बढ़ाकर 54 फीसदी कर दिया गया है।

 
दि‍संबर में भी बढ़ाया था शुल्‍क 
गौरतलब है कि देश में चने की बोआई में किसानों की दिलचस्पी लेने और विदेशों से सस्ता आयात होने से घरेलू कीमतों में भारी गिरावट को देखते हुए दिसंबर 2017 में भारत सरकार ने चने के आयात पर 30 फीसदी शुल्क लगा दिया था। इस साल देश में चने का रकबा 1.07 करोड़ हेक्टेयर है, जोकि पिछले फसल वर्ष 2016-17 के 99.54 लाख हेक्टेयर से 8.13 फीसदी ज्यादा है। 
चने का रि‍कॉर्ड उत्‍पादन 


केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी फसल वर्ष 2017-18 (जुलाई-जून) के दूसरे अग्रिम उत्पादन अनुमान के मुताबिक, देश में चने का रिकॉर्ड उत्पादन 1.11 करोड़ टन होने का आकलन किया गया है, जोकि पिछले साल से 18.33 फीसदी अधिक है। पिछले साल देश में चने का उत्पादन 93.8 लाख टन हुआ था, जबकि पिछला रिकॉर्ड उत्पादन 2013-14 का 95.3 लाख टन है।  आगे पढ़ें 

सबसे ज्‍यादा पाम तेल का आयात करता है भारत 
भारत पाम तेल का आयात प्रमुख रूप से इंडोनेशिया और मलेशिया से करता है, जबकि सोया तेल का आयात प्रमुख रूप से ब्राजील और अर्जेंटीना से करता है। अन्य खाद्य तेल में कनोला का आयात प्रमुख रूप से कनाडा से होता है, जबकि सूर्यमुखी तेल का आयात यूक्रेन से करता है। 
पाम तेल का भारत सबसे ज्यादा आयात करता है। मुंबई के एक तेल बाजार विश्लेषक ने बताया कि गर्मी आने पर पाम तेल का आयात बढ़ जाता है। ऐसे में आयात शुल्क बढ़ने से देश में पाम तेल की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिसका फायदा घरेलू तेल मिलों व तिलहन उत्पादकों को होगा। 

 

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