Utility

24,712 Views
X
Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Agri-Bizडीबीटी के सहारे कि‍सानों की इनकम दोगुना करेगी सरकार, मार्च से पहले एलान मुमकि‍न

डीबीटी के सहारे कि‍सानों की इनकम दोगुना करेगी सरकार, मार्च से पहले एलान मुमकि‍न

नई दि‍ल्‍ली। बजट 2018 के एलान के मुताबि‍क कि‍सानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दि‍लाने के लि‍ए सरकार डायरेक्‍ट बेनेफि‍ट ट्रांसफर का सहारा ले सकती है। इसमें आधार और 38 करोड़ जनधन एकाउंट की बड़ी भूमि‍का होगी। मुमकि‍न है कि‍ मार्च से पहले इसका एलान कर दि‍या जाएगा क्‍योंकि‍ मार्च - अप्रैल में ही रबी की फसलों का प्रोक्‍योरमेंट शुरू हो जाता है। 


नीति‍ आयोग के सूत्रों के मुताबि‍क, कि‍सानों को बढ़ी हुई एमएसपी का पूरा लाभ दि‍लाने के लि‍ए सरकार डीबीटी यानी डायरेक्‍ट बेनेफि‍ट ट्रांसफर का सहारा ले सकती है। इसमें होगा ये कि अगर बाजार भाव एमएसपी से कम है तो इस अंतर का भुगतान सरकार डायरेक्‍ट कि‍सान के खाते में करेगी। इसे मध्‍यप्रदेश की भावांतर भुगतान योजना का एक्‍सपेंशन मान सकते हैं। वहां भी सरकार इसी तरह से कि‍सानों को एमएसपी का लाभ देती है। 


फि‍लहाल यही ऑप्‍शन नजर आ रहा है 
नीति‍ आयोग में लैंड पॉलि‍सी सेल  के चेयरमैन डॉक्‍टर टी हक ने बताया कि इसके लि‍ए सरकार के पास फि‍लहाल जो ऑप्‍शन नजर आ रहे हैं उनमें सबसे फिजिबल ये है कि एमएसपी और मार्केट प्राइज के बीच जो अंतर आ रहा है उसका भुगतान सरकार करे। यह भुगतान डायरेक्‍ट कि‍सानों के खाते में कि‍या जा सकता है। फि‍लहाल जो तंत्र है उसमें फसलों का पूरा प्रोक्‍योरमेंट करना आसान नहीं है। इसलि‍ए मध्‍य प्रदेश की भावांतर योजना की तर्ज पर बजट के इस एलान को पूरा कि‍या जा सकता है। 


सरकार खुद नहीं खरीद सकती 


इसके अलावा दूसरा ऑप्‍शन ये है कि कुछ कमोडि‍टी जैसे दाल व रागी वगैरह को भी सरकार खरीदे और उसे पीडीएस के माध्‍यम से आगे भेजे। कर्नाटक ने इस दि‍शा में काफी काम कि‍या है। लेकि‍न फि‍लहाल ये उतना फि‍जिबल नहीं दि‍ख रहा। बड़े पैमाने पर खरीद करने के लि‍ए तंत्र उतना मजबूत नहीं है। सरकार खरीद भी लेगी तो रखेगी कहां। अभी इतनी स्‍टोरेज कैपेसि‍टी ही नहीं है। अभी गेहूं और चावल को ही मैनेज करने में दिक्‍कते आ रही हैं। सब कमोडि‍टीज को खरीदना पॉसि‍बल नहीं होगा लेकि‍न दाल कुछ सेलेक्‍टेड कमोडिटीज को तो खरीद सकते हैं। 

वैसे थोड़ा ही सही मगर सरकार को इनकी दालों व मोटे अनाज की खरीदारी करनी चाहि‍ए। ऐसा करने से मार्केट प्राइज अपने आप ही बढ़ने लगता है, फि‍र एमएसपी के बराबर वैसे ही हो जाएगा। 

 

6 फीसदी कि‍सान ही एमसपी का लाभ ले पाते हैं 

एमएसपी तय करने का मकसद यही था कि‍ कि‍सानों को अपनी उपज का वाजि‍ब दाम मि‍ल सके, मगर न तो केंद्र और न ही राज्‍यों का तंत्र इतना दुरुस्‍त है कि सभी कि‍सानों तक इसका लाभ पहुंच सके। सरकारी आंकड़ों के मुताबि‍क, 6 फीसदी से भी कम कि‍सान एमएसपी का लाभ ले पाते हैं। इस तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए ऐसा होना मुमकि‍न है कि‍ सरकार बाजार भाव और एमएसपी का अंतर सीधे कि‍सानों के खाते में ट्रांसफर करे। 

और देखने के लिए नीचे की स्लाइड क्लिक करें

Trending

NEXT STORY

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.