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अब बच्‍चों की सेहत सुधारंगे मोदी, सरकारी गल्‍ले पर मि‍लेगा ताकत का खजाना

भारत में कुपोषण की समस्‍या अभी भी काफी बड़े पैमाने पर मौजूद है।

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नई दि‍ल्‍ली। भारत में कुपोषण की समस्‍या अभी भी काफी बड़े पैमाने पर मौजूद है। इस सि‍लसि‍ले में सामने आईं कई रि‍पोर्ट के मुताबि‍क, देश में 5 साल से कम उम्र के करीब 40% बच्‍चे  पौष्‍टि‍क आहार से महरूम हैं। मोटे शब्‍दों में कहें तो   पौष्‍टिक आहार का सीधा सा मतलब है ऐसा भोजन जि‍ससे उनकी प्रोटीन, वि‍टामि‍न, कार्बोहाइड्रेट और फैट सहि‍त अन्‍य जरूरतें पूरी हो सकें।

द ग्‍लोबल न्‍यूट्रीशन रि‍पोर्ट 2017 के मुताबि‍क, भारत में 5 साल से कम उम्र के करीब 38 फीसदी बच्‍चे पोषण की कमी के चलते कद में छोटे हैं और उनके दिमाग को भी वो नुकसान पहुंचा है, जि‍सकी अब भरपाई नहीं हो सकती। यकीनन ये आंकड़े डराने वाले हैं।  सरकार की प्‍लानिंग है कि‍ बच्‍चों का केवल पेट ना भरा जाए बल्‍कि‍ उन्‍हें पोषण भी मि‍ले। इसके लि‍ए भोजन में अब उन चीजों को शामि‍ल कि‍या जाएगा, जो हमारी रसोई से अब बाहर हो चुकी हैं।  आगे पढ़ें 

मोटा अनाज देगा मजबूती 


कृषि, सहकारि‍ता एवं कि‍सान कल्‍याण वि‍भाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबि‍क, ज्‍वार, बाजारा, रागी आदि‍ में देश की खाद्य एवं पोषण संबंधी सुरक्षा में योगदान देने की बहुत अधि‍क क्षमता है और इस प्रकार से ये ना केवल पोषक तत्‍वों का भडार है बल्‍कि‍ इन पर जलवायु का बहुत खास फर्क नहीं पड़ता। 
हाल ही में हुई रि‍सर्च से पता चला है कि‍ ज्‍वार-बाजरा आदि‍ में मधुमेह रोधी गुण होते हैं तथा मि‍लेट आधारि‍त खाद्य पदार्थों में कम जीआई होती है। इससे ब्‍लड ग्‍लूकोज लेवल और ग्‍लाइकोसि‍लेटि‍ड होमोग्‍लोबीन भी कम होता है।  
इसलि‍ए सरकार देश की पोषण संबंधी जरूरत को पूरा करने के लि‍ए जन वि‍तरण प्रणाली यानी पीडीएस में ज्‍वार-बाजारा जैसे मोटे अनाज को शामि‍ल करने जा रही है। इस सि‍लसि‍ले में गठि‍त की गई समि‍ति‍ ने सरकार से यह सि‍फारि‍श की है कि‍ राशन की दुकानों के माध्‍यम से लोगों को मोटा अनाज भी उपलब्‍ध कराया जाए। सरकार ने इस सि‍फारि‍श को स्‍वीकार कर लि‍या है। 
केंद्र सरकार ने अब ज्‍वार, बाजरा, रागी/मडुआ, कांगनी/काकुन, चीना, कोदो, सांवा, कुटकी, काला गेहूं तथा चौलाई, जि‍नकी पोषक क्षमता बहुत अधि‍क होती है, को उत्‍पादन, उपभोग तथा व्‍यापार के नजरि‍ए से 'पौष्‍टि‍क अनाज' घोषि‍त कर दि‍या है। 

 

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