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अगर सरकार खेती के नियमों में दे छूट, तो किसान हो जाएंगे मालामाल, नहीं पड़ेगी कर्जमाफी की जरूरत

पंजाब किसान खुशहाल वैलफेयर सोसाइटी ने सरकार से की खेती के नियम बदलने की मांग

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नई दिल्ली. अफीम एक ऐसी खेती है, जो किसानों को मालामाल कर सकती है। लेकिन इसके लिए सरकार लाइसेंस जारी करती है, जो काफी सीमित मात्रा में होते हैं। अफीम के खेती में फूल से लेकर, दाने, छिलके समेत सभी प्रोडक्ट की बिक्री हो जाती है और इससे काफी कमाई होती है। सरकार के अलावा ब्लैक मार्केट में पोस्ते के किसी भी प्रोडक्ट की बिक्री करने पर 1985 के नशा निरोधन कानून (एनडीपीएस) के तहत सजा का प्रावधान है, जो कि उम्रकैद से लेकर फांसी तक हो सकती है।

 

किसानों को नहीं पड़ेगी कर्जमाफी की जरूरत

पंजाब किसान खुशहाल वैलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ रणजीत सिंह ने कहा कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात की तरह अगर पंजाब और बाकी राज्य में भी अफीम की खेती से पाबंदी खत्म कर दी जाएं, तो राज्य के किसानो को बड़ा मुनाफा होगा। साथ ही सरकार को कर्जमाफी से मुक्ति मिल जाएगी। सिहं ने कहा कि अफीम की खेती शुरू करने से किसानों को आर्थिक लाभ होगा और इसी के साथ भूमिगत जल स्तर में भी सुधार होगा और युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। उन्होने कहा कि परंपरागत चावल और गेहूं की फसलों की वजह से पंजाब जैसे राज्य में भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट आई है। इसके अलावा पंजाब के कंडी क्षेत्र में सफेदा के पेड़ लगाने से इस क्षेत्र के जल स्तर में भारी गिरावट आई है।

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अफीम की खेती की मांग पर दिया जोर 

डॉ सिंह ने कहा कि किसानों का कर्ज माफ करना कोई स्थाई हल नहीं है। उनके मुताबिक सभी राजनैतिक दल वोट बैंक की खातिर किसानों का शोषण कर रहे हैं और नशा निरोधक कानून (एनडीपीएस) का भी दुरूपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य के हर गांव में अफीम आसानी से उपलब्ध है, ऐसे में इस पर पाबंदी लगाने की बजाए राज्य में व्यापारिक स्तर पर अफीम की खेती करने की इजाजत दी जानी चाहिए। उन्होने कहा कि भारत के 13 राज्यों में पहले से ही अफीम की खेती की जा रही है। एक देश एक कानून का उल्लेख करने हुए उन्होने राज्य सरकार से मांग की है कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पंजाब के पांच जिलों जालंधर, लुधियाना, तरनतारन, अमृतसर और बठिंडा में अफीम की खेती करने इजाजत दी जाए।

 

 

अफीम की लाइसेंसिंग प्रक्रिया है जटिल 

 जल विशेषज्ञ वीर प्रताप राणा ने कहा कि एक एकड़ जमीन में लगभग 30 लाख रूपये की अफीम की पैदावार होती है। बता दें कि सरकार ने अफीम के प्रति एक किग्रा की कीमत 3 से चार हजार रुपए निर्धारित किया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफीम 12 से 15 हजार रुपए प्रति किग्रा. की दर से बिकती है। वहीं ब्लैक मार्केट में एक किग्रा. अफीम के लाखों रुपए तक मिल सकते हैं। हर एक काश्तकार को औसतन प्रति हेक्टेअर 54 किलो अफीम देनी होती है। इस तय सीमा से 10 ग्राम कम अफीम स्वीकार नहीं की जाती है और संबंधित किसान का लाइसेंस कट जाता है। हालांकि इसे कम करने करी मांग की जा रही है।

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