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Contract farming : केंद्र लाया मॉडल कानून, किसानों के हित में कई प्रावधान

इसमें केवल खेती ही नहीं बल्‍कि‍ डेयरी, पोल्‍ट्री और पशु पालन को भी कवर कि‍या गया है।

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नई दि‍ल्‍ली। कि‍सानों को उपज की बेहतर कीमतें दि‍लाने के लि‍ए केंद्र सरकार ने कांट्रैक्‍ट फार्मिंग पर मॉडल कानून को हरी झंडी दि‍खा दी है। इसमें केवल खेती ही नहीं बल्‍कि‍ डेयरी, पोल्‍ट्री और पशु पालन को भी कवर कि‍या गया है। 


नए कानून   के तहत ठेके पर खेती व अन्‍य सेवाओं को राज्‍यों के एपीएमसी यानी मंडी कानून के दायरे से बाहर रखने पर सहमति‍ बनी है। इससे खरीददारों को लेनदेन की लागत में 5 से 10 फीसदी की बचत होगी। इसमें समझौता तोड़ने पर जुर्माना लगाने व अन्‍य वि‍वादों के समाधान के लि‍ए एक सेटलमेंट अथॉरि‍टी के गठन का भी प्रावधान है। 

 

अब राज्‍यों को लेना है एक्शन

राज्‍यों के कृषि मंत्रियों के सम्‍मेलनन में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि अब इस मामले में एक्शन राज्यों को लेना है। जि‍न्‍हें कि‍सानों की बेहतरी की खाति‍र इस कानून को जल्‍द से जल्‍द अपनाना है। साथ ही उन्‍होंने कहा कि सरकार का मकसद 2022 तक कि‍सानों की आय दोगुनी करना है। मार्केट और अन्‍य क्षेत्र में कई तरह के सुधार कार्य कि‍ए जा रहे हैं। 


इंश्‍योरेंस कवर भी मि‍लेगा 
इस कार्यक्रम में एक दर्जन से ज्‍यादा राज्‍यों के कृषि मंत्री और अन्‍य अधि‍कारी मौजूद थे। कृषि राज्‍यमंत्री पुरुषोत्‍तम रुपाला और गजेंद्र सिंह शेखावत भी मौजूद थे। कि‍सानों की आय दोगुनी करने के लि‍ए बनी समि‍ति के चेयरमैन अशोक दलवई ने कहा, 'मार्केटिंग के अलावा इस कानून में प्री प्रोडक्‍शन, प्रोडक्‍शन और पोस्‍ट प्रोडक्‍शन और सेवाओं से जुड़े समझौतों को भी शामि‍ल कि‍या गया है।' ठेके के तहत जो भी उत्‍पाद होगा उसे इंश्‍योरेंस कवर भी मि‍लेगा। 


कमजोर था पुराना कानून 
अभी कांट्रैक्‍ट फार्मिंग एपीएमसी एक्‍ट 2003 के तहत आती है मगर पेंचीदगि‍यों के चलते भारत में यह कामयाब नहीं हो पाई। इसकी वजह से अभी कांट्रैक्‍ट फार्मिंग बहुत छोटे पैमाने पर हो पा रही है। महाराष्‍ट्र, हरि‍याणा, कर्नाटक और मध्‍य प्रदेश जैसे राज्‍यों के कि‍सान कांट्रैक्‍ट फार्मिंग कर रहे हैं। इंडि‍यन कांट्रैक्‍ट एक्‍ट 1872 के प्रावधानों के तहत एक एग्रीमेंट में शामि‍ल दोनों पक्षों को बराबर माना जाता है। खेती के लि‍हाज ये ठीक नहीं था इसलि‍ए मॉडल कानून बनाया गया है। इसमें कि‍सानों को कंपनी से कमजोर माना गया है। 


कांट्रैक्‍ट फार्मिंग के तहत कि‍सान और स्‍पांसर के बीच एक समझौते के तहत खेती होती है। यह कांट्रैक्‍ट कि‍सी एक कि‍सान के साथ भी हो सकता है और कि‍सानों के समूह के साथ भी। 


नए कानून के मुख्‍य प्रावधान 

  • एक राज्‍य स्‍तरीय बोर्ड का गठन कि‍या जाएगा। इसके अलावा जि‍ला, ब्‍लॉक या तालुका स्‍तर पर समि‍ति का गठन या अधि‍कारी नि‍युक्‍त कि‍या जाएगा, जो दोनों पक्षों के बीच होने वाले करार का ऑनलाइन रजि‍स्‍ट्रेशन देखेगा और उनका रि‍कॉर्ड रखेगा ताकि कानून सही ढंग से  लागू हो पाए। 
  • कि‍सान और संबंधि‍त कंपनी के बीच होने वाले करार के बीच प्रशासन तीसरे पक्ष की भूमिका नि‍भाएगा। 
  • ठेका खेती की जमीन पर कि‍सी तरह का स्‍थाई र्नि‍माण नहीं होगा। 
  • छोटे और सीमांत कि‍सानों को एकजुट करने के लि‍ए कि‍साना उत्‍पादक संगठनों व कंपनि‍यों को प्रोत्‍साहि‍त कि‍या जाएगा। 
  • वि‍वादों के  नि‍पटारे के लि‍ए अथॉरि‍टी का गठन कि‍या जाएगा। 
  • कोई भी थोक खरीददार सीधे खेत पर खरीद कर सकेगा। 
  • राज्‍यों को अपनी सुवि‍धा के हि‍साब से प्रावधानों में संशोधन करने की छूट दी गई है। 
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