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जेटली के MSP फॉर्मूले को एग्री एक्‍सपर्ट्स ने कि‍या खारि‍ज, कि‍सानों को नहीं मि‍लेगा लाभ

नई दिल्ली. वित्त मंत्री अरुण जेटली के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने के फॉर्मूले को एक्‍सपर्ट्स ने सि‍रे से खारि‍ज कर दि‍या। उनका कहना है कि‍ इसमें कुछ भी नया नहीं है। अभी जो MSP तय होती है वह भी तकरीबन इसी फॉर्मूले पर है। जब लागत की कैलकुलेशन ही सही नहीं होगी तो उस पर लाभ कैसे मि‍लेगा। स्‍थि‍ति‍ जस की तस है, जेटली का यह फॉर्मूला लाभकारी  नहीं है। 

दरअसल, विपक्ष और कृषि विशेषज्ञ सरकार से उत्पादन की कॉस्ट का फॉर्मूला बताने की मांग कर रहे थे। जेटली ने राज्यसभा में कहा कि सरकार एमएसपी तय करते समय ए2+एफएल (वास्तविक लागत और किसान परिवार के श्रम की लागत) का फॉर्मूला अपनाएगी। उन्‍होंने बताया कि‍ किसानों को बीज, फर्टिलाइजर कॉस्ट, फैमिली लेबर की इनपुट वैल्यू जैसे फैक्टर्स को कैलकुलेट करके 50 फीसदी रिटर्न उपलब्ध कराएगी। इस आधार पर ही एमएसपी तय किया जाएगा, लेकि‍न कृषि‍ वि‍शेषज्ञों ने इसका वि‍रोध कि‍या है। 

 

फॉर्मूले पर नहीं रि‍जल्‍ट पर बात करें 

इंटरनेशनल एग्री बि‍जनेस एक्‍सपर्ट वि‍जय सरदाना कहते हैं कि हमें फॉर्मूले की बात नहीं कि‍सानों के वेलफेयर की बात करनी चाहि‍ए। मुद्दा ये है कि सरकार जो भी तरीका अपना रही है क्‍या उससे कि‍सानों को फायदा हो रहा है। अगर उससे कि‍सानों को फायदा ही नहीं हो रहा तो ये एक तरह की पॉलिटि‍क धोखाधड़ी है। फॉर्मूला तो कुछ भी हो सकता है। हमें उसका रि‍जल्‍ट देखना होगा।मकसद है कि‍सानों को गरीबी से बाहर नि‍कालना और मुझे इस बात पर संदेह है कि‍ इस फॉर्मूले से यह मकसद हासि‍ल हो पाएगा। 

 


मान लें पंजाब का कि‍सान ईंधन, फर्टीलाइजर्स वगैरा पर खूब खर्च करता है और उसकी कॉस्‍ट 30 हजार रुपए आ गई तो क्‍या सरकार उसे 45 हजार रुपए देगी। वहीं ऑर्गेनि‍क खेती करने वाला कि‍सान फर्टीलाइजर्स वगैरा नहीं खरीदता। अगर सरकार के गणि‍त पर चलें तो उस कि‍सान की कॉस्‍ट तो बहुत कम रह जाएगी। फॉर्मूले केवल उलझाने के लि‍ए होते हैं। 

 

प्रॉफिट बढ़ाने की बजाए लागत घटा दी 

जय कि‍सान आंदोलन के राष्‍ट्रीय संयोजक अवि‍क साहा के मुताबि‍क, वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली की इस घोषणा में कुछ भी नया नहीं है। अभी भी सभी प्रमुख फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य देखें तो यह इसी फॉर्मूले के आसपास है जो जेटली अब बता रहे हैं, जब वह पहले लाभकारी नहीं था तो अब कैसे हो गया? लागत कैलकुलेट करने का तरीका ही सही नहीं है। 


वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता धर्मेंद्र मलि‍क ने कहा कि‍ हमें पहले से ही इस बात पर संदेह था, आखि‍र सरकार ने वही कि‍या। जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि‍ सरकार ने  रबी की फसलों की जो एमएसपी तय की है वह लागत का डेढ़ गुना है। इस बार गेहूं की एमएसपी 1735 रुपए तय की गई है। वर्ष 2016-17 में यह 1625 रुपए थी। यानी केवल 6.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। क्‍या यही है लागत का डेढ़ गुना। उन्‍होंने कहा कि‍ कि‍सान नासमझ नहीं है। इस घोषणा को कोई अर्थ नहीं है।  लागत कैलकुलेट करने का सरकार का तरीका ही पूरी तरह से अवैज्ञानि‍क है। 


कृषि‍ विशेषज्ञ देविंदर शर्मा भी इस पर सवाल उठा चुके हैं। उन्‍होंने अपनी फेसबुक पोस्‍ट पर लि‍खा है कि‍  सरकार का यह दावा कि‍ वह कि‍सानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दे रही है, मुझे पि‍छले साल की एक फि‍ल्‍म की याद दि‍लाता है। जि‍सका शीर्षक है, 'डोंट रेज़ द ब्रि‍ज, लोवर द रि‍वर' यानी पुल की ऊंचाई बढ़ाने की बजाए नदी को और गहरा कर दि‍या जाए। फसलों की कीमत बढ़ाने की बजाए कि‍सानी की लागत की कैलकुलेशन को ही कम कर दि‍या जाए। 50 % लाभ का आभास कराया जाए, बाकी काम शोर मचाने वाले कर देंगे। 


सरकार को क्‍या करना चाहिए था

जय कि‍सान आंदोलन के राष्‍ट्रीय संयोजक अवि‍क साहा का कहना है कि सरकार को अगर वाकई अपने बजट वादे को पूरा करना है तो A2+FL पर नहीं बल्‍कि C2 पर 50 फीसदी जोड़कर एमएसपी तय करनी चाहि‍ए। भले ही सरकार 50 फीसदी नहीं करती 40 ही करती मगर कॉस्‍ट सी2 रखती।  धर्मेंद्र भी इससे हामी भरते हैं। वह कहते हैं कि‍ अगर सरकार सी2 के ऊपर कुछ प्रति‍शत बढ़ा कर एमएसपी तय करती है यह कि‍सानों के लि‍ए फायदेमंद होता।  


अभी इस तरह से तय होती है लागत 

अभी सरकार कमीशन फॉर एग्रीकल्‍चर कॉस्ट एंड प्राइज (CACP) की सिफारिशों के आधार पर एमएसपी तय करती है। वहीं सीएसीपी सरकार को सि‍फारि‍शें भेजने से पहले सभी राज्‍यो से सि‍फारि‍शें लेती है। प्रोडक्‍शन की कॉस्‍ट नि‍कालने के तीन फॉर्मूले हैं -  A2, A2+FL और C2. 
A2 - कि‍सान की ओर से की गई सभी तरह की पेमेंट चाहे वो कैश में हो या कि‍सी वस्‍तु की शक्‍ल में, फर्टीलाइजर्स, कैमिकल, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च सहि‍त अन्‍य खर्च जोड़े जाते हैं। 
A2+FL - इसमें A2 के अलावा परि‍वार के सदस्‍यों द्वारा खेतीबाड़ी में की गई मेहतन का मेहनताना जोड़ा जाता है, जि‍से अनपेड फैमिली लेबर कहा जाता है। 
C2 - लागत को कैलकुलेट करने का यह फार्मूला सबसे ज्‍यादा समग्र है। इसमें इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कॉस्‍ट को भी जोड़ा जाता है। इसमें जमीन का कि‍राया व जमीन तथा खेतीबाड़ी के काम में लगी स्‍थाई पूंजी पर ब्‍याज को भी शामि‍ल कि‍या जाता है। यह कॉस्‍ट A2+FL के ऊपर जोड़ी जाती है। 

 

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