मनी भास्कर खास /15 दिनों की देर से चल रहे मॉनसून की मार किसानों पर पड़ना तय

  • कई फसलों के उत्पादन में आ सकती है कमी
  • जून आखिर तक मध्य भारत में पहुंचेगा मॉनसून
  • पूर्वी यूपी में जुलाई पहले सप्ताह तक

Moneybhaskar.com

Jun 19,2019 04:23:12 PM IST

नई दिल्ली. मौसम विभाग के मुताबिक मॉनसून 15 दिन लेट हो चुका है। अब इसकी मार किसानों पर तय बताया जा रहा है। देर से बुवाई करने पर किसानों को कई प्रकार के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। सबसे पहले, इससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। दूसरा, किसानों की लागत बढ़ जाएगी। तीसरा, इससे रबी फसल भी लेट हो जाएगी। चौथा, बुवाई का रकबा कम हो जाएगा। हालांकि सरकार की तरफ से अभी कोई एडवाइजरी जारी नहीं की गई है, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून के लेट होने से किसानों को इस साल नुकसान होना तय है।

बुवाई में देर होने से 20-22 फीसदी का नुकसान

गाजियाबाद के किसान रणबीर सिंह ने मनी भास्कर को बताया कि बुवाई में देर होने से 20-22 फीसदी का नुकसान हो सकता है। उन्होंने बताया कि धान के साथ दलहन, तिलहन, सोयाबीन, बाजरा जैसी फसलें प्रभावित होंगी। उन्होंने बताया कि खरीफ फसल में देरी होने से नवंबर-दिसंबर से शुरू होने वाली रबी फसल भी प्रभावित होगी।

कपास, सोयाबीन और दाल की फसलें भी मॉनसून में देरी से प्रभावित

कृषि विशेषज्ञ चौधरी पुष्पेंद्र सिंह ने मनी भास्कर को बताया कि अभी तक जो मॉनसून के हालात हैं, उसके मुताबिक 15-20 फीसदी तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है। गन्ने के उत्पादन में कमी की आशंका पहले ही जाहिर की जा चुकी है। किसानों के साथ यह भी दिक्कत आ रही है कि अगर अभी वे बुवाई कर दें और अचानक तेज बारिश हो जाए तो बीज, खाद सब सड़ जाते हैं। धान की बुवाई के लिए पहले पौधों को तैयार किया जाता है, अगर मॉनसून में और देरी होगी तो ये पौधें खराब होने लगेंगे। सिंह ने बताया कि कपास, सोयाबीन और दाल की फसलें भी मॉनसून में देरी से प्रभावित हो रही हैं। जलस्तर नीचे जाने से किसानों को पानी अधिक पटाना होगा जिससे उनकी लागत बढ़ेगी।

मानसून की देरी कर सकती है मायूस

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो-तीन दिनों में मॉनसून के कोंकण रिजन में पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक जून अंत तक मध्य भारत में मॉनसून के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, इसका मतलब यह हुआ कि मॉनसून 15 दिनों की देरी से बढ़ रहा है। जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर भारत में मॉनसून के आने की संभावना है। महाराष्ट्र एवं तमिलनाडु पहले से ही भारी जल संकट का सामना कर रहे है। ऐसे में, मॉनसून की देरी किसानों के चेहरे को मायूस कर सकती है।

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