Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

    Home »Personal Finance »Experts» Growth Possible Only If Budget Announcements Come To The Ground

    घोषणाएं जमीन पर दिखें, तो ही होगा फायदा

    घोषणाएं जमीन पर दिखें, तो ही होगा फायदा
    वित्त मंत्री से बजट में जिस तरह से बड़े आर्थिक सुधारों की उम्मीद थी, उसकी थोड़ी झलक ही दिखी है। कई ऐसी घोषणाएं की गई है, जिसकी सफलता उसके एक्जीक्यूशन पर निर्भर करेगी। नहीं तो वह केवल घोषणाएं बनकर रह जाएंगी। फाइनेंशियल सेक्टर के लिए बजट में कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनको पूरा करने में सरकार को कई सारी चुनौती को सामना करना पड़ेगा। मसलन सरकार ने गोल्ड के आयात और खपत पर अंकुश लगाने के लिए सॉवरेन बांड, मोनेटाइजेशन फंड आदि के कदम उठाने का प्रस्ताव दिया है। यह कदम तो अच्छा है लेकिन पुराने इतिहास को देखते हुए इससे कितना फायदा होगा, यह अभी कहना मुश्किल है।
     
    गोल्ड घर से निकालना चुनौती
     
    साल 2000 में भी इस तरह की स्कीम चलाई गई थी, लेकिन बैंकों के पास ज्यादातर सोना मंदिर ट्रस्ट से ही आया था। आम आदमी ने उस समय स्कीम में कम रुचि दिखाई थी। ऐसे में यह चुनौती एक बार फिर वित्त मंत्री के सामने रहेगी।
     
    सरकारी बैंकों के लिए ऑटोनोमस ब्यूरो
     
    सरकारी बैंकों के लिए पूंजी जुटाना आसान करने के लिए बजट में एक ऑटोनामस बैंक बोर्ड ब्यूरो बनाने की घोषणा की है। जिसका उद्देश्य गवर्नेंस और पूंजी जुटाना आसान करना है। जो कि फाइनेंशियल होल्डिंग कंपनी की दिशा में बड़ा कदम है। लेकिन यह ब्यूरो किस तरह काम करेगा, वह एक और सरकारी बॉडी के रूप में बनकर न रह जाए, इसके बारे में बजट में स्पष्टता नहीं है।
     
    पोस्ट ऑफिस से बिजनेस कॉरस्पॉडेंट को मिलेगी चुनौती
     
    देश भर में 1.5 लाख से ज्यादा फैले पोस्ट ऑफिस के नेटवर्क से बैंकिंग सेवाएं देने की बात कही गई है। ऐसे में जनधन योजना और पहले से बने लाखो बिजनेस कॉरस्पॉडेंट के कारोबार को सीधे चुनौती मिलेगी। इसका साफ मतलब है कि दोनो के बीच सामंजस्य बनाना आसान नहीं होगा। इसी तरह कैशलेस ट्रांजैक्शन को लेकर जन धन खाते में 75 फीसदी खातों में जीरो बैलेंस होना बैंकों के लिए चुनौती बनेगा।
    - लेखक बैंकर और एसबीआई के पूर्व सीजीएम हैं।

    Recommendation

      Don't Miss

      NEXT STORY