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मोदी सरकार के लिए खास है यह बजट: डीके जोशी

फरवरी को मोदी सरकार अपने कार्यकाल का पांचवा और शायद आखिरी पूर्णकालिक बजट पेश करने जा रही है

modi government will present fitfh budget

नई दिल्‍ली।  फरवरी को मोदी सरकार अपने कार्यकाल का पांचवा और शायद आखिरी पूर्णकालिक बजट पेश करने जा रही है । 2019 में आम चुनाव होना है। ऐसे में यह प्री इलेक्‍शन ईयर बजट भी है। इन वजहों से यह बजट मोदी सरकार के लिए बेहद खास है। मोदी सरकार इकोनॉमी, नौकरी और किसानों की आय के मोर्चे पर बड़े सुधार के वादे के साथ सत्‍ता में आई थी।  पिछले एक साल में नोटबंदी और जीएसटी की वजह से इकोनॉमी और कमजोर हुई है। इसकी वजह से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था दबाव के दौर से गुजर रही है हाल में गुजराज विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का ग्रामीण गुजरात में प्रदर्शन बेहद खराब रहा है।  ऐसा रूरल स्‍ट्रेस की वजह से है। किसानों को न तो अपनी उपज की अच्‍छी कीमत मिल रही है और न ग्रामीण युवाओं को शहरों या स्‍थानीय स्‍तर पर रोजगार। ऐसे में इन इलाकों में लोगों की सरकार से नाराजगी बढ़ रही है। इस स्थिति को बदलने के लिए मोदी सरकार के पास यह 1 फरवरी का बजट शायद आखिरी मौका है। अगर सरकार यहां पर कारगर कदम नहीं उठाती है तो आगे सरकार के पास इसके लिए पर्याप्‍त समय नहीं होगा। नोटबंदी और इसके बाद जीएसटी लागू होने से ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था की हालत और खराब हो गई है। किसानों को उनकी फसल की कीमत नहीं मिल रही है। शहरों में आर्थिक गतिविधियां सुस्‍त होने का असर गांवों पर भी पड़ा है और जो वर्कर शहर में काम करते और पैसा गांव भेजते थे। उसमें कमी आई है। ग्रामीण इलाकों में रहने वाले युवाओं के लिए शहरों और स्‍थानीय स्‍तर भी रोजगार के मौके कम हो गए हैं। ग्रामीण इलाकों में लोगों की मजदूरी कम हुई है। किसानो के आत्‍महत्‍या के मामले भी सामने आए हैं। युवाओं को नौकरियां नहीं मिल रहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार के लिए 1 फरवरी का बजट मोदी सरकार के लिए अहम है। बजट में सरकार ग्रामीण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर खर्च बढ़ा सकती है जिससे लोगों के पास पैसा पहुंचे। पिछले कुछ महीनों के दौरान गवर्नमेंट बांड की यील्‍ड बढ़ी है। मौजूदा समय में बांड यील्‍ड 7.4 फीसदी पर पहुंच गई है। पिछले कुछ महीनों में यह 6 फीसदी से बढ़ कर 7.4 फीसदी के स्‍तर पर पहुंचा है। इसका मतलब है कि सरकार को बांड पर रिटर्न के तौर पर ज्‍यादा पैसा देना होगा। ऐसे में माकेट की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार बजट में बांड यील्‍ड को लेकर क्‍या रूख अपनाती है। 

 

(लेखक रेटिंग एजेंसी क्रिसिल में चीफ इकोनामिस्‍ट) 

 

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