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    गोल्ड ईटीएफ में निवेश के हैं कई फायदे

    गोल्ड ईटीएफ में निवेश के हैं कई फायदे
    नई दिल्ली। आम तौर पर भारतीय निवेशक फिजिकल गोल्ड में लंबे समय तक निवेश करने में यकीन करते हैं। यहां गोल्ड को सुरक्षित निवेश माना जाता है, जो इनफ्लेशन के दौर में भी अच्छा रिटर्न देता है। लेकिन, जब बात गोल्ड ईटीएफ की आती है, यहां कहानी फिजिकल गोल्ड से अलग होती है। पिछले 3 साल के दौरान (दिसंबर 2013 से नवंबर 2016) गोल्ड ईटीएफ में हर महीने आउटफ्लो देखा गया है। इस दौरान कुल 3 हजार करोड़ का आउटफ्लो देखा गया है।
     
    वहीं, इस दौरान ग्लोबली इन्वेस्टर्स ने गोल्ड ईटीएफ में होल्डिंग बढ़ाई है और इसमें 1200 करोड़ यूएस डॉलर का फ्लो देखा गया है। वहीं, यूएस फेड द्वारा रेट हाइक के डर से नवंबर में गोल्ड ईटीएफ में 470 करोड़ डॉलर का आउटफ्लो देखा गया।
     
     
    इक्विटी मार्केट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं लोग
    ग्लोबल और डोमेस्टिक लेवल पर पिछले 5 साल में गोल्ड में करेक्शन देखा गया है। गोल्ड में करेक्शन की वजह से इस दौरान गोल्ड ईटीएफ की परफॉर्मेंस निगेटिव रही है। इसमें आउटफ्लो का ट्रेंड बढ़ गया है। वहीं डोमेस्टिक इन्वेस्टर्स द्वारा मजबूत इनफ्लो से इंडियन इक्विटी मार्केट ने साल 2014 से बेहतर परफॉर्म किया है। यह इस बात के संकेत भी है कि लोग गोल्ड ईटीएफ से इक्विटी मार्केट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
     
    गोल्ड को सेफ इन्वेस्टमेंट माना जाता है
    गोल्ड को आम तौर पर सेफ हैवन एसेट्स के तौर पर देखा जाता है। दूसरे शब्दों में कहें तो फाइनेंशियल मार्केट में अनिश्चितता के दौर में लोग गोल्ड में इन्वेस्ट के लिए अट्रैक्ट होते हैं। पिछले कुछ साल की बात करें तो जब भी ग्लोबल स्लोडाउन या ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसेस की स्थिति आई है, इक्विटी मार्केट की तुलना में गोल्ड ने आउटपरफॉर्म किया है।
     
    करंसी हेज के रूप में भी काम करता है गोल्ड
    भारत के संदर्भ में देखा जाए तो गोल्ड करंसी हेज के रूप में भी काम करता है। गोल्ड की डोमेस्टिक प्राइस इंटरनेशनल गोल्ड प्राइस या यूएसडी गोल्ड प्राइस पर निर्भर है, ऐसे में अगर रुपए की वैल्यू गिरती भी है तो जरूरी नहीं है कि गोल्ड की वैल्यू कम हो। 
     
    कुल निवेश का 5-10 फीसदी गोल्ड में करें
    समय के साथ इक्विटी, गोल्‍ड से बेहतर परफॉर्म करता है। यह इन्‍वेस्‍टमेंट पोर्टफोलियो में एक अहम भूमिका निभाते हैं। इसकी वजह ट्रेडिशनल एसेट्स जैसे कि इक्विटी और कर्ज के साथ इसका बेहतर कनेक्‍शन न हो पाना होता है। इससे पोर्टफॉलियो में उतार-चढ़ाव कम हो जाता है। ऐसा ज्‍यादातर उस दौर में होता है, जब फाइनेंशियल मार्केट और इकोनॉमी में अनिश्चितता की स्थिति बनी होती है। इन्‍वेस्‍टमेंट पोर्टफोलियो से गोल्‍ड को 5 से 10 फीसदी अलोकेट किया जा सकता है। गोल्‍ड ईटीएफ को कई फायदों के चलते फिजिकल गोल्‍ड के विकल्‍प के तौर पर इस्‍तेमाल किया जा सकता है। इससे ईज ऑफ होल्डिंग, बेहतर लिक्विडिटी और प्राइस में पारदर्शिता जैसे कई फायदे मिलते हैं। 
     
    (धवल कपाड़िया, डायरेक्टर-पोर्टफोलियो स्ट्रैटेजिस्ट, मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया प्रा. लि.)

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