MARKET /भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक्स मार्केट में तेजी, ये हैं मांग बढ़ने के 5 कारण

 

  • नींबू आधारित प्रोडक्ट की बिक्री में ज्यादा तेजी 

Money Bhaskar

Apr 20,2019 09:31:05 AM IST

नई दिल्ली। भारतीय सॉफ्ट ड्रिंक्स मार्केट में तेज ग्रोथ की स्थिति बनी रह सकती है। 2021 तक भारत में प्रति व्यक्ति सालाना खपत 84 बॉटल हो जाएगी। 2016 में भारत में सॉफ्ट ड्रिंक्स की प्रति व्यक्ति सालाना खपत 44 बॉटल थी। यह जानकारी पेप्सीको इंडिया की बॉटलिंग पार्टनर वरुण बेवरेजेस (वीबीएल) की रिपोर्ट से सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक इस इंडस्ट्री को जूस और बोतल बंद पानी की बढ़ती मांग से बल मिलेगा। रिपोर्ट के मुताबिक शहरों और गावों में सॉफ्ट ड्रिंक की खपत में अंतर लगातार कम हो रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय की तुलना में अमेरिकी 34 गुना ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक्स पीते हैं।

मांग बढ़ने के 5 कारण

-मध्य वर्ग की आबादी का बढ़ना

-लोगों की खरीदने की क्षमता में इजाफा

-शहरीकरण

-गांवों में बिजली की बेहतर स्थिति

-प्रोडक्ट पैकेजिंग और साइज में विविधता

सबसे ज्यादा खपत वाले 3 देश

देश : खपत

अमेरिका : 1,496

मैक्सिको : 1489

जर्मनी : 1221

(सालाना आंकड़े 2016 के, बॉटल में)


नींबू आधारित प्रोडक्ट की बिक्री में ज्यादा तेजी

कार्बनेटेड ड्रिंक्स में बिना कोला वाले, खास तौर पर नींबू आधारित प्रोडक्ट की बिक्री में ज्यादा तेजी आएगी। पेप्सी के सॉफ्ट ड्रिंक मार्केट में करीब 51% हिस्सेदारी कार्बनेटेड बेवरेज की है।

पानी के प्रति जागरूकता से बोतल बंद पानी की बिक्री बढ़ेगी

लोगों में खराब पानी के कारण होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूकता बढ़ने से बोतल बंद पानी वाले कैटेगरी की ग्रोथ तेज रहेगी। शहरी क्षेत्रों में पेय जल का अभाव भी इसे तेजी देगा।

नाश्ते और सामाजिक आयोजनों में जूस की बिक्री बढ़ी
स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ने से पैकेज्ड जूस की बिक्री भी बढ़ रही है। साथ सामान्य नाश्ते में भी इसकी डिमांड बढ़ रही है। मीटिंग या सामाजिक आयोजनों में भी जूस की खपत बढ़ी है।

X
COMMENT

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.