Trending News Alerts

ट्रेंडिंग न्यूज़ अलर्ट

    Home »Experts »Taxation» Landmark Tax Reforms Bill To Get Through In The Ongoing Winter Session Of Parliament

    बदलाव के बाद भी GST से इकोनॉमी को मिलेगा बूस्‍ट

    बदलाव के बाद भी GST से इकोनॉमी को मिलेगा बूस्‍ट
     
     
    गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी) बिल को सरकार ने राज्‍य सभा के लिए लिस्‍ट कर लिया है। बसपा, एनसीपी समेत कई विपक्षी दलों ने इसे सपोर्ट करने का आश्‍वासन भी दिया है। लेकिन अपर हाउस में सबसे अधिक 67 सदस्‍यों वाली कांग्रेस के साथ कई दौर की वार्ता के बावजूद सरकार उसके रुख के बारे में आश्‍वस्‍त नहीं है। जबकि लोकसभा में कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया था। बिल की राह आसान करने के लिए भाजपा ने विपक्षी दलों के अधिकांश सुझावों को इसके मसौदे में शामिल करने का आश्‍वासन दिया है। इसके बावजूद बिल संसद में पारित होगा या नहीं, यह कहना अभी मुश्किल है। हालांकि, इस बीच यह सवाल जरूर उठने लगा है कि अगर इस रूप में जीएसटी पारित भी हो जाए तो क्‍या यह उम्‍मीदों पर खरा उतरेगा। फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने भी सार्वजनिक रूप से कहा है कि खराब जीएसटी पारित होने से इकोनॉमी को फायदा होने के बदले नुकसान अधिक होगा।
     
    हालांकि, मेरा मानना है कि इस रूप में भी जीएसटी के कई सारे दूरगामी फायदे होंगे। जीएसटी पैनल द्वारा अपनी रिपोर्ट में जीएसटी रेट को 17-18 फीसदी रखने के सुझाव का कॉरपोरेट वर्ल्‍ड समेत लगभग सभी दलों ने भी समर्थन किया है। कांग्रेस की तरफ से रखी गईं तीन मुख्‍य मांगों- रेवेन्यु न्यूट्रल रेट को 18 फीसदी तक सीमित करना, 1 फीसदी इंटर स्टेट टैक्स खत्म करना और डिसप्यूट रिजॉल्युशन मेकेनिज्म तैयार करने के लिए सरकार तैयार दिखती है।
     
    इन सुझावों को जीएसटी के मसौदे में शामिल करने के बाद भी यह असरदार बना रहेगा। क्‍योंकि जीएसटी से देशव्‍यापी सिंगल टैक्‍स मार्केट के निर्माण और टैक्‍स बेस में विस्‍तार के साथ ही टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर में डुप्लिसिटी खत्‍म करने में भी मदद मिलेगी। जीएसटी से पूरा टैक्‍सेशन प्रोसेस कुशल होगा, जिससे प्रोडक्‍शन प्रोसेस में भी कुशलता आएगी। और आखिर में इसका लाभ अधिक प्रोडक्‍शन के रूप में सामने आएगा। इससे टैक्‍स से जुड़ी कई सारी अनियमिताएं भी खत्‍म हो जाएंगी। सच यह है कि त्रुटिपूर्ण टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर की वजह से कई इकोनॉमिक रिफॉर्म्‍स के बावजूद इकोनॉमिक एक्टिविटी को गति देने में अभी तक खासी मशक्‍कत करनी पड़ रही है। इसलिए इंडियन और वर्ल्‍ड कॉरपोरेट्स से लेकर टैक्‍स एक्‍सपर्ट तक सभी टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर को कुशल और पारदर्शी बनाने की मांग करते आ रहे हैं। जीएसटी से काफी हद तक यह सुनिश्चित करना संभव होगा।
     
    इस बात से सभी सहमत हैं कि जीएसटी के इम्‍पलीमेंटेंशन से जीडीपी ग्रोथ रेट में दो फीसदी तक का इजाफा हो सकता है। अगर जीएसटी रेट 18 फीसदी से 20 फीसदी के बीच रहता है तो इसका मतलब है कि बड़ी संख्‍या में मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेगमेंट को 3-4 फीसदी की टैक्‍स सेविंग होगी। कई कंपनियों के टैक्‍स रेट कम होने के साथ उनके कई सारे प्रोडक्‍ट्स 12 फीसदी के निचले स्‍लैब में चले जाएंगे। इससे भी इन कंपनियों को फायदा होगा। हालांकि, जीएसटी रेट इससे अधिक होने पर बिजनेस कॉन्फिडेंस और ग्रोथ पर निगेटिव इम्‍पैक्‍ट होगा। लेकिन ऐसा होगा नहीं, क्‍योंकि पैनल की सलाह आ चुकी है और लगभग सभी दल इसपर सहमत भी नजर आ रहे हैं।
     
    टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर में समानता आने से असंगठित सेक्‍टर को थोड़ी परेशानी झेलनी पड़ सकती है, लेकिन ऑर्गनाइज्‍ड सेक्‍टर को इस मामले में लाभ मिलने जा रहा है। जीएसटी के क्रियान्‍वयन के बाद धीरे-धीरे इसके फायदे बढ़ते चले जाएंगे। सिगरेट बिजनेस समेत लग्‍जरी आयटम्‍स और लग्‍जरी गाड़ि‍यों पर लगने वाले लगभग 40 फीसदी के ‘सिन टैक्‍स’ से बेशक इनसे जुड़ी कंपनियों को थोड़ा घाटा उठाना पड़ सकता है। लेकिन मैन्‍युफैक्‍चरिंग से जुड़ी अन्‍य कंपनियों को साफ तौर पर इसका फायदा होगा। हां, जीएसटी दर के 17-18 फीसदी से कम होने पर राज्‍यों के रेवेन्‍यू में थोड़ी कमी आ सकती है। हालांकि, इसकी संभावना भी कम है। और अगर ऐसा होता भी है तो केंद्र ने उन्‍हें इस कमी की भरपाई करने का आश्‍वासन दे ही रखा है।
     
    इन अच्‍छाइयों के बावजूद जीएसटी की राह में सबसे बड़ी बाधा राजनीतिक असहमति है। कांग्रेस ने मांग की है कि संविधान में जीएसटी रेट का उल्‍लेख हो। जबकि संविधान में इस मामले में सिर्फ ‘ब्रॉड फ्रेमवर्क’ ही दिया जाता है और बजट में रेट की चर्चा होती है। इसके अलावा, जीएसटी काउंसिल पर भी कांग्रेस के साथ तकरार की आशंका है। अगर भाजपा जीएसटी काउंसिल को ताकतवर बनाना चाहेगी तो संभव है कि कांग्रेस उस पर तैयार नहीं हो। राज्यसभा में इस बिल को दो-तिहाई बहुमत से पारित कराना जरूरी है, जबकि कांग्रेस और उसे समर्थन दे रहे दलों के सदस्‍यों की संख्‍या वहां 90 के आसपास है। इससे कांग्रेस के बगैर 240 की वर्तमान स्‍ट्रेंथ के दो-तिहाई सदस्‍यों का समर्थन जुटाना भाजपा के लिए कठिन है। साफ है कि संसद में पारित होने के बाद भी जीएसटी क्रियान्‍वयन की राह में कई रोड़े आएंगे। लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि जीएसटी के मूल स्‍वरूप में डाल्‍यूशन के बावजूद यह इकोनॉमी के लिए बहुत बड़ा पॉजिटिव कदम है। एक अप्रैल 2016 से अगर इसका क्रियान्‍यन होता है तो इकोनॉमी के लिए यह काफी अच्‍छा रहेगा।  
     
    पई पनंदिकर इकोनॉमिस्‍ट हैं। 

    Recommendation

      Don't Miss

      NEXT STORY