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    बजट में GST पर दिखी प्रतिबद्धता, ढंडे बस्‍ते में गया डीटीसी

    बजट में GST पर दिखी प्रतिबद्धता, ढंडे बस्‍ते में गया डीटीसी
    आज पेश हुआ आम बजट दो तरह से देश के टैक्‍स ढ़ाचे के लिए बेहद महत्‍वपूर्ण रहा। पहला बजट में वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने एक बार फिर गुड्स एवं सर्विसेस टैक्‍स को 1 अप्रैल 2016 से लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की। वहीं लंबे असरे से ठंडे बस्‍ते में पड़े प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) को पूरी तरह से दफ्न करने की घोषणा भी वित्‍त मंत्री बजट में कर गए। यह यूपीए की साख पर भी धक्‍‍का है। जो पहले भी इसे लागू करने के कई असफल प्रयास कर चुकी थी। 
     
    वित्‍त मंत्री ने जीएसटी की राह में एक और कदम उठाते हुए बजट के दौरान रोडमैप पेश करने की भी कोशिश की। इसके तहत उन्‍होंने एक्‍साइज और सर्विस टैक्‍स रियायतों की एक लंबी सूची भी जारी की है। जो कि जीएसटी लागू होने तक टैक्‍स सिस्‍टम में हो रहे बड़े बदलाव को और सुचारू बनाएगा। टैक्‍स व्‍यवस्‍था में इस बदलाव की एक झलक आर्थिक सर्वेक्षण में भी दिखाई दी थी। जिसे वित्‍त मंत्री ने आगे बढ़ाया है। बजट में वित्‍त मंत्री ने टैक्‍स सिस्‍टम को हाइटेक बनाने की घोषणा भी की, जो कि जीएसटी को सुचारू रूप से लागू करने में एक महत्‍वपूर्ण कदम साबित होगा। इकोनोमिक सर्वे ने भी टैक्‍स सिस्‍टम में तकनीकी दक्षता को बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया था। ऐसे में संभावना है कि अगले कुछ महीने में जीएसटी के लिए विशेष पोर्टल सामने आए। जिस पर आम लोग अपनी टिप्‍पणी और सुझाव दे सकेंगे।
     
    वक्‍त की गर्त में गया डीटीसी
     
    आज पेश हुए आम बजट में एक प्रमुख घोषणा डीटीसी को लेकर भी रही। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यूपीए सरकार की प्रमुख योजना प्रत्यक्ष कर संहिता (डीटीसी) को छोड़ने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि सात साल पहले पेश किए गए डीटीसी को क्रियान्वित करने का कोई मतलब नहीं है। स्वैच्छिक कर अनुपालन को सुगम बनाने और कानूनी विवादों को कम करने के इरादे से पांच दशक पुराने आयकर कानून में सुधार लाने के इराद से डीटीसी का विचार सबसे पहले 2008 में किया गया था। संसद में 2015-16 का बजट पेश करते हुए जेटली ने कहा, 'प्रत्यक्ष कर संहिता के मामले में कदम आगे बढ़ाने का कोई अर्थपूर्ण मतलब नहीं है क्योंकि इसके प्रावधान पहले से हैं।' पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की डीटीसी योजना सात साल से लंबित थी। संसद की स्थायी समिति की समीक्षा के बाद यूपीए सरकार ने पिछले साल अप्रैल में डीटीसी विधेयक का संशोधित मसौदा पेश किया था। 
    (लेखक जाने माने टैक्‍स एक्‍सपर्ट हैं)

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