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    स्टार्टअप्स से हर साल 70 हज़ार लोगों को मिलेगा रोज़गार

    स्टार्टअप्स से हर साल 70 हज़ार लोगों को मिलेगा रोज़गार
     
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 सितंबर 2015 को कैलिफोर्निया (यूएसए) में स्टार्टअप्स के बारे में बोलते हुए कहा कि "स्टार्टअप का विचार मेरे दिल के करीब है। मानव इतिहास और प्रगति की दिशा कल्पना, प्रेरणा, आविष्कार और इनोवेशन (नवप्रवर्तन) से तय हुई है। स्टार्टअप्स हमेशा प्रगति के इंजन रहे हैं। डिजिटल युग ने स्टार्टअप्स के लिए एक नए उर्वर माहौल को जन्म दिया है। स्टार्टअप्स, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन से देश में बदलाव लाया जा सकता है। स्टार्ट-अप देश के सोशल इनोवेशंस का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। नवविचार और नवप्रवर्तन की भावना विशेष कर ग्रामीण भारत का नक्शा बदल सकती है। हम अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस को सुलभ और सस्ता कर रहे हैं। मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और डिजिटल इंडिया से अवसर ही अवसर पैदा होंगे"। इसके पूर्व भी प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से 'स्टार्टअप इंडिया-स्टैंडअप इंडिया' का आह्वान किया था।
     
    गौरतलब है कि देश की जीडीपी में सर्विस सेक्टर का योगदान 60 फीसदी के करीब पहुंच गया है और इसके पीछे आईटी, संचार और 'नॉलेज इकोनॉमी' का बहुत बड़ा योगदान है । ऐसा समझा जाता है कि आने वाले वर्षों में किसी भी देश की प्रगति उस देश के 'नॉलेज इकोनॉमी' के स्तर से तय होगी। ऐसे में इनोवेशन और इन्क्यूबेशन को देश में बढ़ावा देना अत्यंत जरूरी हो जाता है, और 'स्टार्टअप इंडिया' इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।
     
    देश में सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा इनोवेशन और इन्क्यूबेशन के लिए सहायता प्रदान करने के लिए कई अच्छे प्रयास किए गए हैं। नैसकॉम द्वारा आईटी क्षेत्र में शुरू किया गया '10,000 स्टार्टअप प्रोग्राम' और केरल में 'स्टार्टअप विलेज' द्वारा आईटी और मैन्युफैक्चरिंग, विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में युवाओं द्वारा स्टार्टअप बनाने की शुरुआत इनके उदाहरण हैं। भारत सरकार ने इनक्यूबेटर स्कीम तथा डिज़ाइन क्‍लीनिक स्कीम के माध्यम से इन्क्यूबेशन सेंटर्स बनाने तथा आइडिया इंक्यूबेट करने की दिशा में अच्छी प्रगति की है। इसी प्रकार डिपार्टमेंट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की प्रौद्योगिकी व्यापार इन्क्यूबेटर (TBI) और डिपार्टमेंट ऑफ़ बायोटेक्नोलॉजी की बायरक (BIRAC) स्कीमों द्वारा भी विशेष कर टेक्नोलॉजी बिज़नेस इन्क्यूबेशन में उल्लेखनीय काम किया गया है। एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल स्माल इंडस्ट्रीज कारपोरेशन द्वारा भी एक इनक्यूबेटर स्कीम संचालित की जा रही है, जिसका उद्देश्‍य लघु उद्यमियों में इनोवेशन व न्‍यू प्रोडक्‍ट को मजबूती प्रदान करना है। तेलंगाना द्वारा हाल में ट्रिपल आईटी-एच, नैसकॉम, टाटा, आईएसबी और एनएएलएसएआर के साथ स्टार्टअप्स के लिए संस्थागत व्यवस्था 'टी-हब' बनाने की पहल इस क्षेत्र में एक नया कदम है। यह सैद्धांतिक रूप से एक बहुत बढ़िया शुरुआत है, क्योंकि स्टार्टअप एक लम्बी प्रकिया है, जो आइडिएशन से शुरू होती है फिर इन्क्यूबेशन से होती हुई एक एंटरप्राइज में परिवर्तित होती है। इसके हर स्टेप में मेंटर्स और इंस्टीटूशनल सपोर्ट की जरूरत होती है।
     
    देश में हर साल लगभग 15 लाख युवा इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट से पास आउट होते हैं और रोजगार पाना उनके लिए एक मात्र लक्ष्य होता है। इन युवाओं को नए विचारों की तरफ उन्मुख करने, उनके आइडियाज को टेक्नोलॉजी बिज़नेस में इंक्यूबेट करने तथा नया उद्यम (स्टार्टअप ) शुरू करने के लिए एक इंटीग्रेटेड और कोऑर्डिनेटेड एप्रोच ज्यादा प्रभावशाली हो सकता है, जिसका वर्तमान समय में अभाव है। नैसकॉम द्वारा किये गए अध्ययन के मुताबिक भारत 'स्टार्टअप' के क्षेत्र में सबसे तेज गति से बढ़ने वाला देश बन गया है। स्टार्टअप की संख्या के मामले में यह अमेरिका, चीन और यूके के बाद चौथे स्थान पर है। अध्ययन के अनुसार हर साल  देश में तकरीबन 2000 से ज्यादा स्टार्टअप 2020 तक बनेंगे, जिससे 65-70 हज़ार लोगों को हर वर्ष रोज़गार मिल सकेगा, जो इस समय 20-30 हज़ार के करीब है। आज बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, चेन्नई और दिल्ली राजधानी क्षेत्र स्टार्टअप के एपिसेंटर्स के रूप में उभरे हैं।
     
    देश में स्टार्टअप की मदद के लिए वेंचर कैपिटल फंड्स और क्राउड फंडिंग का भी एनवायरनमेंट तेजी से बदला है और अब कई बड़े प्लेयर्स जैसे टाटा और महिंद्रा ने भी स्टार्टअप्स को एंजेल फंडिंग कर रहे हैं। देश में स्टार्टअप का इकोसिस्टम तेजी से तैयार हो रहा है, पर अब भी यह या तो आईटी अथवा सर्विस सेक्टर को सपोर्ट कर रहा है या यह बेंगुलुरू, हैदराबाद और पुणे जैसे महानगरों तक ही सीमित है। देश के सुदूर क्षेत्रों के युवाओं से यह इकोसिस्टम अभी दूर ही लगता है। और इसका सबसे बड़ा कारण जानकारी का अभाव और मेंटर्स की कमी है।
     
    ऐसे में  स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाने और जल्द से जल्द पूरे देश में फ़ैलाने के लिए एक वर्चुअल प्लेटफार्म मददगार हो सकता है, जो इस दिशा में एक अच्छी रणनीति साबित हो सकती है। एक इंटीग्रेटेड 'स्टार्टअप इंडिया वेब पोर्टल' जिसमे आइडिएशन, इन्क्यूबेशन और स्टार्टअप तीनों वर्टिकल की जानकारी, सुविधाए, और मेंटर्स से जुड़ने की सहूलियत हो, और जहां टेक्निकल, बिज़नेस और लीगल एक्सपर्ट्स एक साथ मौजूद हों और जो धन की आवश्यकता के लिए वेंचर कैपिटल फंड्स और अन्य वित्तीय संथाओं जैसे बैंक को भी जोड़ता हो, युवाओं के लिए वरदान साबित हो सकता है । पोर्टल से रिटायर्ड प्रोफेसर्स, इंजीनियर्स, साइंटिस्ट्स, इंडस्ट्रियलिस्ट्स और प्रोफेशनल्स को मेंटर के रूप में आसानी से जोड़ा जा सकता है। ऐसे पोर्टल की पहुंच देश के हर युवा जो इंटरनेट और स्मार्टफोन से जुड़ा है तक हो सकती है, जो उन्हें नया सोचने और नया करने के लिए प्रेरित और मार्गदर्शित करने में सहायक हो सकता है।
     
    लेखक  संयुक्त विकास आयुक्त, एमएसएमई मंत्रालय भारत सरकार के रूप में कार्यरत, सम्प्रति इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में अध्ययनरत हैं। यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं। 

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