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    SME के लिए उठे कई कदम, कुछ दिनों में दिखेगा असर

    SME के लिए उठे कई कदम, कुछ दिनों में दिखेगा असर
    केंद्र में मोदी सरकार को एक साल पूरा होने को है। देश में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद ड्राइविंग सीट पर हैं। यही वजह है कि पिछले एक साल में माहौल में काफी बदलाव आया है और सेंटीमेंट भी बदले हैं। एक साल के दौरान सरकार ने कई महत्‍वपूर्ण कदम उठाए हैं। जिसका फायदा सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम दर्जे के उद्योग (एमएसएमई) को आने वाले दिनों में मिलेगा।
     
    एमएसएमई की परिभाषा बदलेगी
     
    सरकार ने एमएसएमई की बहुत पुरानी मांग को स्‍वीकार कर सराहनीय कार्य किया है। एमएसएमई की परिभाषा काफी पुरानी हो गई थी, जिसमें बदलाव की मांग लंबे समय से उठ रही थी। सरकार ने एक पॉलिसी तैयार कर ली है। पॉलिसी में प्रस्‍ताव रखा गया है कि मैन्‍यूफैक्‍चरिंग में 50 लाख रुपये तक पूंजी निवेश करने वालों को माइक्रो यूनिट का दर्जा दिया जाएगा, जबकि अभी 25 लाख रुपये तक पूंजी निवेश करने पर माइक्रो यूनिट का दर्जा मिलता है।  इसी तरह 10 करोड़ रुपये तक की इंडस्‍ट्री को स्‍माल इंडस्‍ट्री माना जाएगा, जो अभी 5 करोड़ रुपये है और मीडियम इंडस्‍ट्री में भी पूंजी निवेश की सीमा बढ़ाई जा रही है। अब तक 10 करोड़ रुपये तक की पूंजी निवेश वाली कंपनी को मीडियम इंडस्‍ट्री माना जाताहै, लेकिन अब इसकी सीमा बढ़ा कर 20 या 25 करोड़ रुपये की जा रही है।
     
    मुद्रा बैंक से होगी एमएसएमई की राह आसान
     
    माइक्रो सेक्‍टर कई बार फंडिंग की समस्‍या से जूझता है, लेकिन केंद्र सरकार ने मुद्रा बैंक का गठन कर एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। यह बैंक माइक्रो सेक्‍टर को आसान शर्तो पर लोन देगा। उम्‍मीद है कि समय पर लोन मिलने से माइक्रो सेक्‍टर को फंड की समस्‍या से नहीं जूझना पड़ेगा और वे तरक्‍की का एक नया अध्‍याय लिखेंगे।
     
    सरकारी खरीद से बढ़ेगा कारोबार
     
    सरकार ने एक और महत्‍वपूर्ण कदम उठाया है। जो एमएसएमई सेक्‍टर के ग्रोथ के लिए मील का पत्‍थर साबित होगा। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि सभी सरकारी और अर्ध सरकारी कंपनियों को हर हाल में 20 फीसदी खरीदारी एमएसएमई से करनी होगी। यह आदेश एक अप्रैल से लागू हो गया है और कुछ उद्यमियों ने इसका फायदा भी लेना शुरू कर दिया है।
     
     
    श्रम कानून होंगे आसान
     
    सरकार ने एक साल के दौरान श्रम सुधार की दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं। 40 से कम श्रमिकों वाले छोटे उद्योगों के लिए श्रम कानूनों में संशोधन किया जा है। लगभग 14 कानूनों को मिलाकर एक कानून बनाया जा रहा है। इससे उद्योगपतियों की परेशानी काफी कम होगी और उन्‍हें श्रम विभाग के उत्‍पीड़न से भी नहीं गुजरना पड़ेगा।   
     
    बेरोजगारों को मिलेगा स्‍वरोजगार
     
    सरकार ने युवाओं को रोजगार देने और नए उद्यमियों के लिए भी कई महत्‍वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की है। सरकार ने सेतु स्‍कीम की शुरुआत की है। जो युवा टेक्‍नालॉजी बेस प्रोजेक्‍ट शुरू करना चाहते हैं, उन्‍हें सेतु स्‍कीम के तहत फंडिंग की जाएगी। इसके अलावा सरकार ने इनोवेशन फाइनेंस स्‍कीम भी शुरू की है, जो इनोवेशन को बढ़ावा देगी। युवाओं को तकनीकी व रोजगार परक प्रशिक्षण देने के लिए इनक्‍यूबेश्‍न सेंटर भी खोले जाएंगे। 
     
    अब राज्‍य सरकारों की बारी
     
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयास तब ही सफल होंगे, जब राज्‍य सरकारें उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर चलेंगी। क्‍योंकि केंद्र सरकार नीति बनाती है और उन नीतियों को लागू करने का जिम्‍मा राज्‍य सरकारों के पास होता है। उम्‍मीद है कि राज्‍य सरकारें भी बदलाव लाएंगी और देश उन्‍नति के पथ पर अग्रसर होगा।
     
    *    लेखक राजीव चावला, इंटीग्रेटिड एसोसिएशन ऑफ माइक्रो, स्‍माल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं।

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