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बजट से एमएसएमई सेक्‍टर को नहीं मिला कोई बड़ा फायदा

जेटली ने माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम सेक्‍टर की कंपनियों के लिए कारपोरेट टैक्‍स की छूट का दायरा बढ़ा दिया है।

budget 2018 are not fruitful for msme sector

फाइनेंस मिनिस्‍टर अरुण जेटली ने माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम सेक्‍टर की कंपनियों के लिए कारपोरेट टैक्‍स की छूट का दायरा बढ़ा दिया है। पिछले बजट में घोषणा की गई थी कि 50 करोड़ रुपए तक की टर्नओवर वाली कंपनियों को 30 की बजाय 25 फीसदी कारपोरेट टैक्‍स देना होगा। अब घोषणा की गई है कि उन कंपनियों को भी कारपोरेट टैक्‍स में 5 फीसदी की छूट दी जाएगी, जिनकी सालाना टर्नओवर 250 करोड़ रुपए है। बजट भाषण के दौरान फाइनेंस मिनिस्‍टर ने कहा कि इससे 99 फीसदी एमएसएमई सेक्‍टर की कंपनियों को फायदा होगा, क्‍योंकि ये सभी टैक्‍स पेयर्स होती हैं।


 

इसे थोड़ा समझने की जरूरत है। फाइनेंस मिनिस्‍टर ने कंपनी कहा है और कंपनी का मतलब, प्राइवेट लिमिटेड और लिमिटेड कंपनियों से होता है, जबकि एमएसएमई सेक्‍टर में ज्‍यादातर प्रोपराइटरशिप या पार्टनरशिप फर्म होती हैं। बहुत कम प्राइवेट लिमिटेड या लिमिटेड कंपनियां , एमएसएमई सेक्‍टर से जुड़ी हैं, इसलिए यह कहना सही नहीं है कि इससे एमएसएमई सेक्‍टर को फायदा होगा। इससे मीडियम सेक्‍टर की कंपनियों को फायदा होगा।


 

इसके अलावा आम बजट में फाइनेंस मिनिस्‍टर ने एमएसएमई सेक्‍टर को 3794 करोड़ रुपए का क्रेडिट सपोर्ट देने की भी घोषणा की। एमएसएमई सेक्‍टर के लिए कई क्रेडिट सपोर्ट प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं और लगभग इतना बजट सपोर्ट हर बार मिलता है। इस बार 3794 करोड़ रुपए दिया गया है। जो नाकाफी है। 


 

एमएसएमई सेक्‍टर को उम्‍मीद थी कि उनके लिए बजट में किसी बड़े पैकेज की घोषणा की जाएगी, लेकिन फाइनेंस मिनिस्‍टर ने इस ओर ध्‍यान नहीं दिया। 

 

लेखक राजीव चावला, इंटिग्रेटिड एसोसिएशंस ऑफ माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हैं

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