ग्रामीण वि‍कास के लि‍ए बजट बढ़ाने से ज्‍यादा जरूरी है योजनाओं को सही ढंग से लागू करना

डॉ. मही पाल

Feb 01,2017 10:10:00 PM IST
नई दि‍ल्‍ली. ग्रामीण वि‍कास के लि‍ए इस बजट में सरकार ने जि‍न योजनाओं की घोषणा की है अगर उन्‍हें सही ढंग से लागू कि‍या जाए तो यकीनन ग्रामीण इलाकों की तस्‍वीर बदल जाएगी। मनरेगा के तहत बढ़ाए गए बजट आवंटन का सीधा फायदा ग्रामीण परि‍वारों को मि‍लेगा। उनके रहन-सहन का स्‍तर सुधरेगा।
हालांकि,‍ सरकार को इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लि‍ए और काम करना होगा। वर्ष 2017-18 के बजट में ग्रामीण इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के डेवलपमेंट पर फोकस कि‍या गया है। महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, मनरेगा जैसी योजनाओं में आवंटन बढ़ाया गया है जि‍सका ग्रामीण वि‍कास में अहम योगदान है, लेकि‍न असली चुनौती योजनाओं को लागू करना है। मसलन मरनेगा का ही उदाहरण लें।
अभी मनरेगा के तहत एक परि‍वार को सालभर में 100 दि‍न रोजगार देने का प्रावधान है मगर अभी केवल 39 दि‍न ही रोजगार मि‍ल पा रहा है। अगर हम 100 दि‍न रोजगार देने के लक्ष्‍य को हासि‍ल कर लें तो ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था में बड़ा बदलाव आ सकता है। यहां एक बात और है कि‍ नि‍यमों के मुताबि‍क, 15 दि‍न के भीतर मजदूरी की पेमेंट हो जानी चाहि‍ए मगर इसमें अभी लंबा वक्‍त लग जाता है। इसलि‍ए बजट बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी है कि‍ योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने की दि‍शा में काम कि‍या जाए।
इस बार के बजट में एक अच्‍छी बात यह हुई है कि‍ अब 100 लोगों की आबादी वाले इलाकों को भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क से जोड़ा जाएगा। पहले इस योजना के तहत ऐसे हेमलेट को शामि‍ल कि‍या जाता था, जि‍नकी आबादी 500 की थी। इससे दूर दराज के और कई इलाके सड़कों से जुड़ जाएंगे और उनके वि‍कास का रास्‍ता साफ होगा।
जहां तक पंचायती राज संस्‍थानों के लि‍ए ‘ह्यूमन रि‍सोर्स रि‍फॉर्म फॉर रि‍जल्‍ट’ प्रोग्राम शुरू करने की बात है तो इससे एक बात तो साफ जाहि‍र है कि‍ अभी सरकारी योजनाओं में पंचायतों की भागीदारी का स्‍तर कम है। पंचायतों के स्‍तर पर अधि‍कारि‍यों व कर्मचारि‍यों की कमी है। इस प्रोग्राम के लागू होने से प्रशासनि‍क ढांचा मजबूत होगा और सरकारी योजनाएं और प्रभावी ढंग से लागू हो पाएगीं।
सरकार ने 50000 ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्‍त करने का जो लक्ष्‍य रखा है इस प्रोग्राम से उसे पूरा करने में भी मदद मि‍लेगी। हालांकि‍ अगर इनके कामकाज को और बेहतर बनाना है तो हमें पंचायतों के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर को और मजबूत बनाना होगा जैसे कि‍ ऑफि‍स, फोन, इंटरनेट वगैरा क्‍योंकि‍ इनके बि‍ना जो हम एंकाउंटेबि‍लि‍टी व ई गवर्नेंस की बात कर रहे हैं वह मुमकि‍न नहीं है। कुल मि‍लाकर कहा जाए तो ग्रामीण क्षेत्रों के वि‍कास के लि‍हाज से यह बजट अच्‍छा है।
(जैसा कि‍ डॉ. मही पाल ने तोयज कुमार सि‍ंह को बताया। लेखक पाल इंडि‍यन इकोनॉमि‍क्‍स सर्वि‍सेज के पूर्व अधिकारी हैं)
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