बिज़नेस न्यूज़ » Experts » Taxationजेटली ने सब जीएसटी काउंसि‍ल पर छोड़ा

जेटली ने सब जीएसटी काउंसि‍ल पर छोड़ा

जेटली ने इस मामले में जीएसटी काउंसि‍ल को रास्‍ता देने के लि‍ए न तो दरों में कोई बदलाव कि‍या और न ही सर्वि‍स को अलग अलग कैटेगरी में डाला

Categorization of Services could have pave way for GST says Sumit Dutt
नई दि‍ल्‍ली. उम्‍मीद जताई जा रही थी कि‍ वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली इस बजट में इनडायरेक्‍ट टैक्‍स, खासकर सर्वि‍स टैक्‍स में बड़े बदलाव का ऐलान कर सकते हैं। इस तरह की चर्चा थी कि‍ सर्वि‍स टैक्‍स की दर को जीएसटी की 18 फीसदी दर तक ले जाने कोशि‍श के तहत सेवाओं की तीन कैटेगरी में बांट दि‍या जाएगा। मगर ऐसा कुछ नहीं हुआ। जेटली ने इस मामले में जीएसटी काउंसि‍ल को रास्‍ता देने के लि‍ए न तो दरों में कोई बदलाव कि‍या और न ही सर्वि‍स को अलग अलग कैटेगरी में डाला। ऐसा करने से जीएसटी लागू करने के दौरान अब बड़े बदलाव नजर आएंगे।
 
जीएसटी काउंसि‍ल में मोटे तौर पर यह पहले ही तय हो चुका है कि‍ सेवाओं को तीन से चार कैटेगरी में बांट दि‍या जाएगा। इससे गरीब आदमी को कुछ सेवाएं मुफ्त में मि‍ल जाएंगी और लग्‍जरी सेवाओं पर भारी कर लगेगा। अगर यह डि‍वीजन अभी से कर दि‍या जाता तो जीएसटी काउंसि‍ल की बैठक के लि‍ए एक ड्राफ्ट तैयार हो जाता। जो सेवा कर की मौजूदा पॉजि‍टि‍व, नगेटि‍व लि‍स्‍ट या एंग्‍जेप्‍ट लि‍स्‍ट है वो केंद्र के हि‍साब से है, जबकि‍ जीएसटी में केंद्र और राज्‍य दोनों का स्‍टेक है।
 
बहुत सी ऐसी सेवाएं हैं जो आज टैक्‍स के दायरे से बाहर हैं मगर जीएसटी लागू होने के बाद उन पर टैक्‍स लग सकता है। ऐसे में जो भी लि‍स्‍ट बनेगी वो जीएसटी काउंसि‍ल ही बनाएगी। अगर सेवा कर की कैटेगरी में अभी कुछ बदलाव हो जाते काउंसि‍ल में इस पर सहमति‍ बनाना आसान हो जाता।
 
इसी तरह से अभी सर्वि‍स टैक्‍स का थ्रेशहोल्‍ड 10 लाख रुपये है जबकि‍ जीएसटी में 20 लाख हो जाएगा। यह भी तय हो गया है कि‍ जीएसटी एक जुलाई से लागू हो जाएगा। ऐसे सर्वि‍स प्रोवाइडर जो 10 लाख से ऊपर और 20 लाख के सालाना टर्नओवर की लि‍मि‍ट से नीचे हैं वो अभी तो टैक्‍स के दायरे में आते हैं मगर बाद में इस दायरे से बाहर हो जाएंगे, उन्‍हें बेवहज तीन महीने के लि‍ए न सि‍र्फ सेवा कर देना होगा बल्‍कि‍ उसकी रि‍टर्न वगैरा भी फाइल करनी होगी।
 
इसी तरह से अगर हम एक्‍साइज ड्यूटी की बात करें तो अभी केंद्र के नोटि‍फिकेशन में करीब 350 एग्‍जेंप्‍शन हैं। वहीं राज्‍य के नोटि‍फि‍केशन में करीब 98 एग्‍जेंप्‍शन हैं। जीएसटी लागू होने पर दोनों की एक सूची बननी होगी। उसमें न तो 350 एग्‍जेंप्‍शन रखना मुमकि‍न है और न ही 98 एग्‍जेंप्‍शन। यह सूची 200 से 250 के बीच रहेगी। ऐसे में अगर ये एक्‍सरसाइज अभी से कर ली गई होती तो जीएसटी की राह आसान हो जाती।
 
(जैसा कि‍ सुमि‍त दत्‍त मजूमदार ने तोयज कुमार सिं‍ह को बताया। मजूमदार, सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्‍साइज एंड कस्‍टम्स के पूर्व चेयरमैन हैं)
  
 
 
 
prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट