अनछुए पहलु /कभी खंभों पर केबल के तार खींचते थे, अब बनाया राजधानी का विजन डॉक्यूमेंट

  • भाजपा हो या कांग्रेस, जो भी शहर के विकास की बात करता है उसके साथ करने लगते हैं काम 
  • मनी भास्कर आपको बता रहा है विजन डॉक्यूमेंट बनने के दौरान के अनछुए पहलु

money bhaskar

Apr 22,2019 10:45:20 AM IST

नई दिल्ली. एक शख्स जो कहने को एक बिल्डर है। लेकिन उसकी पहचान है, कवि, लेखक, नगर नियोजकऔर अर्बन प्लानिंग के जानकार की। इन सबसे बढ़कर शहर के विकास के लिए किसी से भी भिड़ जाने या कुछ कर गुजरने के जज्बे व जुनून की धुन। कोई भी पार्टी हो या नेता हो। सबके पास पहुंच जाता है राजा भोज के एक हजार साल से भी ज्यादा पुराने और नियोजित शहर के डेवलपमेंट पर बात करने। न सिर्फ बात करने बल्कि पूरी रिसर्च, आंकड़े और प्रजेंटेशन के साथ। दिग्विजय सिंह ने रविवार को विजन डॉक्यूमेंट पेश किया तो सबको हैरत हुई कि उसका प्रजेंटेशन भी ही यही शख्स कर रहा था। नाम है मनोज सिंह मीक। आम लो मिडिल क्लास से सफर शुरू करने वाले मीक की कहानी भी दिलचस्प है। मनी भास्कर ने जानी उनकी जिंदगी और विजन डॉक्युमेंट बनाने के दौरान के अनछुए पहलु।


दिग्विजय ने ही ढूंढ़वाया मीक को

लोकसभा चुनाव में दिग्विजय का ऐलान होते ही भोपाल सीट चर्चा में आ चुकी थी। दिग्विजय ने विजन डॉक्यूमेंट के लिए कई लोगों से संपर्क किया। तकरीबन हर व्यक्ति ने मीक का नाम लिया। फिर दिग्विजय ने सीधे मीक को बुलवाया। जब देखा तो पूछा कि तुम तो NSUI में थे न। मीक न कहा - हां था, लेकिन आप ही ने कहा था तो कुछ और करो तो मैंने राजनीति से अलग नाम कर लिया। फिर दिग्विजय ने एक-एक कर भोपाल के मुद्दों पर मीक की राय जानी। तकरीबन हर मुद्दे पर लंबी चर्चा होती। इसके बाद दिग्विजय ने कहा कि अब तुम्हीं विजन डॉक्यूमेंट तैयार करो। कई मुद्दों पर दिग्विजय सहमत नहीं होते थे लेकिन बात जब बताया जाता कि यह संभव है तो हां भर देते थे। मीक बताते हैं कि जिन मुद्दों को पूरा करना संभव नहीं था, उन्हें विजन डॉक्यूमेंट से हटा दिया गया। सिर्फ ठोस मुद्दे रखे जो कि शहर को आगे बढ़ाने वाले हैं।

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20 साल पहले दिग्विजय सुनते कम थे, अब हर बात पर करते हैं मश्विरा

मीक बताते हैं कि दिग्विजय जब सीएम थे तब उनसे बात कर पाना मुश्किल था। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी सिंह दूसरे लोगों की राय को बहुत कम तवज्जों देते थे लेकिन अब जमीन-आसमान का बदलाव आ चुका है। विजन डॉक्यूमेंट में जिस तल्लीनता से सिंह ने समय दिया है और गंभीरता दिखाई, वह आज के जनप्रतिनिधियों के लिए सीखने लायक बात है। सिंह इतने गंभीर थे कि चुनाव के बाद इसे अमलीजामा पहनाए जाने के लिए विशेष जोर देते हैं। मीक के मुताबिक उनका मकसद बिल्कुल साफ है। जो भी शहर के विकास के लिए सोचेगा, वो उसके साथ खड़े होंगे।

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सीएम, सांसद सबसे लगाई गुहार

मीक क्रेडाई के उपाध्यक्ष भी हैं। वे इस नाते क्रेडाई का प्रतिनिधित्व भी करते थे। तत्कालीन शिवराज सरकार के वक्त कई बार उन्होंने विकास में आ ही अड़चनों पर सीधे सीएम को प्रजेंटेशन दिया था। वर्ष 2014 में भाजपा से आलोक संजर सांसद चुने गए तो मीक ने उन्हें भोपाल की जरूरतों के बारे में प्रजेंटेशन दिया। संजर उनसे इतने प्रभावित हुई कि पीएम मोदी को दिखाने के लिए यह प्रजेंटेशन ले लिया। संजर ने दिल्ली में मोदी को प्रजेंटेशन भी दिखाया लेकिन बात नहीं बनी।

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कभी वीसीआर और केबल ऑपरेटर का काम करते थे मीक, राजनीति से चिढ़ हुई तो बन गए बिल्डर

खेती की पृष्ठभूमि से जुड़े मीक किशोरावस्था में ही पढ़ाई के लिए भोपाल आ गए। यहां पढ़ाई के साथ NSUI में भी काम किया। इसी दौरान वीसीआर बेचने का काम करने लगे। तभी राजनीति से मन खिन्न हो गया और फिर केबल ऑपरेटर से कॅरियर शुरू कर भोपाल में बिल्डर बन गए। वह दौर ऐसा था जब गिनती के ही बिल्डर हुआ करते थे। काम जम गया तो इसी क्षेत्र में महारत हासिल करने के लिए रिसर्च करने लगे। लेखन में दिल भाता था ही तो इसमें भी हाथ आजमा लिया। मीक कविता लिखते हैं और किताबें भी। उनकी 'सुख, संपत्ति घर आवे' पुस्तक काफी चर्चित रही है।


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