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नोट बदलने से इकोनॉमी को फायदा, कुछ समय के लिए कम होगी डिमांडः इंडिया रेटिंग्स

इंडिया रेटिंग्स के एक्सपर्ट के मुताबिक नोट बदलने के फैसले से कुछ सेक्टर पर दबाव देखने को मिल सकता है।

Expert view of demonetization impact on Indian economy
नई दिल्ली। सरकार के बड़े नोट को बदलने के फैसले के बाद आम लोगों को मुश्किलें देखने को मिल रही हैं। हालांकि एक्सपर्ट्स मान रहे हैं कि आने वाले समय में यह कदम पूरी इकोनॉमी के लिए काफी पॉजिटिव साबित होगा। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के एनालिस्ट (फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस) उदित करीवाला के मुताबिक सरकार द्वारा बड़े नोट को बदलने का फैसला मध्यम से लंबी अवधि में घरेलू इकनॉमी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि छोटी अवधि में लोगों के लिए मुश्किलें बनी रहेंगी। वहीं कुछ खास सेक्टर्स पर दबाब मध्यम अवधि तक देखने को मिल सकता है।
 
इकोनॉमी को क्या होगा फायदा  
मनीभास्कर से बातचीत में करीवाला ने कहा कि इस फैसले से देश के फिस्कल डेफिसिट को कम करने में मदद मिल सकती है। उनके मुताबिक इस बात की पूरी संभावना है कि काले धन के रूप में लोगों के पास जमा 500 और 1000 के नोट में से काफी बड़ी संख्या में नोट कभी भी बैंकों तक नहीं पहुंचेंगे। सरकार इन नोटों के इस्तेमाल को बंद करने की घोषणा कर चुकी है। ऐसे में रिजर्व बैंक से इन नोट की लायबिलिटी खत्म हो जाएगी, जिससे बैंक सरकार को ज्यादा डिविडेंड दे सकेगा।
 
करीवाला ने कहा कि इस फैसले के बाद ज्यादा से ज्यादा रकम बैंको में आएगी, वहीं नए अकाउंट से जुड़ेंगे जिससे बैंकों को फायदा होने की उम्मीद है। वहीं बैंकिंग सिस्टम में ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ने से सरकार की टैक्स इनकम में बढ़त की उम्मीद है। वहीं इस फैसले से विदेशी निवेशकों के बीच पॉजिटिव संकेत जाएंगे, जिससे आने वाले समय में देश में निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
 
क्या होगा फैसले का निगेटिव असर
उदित करीवाला के मुताबिक फैसले के निगेटिव इंपेक्ट भी हैं, हालांकि यह असर छोटी अवधि तक ही देखने को मिलेंगे। वहीं, कुछ सेक्टर पर छोटी से मध्यम अवधि तक दबाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने अनुमान दिया है कि करंसी को लेकर आम लोगों की मुश्किलें कुछ हफ्ते तक जारी रहेंगी। हालात सामान्य होने में एक से डेढ़ महीने तक लग सकते हैं।
वहीं रियल्टी सेक्टर, एनबीएफसी, यूज्ड कार बिजनेस और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कारोबार में छोटी से मध्यम अवधि तक दबाव देखने को मिल सकता है। करीवाला ने कहा कि इन सेग्मेंट में अक्सर कैश में ट्रांजेक्शन होते हैं। कैश ट्रांजेक्शन को कम से कम करने की सरकार की मुहिम की वजह से इन सेक्टर में मांग कुछ समय तक सुस्त रह सकती है।  

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