मनी भास्कर खास /जुलाई, 2019 सेंसेक्स और निफ्टी के लिए 17 साल का सबसे खराब महीना साबित

सुस्त खपत एवं टैक की ऊंची दरों से बढ़ी मुसीबत

ऑटो सेक्टर की मंदी ने भी बाजार को किया प्रभावित

Moneybhaskar.com

Aug 13,2019 03:35:24 PM IST

नई दिल्ली. शेयर मार्केट में गिरावट का दौर जारी है। गौर करने वाली बात है कि शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला संसद में बजट पेश होने के बाद शुरू हुआ है। इसका मतलब है कि समस्या का समाधान भी सरकार ही निकाल सकती है। मनी भास्कर ने इस मामले में ट्रेडिंगबेल (TradingBells) के को-फाउंडर और सीईओ अमित गुप्ता से बातचीत की।

जुलाई 2019 सेंसेक्स और निफ्टी के लिए 17 साल का सबसे खराब महीना साबित

अमित गुप्ता की मानें, तो घरेलू शेयर बाजार में इन दिनों गिरावट का रुझान है। लगातार बिकवाली के कारण ज्यादातर शेयरों में बड़े करेक्शन के चलते जुलाई, 2019 सेंसेक्स और निफ्टी के लिए 17 साल का सबसे खराब महीना साबित हुआ। बावजूद इसके अमेरिकी शेयर बाजार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। इस गिरावट के लिए वित्त वर्ष 2019-20 के केंद्रीय बजट में लिए गए कुछ निर्णयों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कुछ लोग इन फैसलों को आवेगी करार दे रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) पर सरचार्ज, शेयर बायबैक पर टैक्स और लिस्टेड कंपनियों में प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटाने के नियम इनमें शामिल हैं। ये फैसले बाजार के लिए किस कदर नकारात्मक रहे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के मौजूदा सिलसिले की शुरुआत संसद में बजट पेश होने के बाद हुई।

सुस्त खपत के बीच टैक्स की ऊंची दरों ने बढ़ाई मुसीबत

बजट आने से पहले भी हालात बहुत अच्छे नहीं थे। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में पूंजी की दिक्कतें और मोटे तौर पर पूरे सिस्टम में नकदी की किल्लत के कारण अर्थव्यवस्था पहले से दबाव में है। ऐसे में बजट की घोषणाओं ने आग में घी डालने का काम किया। जाहिर है, इस पर बाजार की प्रतिक्रिया नकारात्मक रही। एफपीआई भारतीय इक्विटी मार्केट में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। देश में सुस्त पड़ती खपत के बीच टैक्स की ऊंची दरों की वजह से विदेशी निवेशकों को लगता है कि भारतीय बाजार अब ज्यादा आकर्षक नहीं रह गया।

ऑटोमोबाइल सेक्टर गहरे संकट में

इन सब के बीच ऑटोमोबाइल सेक्टर करीब-करीब इतिहास के सबसे बुरे दौर का सामना कर रहा है। एनबीएफसी में संकट और बीएस-6 मानक लागू होना वाहन कंपनियों के लिए सबसे बड़े स्पीड ब्रोकर साबित हो रहे हैं। इसकेअलावा पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए पंजीकरण शुल्क में बढ़ोतरी ने ऑटो सेक्टर में अफरातफरी मचा रखी है। मौजूदा माहौल में टाटा मोटर्स पर दोहरी मार पड़ी है। एक तरफ अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर के कारणवैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी के चलते जेएलआर का कारोबार प्रभावित हुआ है और दूसरी तरफ घरेलू बाजार में वाहनों की बिक्री करीब-करीब ठप पड़ गई है। असल में सरकार इस इंडस्ट्री में फौरन बदलाव लाने का प्रयास कर रहीहै, लेकिन उसने संभवत: इस हकीकत पर गौर नहीं किया कि भारत जैसे विशाल देश में एक झटके में इतने बड़े बदलाव करने के अपने जोखिम हैं। ऐसे बदलाव चरणबद्ध तरीके से किए जाने चाहिए।

हालात सुधरने में लगेगा वक्त

शेयर बाजार फिलहाल सकारात्मक संकेतों के इंतजार में है, ताकि निवेशकों का सेंटीमेंट सुधर सके। लेकिन घोर अंधेरे वाले सुरंग के आखिर में प्रकाश नजर आने में संभवत: वक्त लगेगा।

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