एक्सपर्ट /मानसून और ब्याज दर समेत चार सेक्टर तय करेंगे भारतीय अर्थव्यवस्था की चाल

  • निवेशकों को अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर गौर करने की होगी जरूरत

Moneybhaskar.com

Jul 04,2019 03:13:51 PM IST

नई दिल्ली. देश का शेयर और फाइनेंशियल मार्केट इन दिनों जिस मुकाम पर है, वहां से नया सफर शुरू हो सकता है। पिछले कुछ महीनों के दौरान पूंजी बाजार में जो तेजी आई है, उसकी सबसे बड़ी वजह देशमें आर्थिक सुधारों के रफ्तार पकड़ने की उम्मीद है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में आए हैं। लेकिन, आगे की राह आसान नहीं होगी। अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है और इस साल मानसून की बारिश भी अब तक उम्मीद बढ़ाने वाली नहीं है। ऐसे में निवेशकों को अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर गौर करने की जरूरत होगी। ट्रेडिंग बेल्स के सह-संस्थापक एवं सीईओ अमित गुप्ता इस बारे में डिटेल से बता रहे हैं।

बाजार को प्रभावित करने वाले बड़े आर्थिक घटक

1. ब्याज दरें

ब्याज दरें खासी महत्वपूर्ण व्यापक आर्थिक घटक होती हैं। किसी भी देश में विकास का स्तर और आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाने का यह प्रभावी संकेतक होता है। ब्याज दरों में गिरावट का आमतौर पर यह मतलब निकाला जाता है कि अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है। दरअसल, ब्याज दरें घटने से उधारी बढ़ती है और इसके कारण मांग और उपभोग में इजाफा होता है। दूसरी तरफ मौद्रिकनीति कड़ी किए जाने (जब केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दरें बढ़ाता है) को मोटे तौर पर अर्थव्यवस्था मंद पड़ने का संकेत माना जाता है। इसका मतलब होता है कि अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति यानी महंगाई तेजी से बढ़ रही है, जिसे नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है।

बाजार के मौजूदा परिदृश्य में अमेरिकी केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरें कम करने का दबाव हो सकता है, खास तौर पर चीन के साथ ट्रेड वॉर के कारण मंदी जैसे हालात की वजह से। भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह अच्छी स्थिति मानी जाएगी और रिजर्व बैंक (जो इस साल अब तक पहले ही रेपो रेट में दो बार कटौती कर चुका है) नीतिगत दरें आगे और घटा सकता है। मोटे तौर पर घरेलू बाजार केलिए यह सकारात्मक संकेत होगा।

2. जीडीपी

बाजार आम तौर पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की ऊंची वृद्धि दर पसंद करता है। दरअसल, ऊंची जीडीपी से संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था में मोटे तौर पर आय का स्तर ऊंचा है। इसका सीधा सा अर्थ यह निकाला जाता है कि मांग मजबूत रहेगी और खपत बढ़ेगी। इनकी बदौलत औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा। जीडीपी का इस्तेमाल आम तौर पर किसी भी देश के समग्र आर्थिक परिदृश्य का अनुमान लगाने के लिए एक ठोस संकेतक के रूप में किया जाता है। यदि किसी देश के आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता हो तो ऐसे में जोखिम से बचने वाले निवेशक अक्सर बाजार से दूर रहते हैं, ताकि अत्यधिक उतार-चढ़ाव के कारण संभावित नुकसान से बचा जा सके। कुल मिलाकर जीडीपी में सुस्त ग्रोथ के कारण उपभोग कम हो जाता है और नकदी का संकट खड़ा हो जाता है, जो बाजार के लिए कतई अच्छी खबर नहीं होती।

3. राजनीतिक परिदृश्य

बाजार सरकार और नीतियों के मामले में स्थिरता चाहता है। यही वजह रही कि पिछले एक महीने के दौरान शेयर बाजार ने तेज दौड़ लगाई है। वजह साफ है। आम चुनाव के नतीजे ठीक वैसे ही आए, जैसा बाजार चाहता था, बल्कि नतीजे बाजार की उम्मीद से बेहतर रहे। केंद्र में एक मजबूत और स्थिर सरकार बनी। अब इस बात की उम्मीद बढ़ गई है कि सरकार आगामी पूर्ण आम बजट के जरिए आर्थिक सुधारों को रफ्तार देगी। संभवत: इसी वजह से बाजार घरेलू मोर्चे पर बहुत आशान्वित नजर आ रहा है, खास तौर पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और रियल एस्टेट सेक्टर के मामले में।

4. मानूसन

खास तौर पर भारतीय बाजार के मामले में मानसून की बड़ी भूमिका होती है। यदि बारिश समय पर और पर्याप्त होती है, तो ऐसी स्थिति में निवेशकों का सेंटीमेंट सुधरता है। कारण साफ है, अच्छी बारिश का मतलब होता है ग्रामीण इलाकों में अच्छी मांग। इसकी बदौलत समग्र तौर पर पूरे देश में मांग की स्थिति सुधर जाती है। इस मामले में पिछले एक दशक के दौरान एक शानदार काम हुआहै। देश में सिंचाई के साधनों का विकास तेजी से हो रहा है। इसकी बदौलत कमजोर मानसून से निपटने के मामले में हालात बेहतर हुए हैं। बावजूद इसके यदि देश के सभी इलाकों में समान रूप से अच्छी बारिश नहीं होती है, (जैसा कि पिछले साल महाराष्ट्र जैसे कुछ राज्यों में कम बारिश हुई थी) तो इसके कारण अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचता है। इस लिहाज से निवेशकों को कोई भी फैसला करने से पहले केवल मानसून के समग्र आंकड़ों पर ही नहीं, बल्कि उसके वितरण पर भी गौर करने की जरूरत होगी।

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.