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  • The slow pace of GST collection will have a devastating impact on these sectors including country growth rate

सुझाव /जीएसटी कलेक्शन की धीमी रफ्तार अर्थव्यवस्था के लिए घातक, देश के ग्रोथ रेट पर समेत इन सेक्टर पर पड़ेगा असर

  • मई 2018 से जून 2018 के दौरान टैक्स कलेक्शन 94 लाख करोड़ रुपे से बढ़कर 95.6 लाख करोड़ रुपए हो गया था।

Moneybhaskar.com

Jul 02,2019 12:24:00 PM IST

नई दिल्ली. जून 2019 में गुड्स ऐंड सर्विस टैक्स (GST) संग्रह की रफ्तार धीमी रही। इस दौरान जीएसटी संग्रह पिछले माह के 1 लाख करोड़ रुपए के मुकाबले 99,939 करोड़ रुपए रहा। वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में यह जानकारी दी गई। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विस के को फाउंडर विवेक जालान ने जीएसटी संग्रह में कमी को देश की अर्थव्यवस्था के लिए घातक करार दिया। उनके मुताबिक पिछले साल मई माह के मुकाबले इस माह जीएसटी कलेक्शन 300 करोड़ रुपए कम रहा, जबकि इसी दौरान पिछले साल जीएसटी कलेक्शन में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई थी।

विकास दर होगी प्रभावित

जालान के मुताबिक मई 2018 से जून 2018 के दौरान टैक्स कलेक्शन 94 लाख करोड़ रुपे से बढ़कर 95.6 लाख करोड़ रुपए हो गया था। जीएसटी लागू होने की वजह हमारा जीडीपी प्रभावित हुआ है और इसका असर भारत की ग्रोथ रेट पर पड़ा और जीडीपी ग्रोथ रेट घटकर 6 प्रतिशत रह गयी। साथ ही बेरोजगारी दर बढ़ने की वजह से भी जीडीपी विकास दर में कमी हो सकती है। ऐसे में नई सरकार का पहला आम बजट पेश करने जा रही नई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को कॉर्पोरेट टैक्स रेट में कमी करने की मांग की है। इससे देश में निवेश बढ़ेगा और नए रोजगार मिलेगा। इन तरीकों से अर्थव्यव्सथा को मजूबती मिल सकेगी। साथ ही मिडिल क्लास के लिए भी सरकार को कुछ कदम उठाने चाहिए। इससे देश में खपत बढ़ेगी और निश्चित तौर पर जीएसटी कलेक्शन भी बढ़ेगा। वहीं दूसरी तरफ सरकार ने नए जीएसटी रिटर्न को लागू करने में भी देरी कर रही है, जो कि अक्टूबर 2019 से लागू हो रहा है। इन सभी तरीकों से जीएसटी के रेवेन्यू को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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