रिपोर्ट /आवासीय घरों की बिक्री में सुधार, हैदराबाद ने अधिकतम बिक्री दर्ज की

  • दिल्ली-एनसीआर में जनवरी-सितंबर 2019 के दौरान सबसे निचले स्तर देखे गए

Moneybhaskar.com

Dec 03,2019 06:22:09 PM IST

नई दिल्ली. पिछले कुछ महीनों में बाजार की धारणा बहुत अधिक आशावादी नहीं है, लेकिन यह तय है कि रियल स्टेट क्षेत्र ने नीतिगत रुकावटों और आर्थिक मंदी के तूफान का सफलतापूर्वक सामना किया है। बिक्री की पैठ का तात्पर्य उस समय में उपलब्ध यूनिट्स यानि इकाइयों पर एक विशेष समय अवधि में बिक्री के अनुपात से है। चूंकि पूर्ण बिक्री में परिवर्तन मांग और आपूर्ति के बीच तालमेल की एक सटीक तस्वीर पेश नहीं करते हैं, इसलिए बिक्री-प्रवेश मांग-आपूर्ति की गतिशीलता को देखने के लिए एक बेहतर मापक यानि पैरामीटर है।

2019 रियल्टी क्षेत्र के लिए अब तक अच्छा है

मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु, शीर्ष तीन महानगरीय शहर रियल एस्टेट गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहे हैं, जेएलएल रिसर्च से पता चलता है कि हैदराबाद तेजी पकड़ रहा है। शहर 36 प्रतिशत बिक्री के साथ शीर्ष स्थान पर रहा और उसके बाद पुणे 34 प्रतिशत पर पहुंच गया। हैदराबाद निवेश के लिए बड़ी संभावनाओं के साथ आवासीय और वाणिज्यिक दोनों मोर्चे पर आकर्षण प्राप्त कर रहा है। दूसरी ओर, दिल्ली में सबसे कम बिक्री की दर 13 प्रतिशत दर्ज की गई, उसके बाद कोलकाता में 17 प्रतिशत की दर से बिक्री हुई।

शहर 2014 2015 2016 2017 2018 2019
बेंगलुरु 21 24 24 21 21 20
चेन्नई 23 28 27 20 28 33
दिल्ली 21 12 15 7 10 13
हैदराबाद 30 32 29 9 26 36
कोलकाता 38 29 28 6 13 17
मुंबई 20 24 20 18 18 18
पुणे 34 29 29 28 32 34

स्रोतः रियल एस्टेट इंटेलिजेंस सर्विसेज, जेएलएल (पहले नौ महीनों के आंकड़े, अर्थात् जनवरी से सितंबर)

शहर के स्तर के विश्लेषण से पता चलता है कि चेन्नई ने 2019 के पहले नौ महीनों (जनवरी-सितंबर) में अपनी अब तक की सबसे अधिक बिक्री दर्ज की है जो 33 प्रतिशत है। अन्य सभी शहरों ने 2019 के जनवरी से सितंबर की अवधि में बेंगलुरू को छोड़कर पिछले साल की समान अवधि की तुलना में तेजी दर्ज की है। जेएलएल विश्लेषण से पता चलता है कि पुणे बेंगलुरु के बाद सबसे स्थिर शहर रहा है। लेकिन स्थिति हमेशा से ऐसी नहीं रही है। नोटबंदी से सेक्टर में एक बड़ा व्यवधान आया।

विमुद्रीकरण का प्रभाव

विमुद्रीकरण ने इस क्षेत्र को काफी समय तक बाधित किया। हालांकि, प्रभाव सभी व्यापक नहीं था। कोलकाता और हैदराबाद ने अधिकतम चोट सहन की, जो क्रमशः 28 प्रतिशत से गिरकर 29 प्रतिशत से नौ प्रतिशत हो गई। पुणे मुंबई और बेंगलुरु में ये प्रभाव लचकदार रहा।

अब हम कहां हैं?

विमुद्रीकरण का प्रभाव केवल कोलकाता में लंबे समय तक रहा, जिसने 2019 के जनवरी-सितंबर में 17 प्रतिशत की बिक्री दर्ज की, जो कि पूर्व-विमुद्रीकरण बिक्री के 28 प्रतिशत के प्रवेश स्तर से काफी नीचे था। दूसरी ओर, पुणे, हैदराबाद और चेन्नई ने बिक्री में मजबूत पुनरुद्धार के साथ-साथ अन्य शहरों को पूर्व-सीमांकन स्तरों तक सीमित कर दिया। यह देखना उल्लेखनीय है कि हैदराबाद सबसे खराब शहरों में से एक था, लेकिन यह न केवल गिरावट से उबर गया है, बल्कि पूर्व-नोटबंदी के स्तर को पार कर गया है और पहले नौ महीनों में सभी शहरों में बिक्री का उच्चतम स्तर था हालांकि, 2019 में मुंबई एकमात्र ऐसा शहर है, जिसने अभी तक कोई भी लक्षण नहीं दिखाया है।

यह सब इतना बुरा नहीं है

इस पृष्ठभूमि में, हम धीरे-धीरे दूर हो रहे विमुद्रीकरण के अल्पकालिक प्रतिकूल प्रभाव को देखते हैं। इसके अलावा, बाजार सहभागियोंः घर खरीदारों, डेवलपर्स और निवेशकों ने रेरा और जीएसटी जैसे अभूतपूर्व सुधारों के साथ तालमेल बनाया है। ऑफिस स्पेस, जो आवासीय क्षेत्र के प्रदर्शन का एक मजबूत संकेतक है, एक स्थायी विकास पथ पर भी रहा है। हमें उम्मीद है कि वर्ष 2020 आवासीय क्षेत्र के लिए 2019 से बेहतर होगा, जिससे भविष्य के विकास के अनुमान को रेखांकित किया जाएगा।

लेखकः

डॉ.सामंतक दास, चीफ इकोनॉमिस्ट और हैड, रिसर्च एंड आरईआईएस, जेएलएल इंडिया
श्रद्धा अग्रवाल, रिसर्च एनालसिस, जेएलएल इंडिया

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