टैक्स /ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 16 समेत जरूरी बातों का रखें ध्यान, नहीं होगी कोई परेशानी

31 जुलाई 2019 ITR फाइल करने की अंतिम तारीख है

Saurabh Kumar Verma

Saurabh Kumar Verma

Jul 12,2019 07:09:20 PM IST

नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न ( ITR) एक ऐसा टैक्स फॉर्म है जिसमें करदाता अपनी आय के बारे में जानकारी दर्ज करते हैं। टैक्स रिटर्न विभिन्न आईटीआर फॉर्म्स के माध्यम से दायर किया जा सकता है, वित्तीय वर्ष के दौरान अर्जित आय से टैक्स की गणना की जाती है।

Comparepolicy.com के सीईओ सुभाष नागपाल ने मनी भास्कर को बताया कि इनकम टैक्स रिटर्न ( ITR)फाइल करने वक्त किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

किसे फाइल करना चाहिए इनकम टैक्स रिटर्न

इनकम टैक्स एक्ट 1961 और इनकम टैक्स रूल्स 1962 के अनुसार, हर एक टैक्स पेयर के लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष का रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। प्रत्येक टैक्स पैयर के लिए निर्धारित तारीख से पहले रिटर्न फाइल करना ज़रूरी होता है। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए ITR फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2019 है। जिस ITR फॉर्म पर आप रिटर्न फाइल करेंगे वो आपकी इनकम, इनकम का स्रोत, करदाता की श्रेणी (इंडिविजुअल, HUF या कंपनी) पर निर्भर करेगा।

नीचे दी गई श्रेणी से आप जान सकते हैं कि आपको रिटर्न फाइल करना है या नहीं

यदि आपकी सकल वार्षिक आय है-

आयु Amount
60 साल से कम Rs 2.5 लाख
60 से 80 साल Rs 3 लाख
80 साल से ज्यादा Rs 5 लाख

  • यदि आपके पास एक से अधिक आय के स्रोत हैं, जैसे कि हाउस प्रॉपर्टी या कैपिटल गेन्स से होने वाली आय।

  • यदि आपने विदेशी संपत्ति में निवेश या उससे कमाई की है।

  • अगर आपको इनकम टैक्स रिफंड लेना हो।

  • अगर टैक्स पेयर एक कंपनी, को-ऑपरेटिव सोसायटी या पार्टनरशिप फर्म हो तो प्रॉफिट या लॉस दोनों हालात में रिटर्न दाखिल करना होगा।

क्यों ज़रूरी है रिटर्न फाइल करना

  • सरकार ने उन लोगों के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य कर दिया है जोकि एक निश्चित वार्षिक राशि कमाते हैं। कर की निर्धारित तिथि के अनुसार टैक्सपेयर को भुगतान करना होता है।

  • यदि आपकी आय पर रिटर्न दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है, तब भी आप स्वेच्छा से रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

  • यदि आप होम लोन के लिए कहीं आवेदन करते हैं, तो बैंक या कोई भी होम लोन देने वाली कंपनी आपसे पिछले तीन से चार साल के रिटर्न का प्रूफ मांगते हैं। ऐसे में, प्रत्येक वर्ष टैक्स रिटर्न फाइल करना आपके लिए सही फैसला साबित हो सकता है।

  • आप किसी इंडिविजुअल या बिज़नेस द्वारा पिछले नुकसान के एडजस्टमेंट का दावा करने के लिए भी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

  • 31 जुलाई के बाद और 31 दिसंबर से पहले रिटर्न दाखिल करने पर 5,000 रुपये जुर्माना देना होता है। 31 दिसंबर के बाद और 31 मार्च के बीच रिटर्न दाखिल करने पर जुर्माने के रूप में 10,000 रुपये भुगतान करना होगा

रिटर्न फाइल करने से पहले ध्यान में रखने योग्य बातें

सही फॉर्म का चुनाव

सही रिटर्न फॉर्म चुनना एक महत्वपूर्ण कदम है और आप अपनी आय और कुल आय सीमा की प्रकृति के आधार पर सही फॉर्म चुन सकते हैं। विभिन्न टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म अपने आप आपके आय विवरण के अनुसार सही फ़ॉर्म का चयन कर लेते हैं। आप रिटर्न दाखिल करने के लिए ITR-1 से ITR -7 तक चुन सकते हैं।

अर्जित आय को सही रिपोर्ट करें

आपको वित्तीय वर्ष के दौरान अर्जित सभी आय का खुलासा करना होगा जिसके लिए आप रिटर्न दाखिल कर रहे हैं। आपको इनकम टैक्स की गणना करते समय प्रत्येक पेंशन, कैपिटल गेन्स, ब्याज से हुई आय जैसे विभिन्न स्रोतों को शामिल करना चाहिए, आप फॉर्म 26AS से विवरण प्राप्त कर सकते हैं।

फॉर्म 16 और 26AS

  • यदि आप एक वेतनभोगी व्यक्ति हैं, तो फॉर्म 16 टैक्स रिटर्न दाखिल करने के लिए एक ज़रूरी दस्तावेज है। इसमें आपका पैन, टैन, वेतन, पता और टैक्स का विवरण शामिल होता है। इनकम टैक्स रिटर्न फॉर्म्स में आपको पिछले नियोक्ताओं से हुई आय का विवरण प्रदान करना होगा और रिटर्न दाखिल करते समय इस विवरण को शामिल करना होगा।

  • फॉर्म 26AS में आपकी सैलरी पर कटने वाले TDS, प्रॉपर्टी बेचने पर लगे टैक्स, बैंक से मिले ब्याज जैसे, पहले से काटे जा चुके टैक्स का विवरण होता है । आप फॉर्म 26AS का उपयोग करके फॉर्म 16 या 16 A में दिए गए टीडीएस कटौती के सभी विवरणों को क्रॉस चेक कर सकते हैं। फॉर्म 26AS भी टैक्स रिटर्न भरने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है।

निवेश के प्रूफ संभाल कर रखें

आपको निवेश की रसीदें, भुगतान की रसीदें, डिडक्शन और अन्य कर लाभ दस्तावेजों के सभी सबूतों को संभाल कर रखना चाहिए। विसंगति के मामले में, आईटी विभाग आपसे आपके द्वारा दावा किए गए प्रमाण प्रदान करने के लिए कहेगा, ऐसे में ये सबूत आपके काम आ सकते हें।

ITR फाइल करते समय किसी परेशानी के मामले में कहां मिलेगी मदद

  • रिटर्न दाखिल करते समय अगर आपको लगता है कि गलती से आपने गलत विवरण प्रस्तुत किए हैं और आप उस गलती को सुधारना चाहते हैं तो आपको ऐसा करने की अनुमति है। IT एक्ट की धारा 139 (5) के तहत, संशोधित कर रिटर्न दाखिल करके गलती सुधार सकते हैं।

  • धारा 139 (5) साफ करती है कि यदि किसी करदाता ने कुछ गलत विवरणों के साथ रिटर्न दाखिल किया है, तो उसके पास ITR फाइलिंग की नियत तारीख से पहले संशोधित रिटर्न फाइल करने का मौका होता है। यानि इस वित्त वर्ष (2018-19) के लिए ये मौका 31 जुलाई 2019 तक।
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