इंश्योरेंस /हृदय रोग के बढ़ते खतरों के मद्देनजर कार्डियक प्लान वाली बीमा पॉलिसी है जरूरी

  • मानक मेडिक्लेम पॉलिसी में अक्सर हृदय रोग शामिल नहीं होता है
  • निजी अस्पतालों में सामान्य हृदय रोग के उपचार पर 1.5-6 लाख रुपए खर्च आता है
  • दवाइयों पर आने वाला मासिक खर्च अलग है

Moneybhaskar.com

Oct 01,2019 07:35:00 PM IST

नई दिल्ली. आज भारत में होने वाली 61% मौतों के लिए असंक्रामक बीमारियाँ (NCD), जैसे कैंसर, डायबिटीज और हृदय रोग जिम्मेवार है। लोगों की निष्क्रिय जीवनशैली और खानपान की खराब आदतों के चलते हृदय रोग से पीड़ित लोगों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। वर्ष 2016 में, भारत में अनुमानतः 6.25 करोड़ लोगों की ज़िंदगी सीवीडी (कार्डियो वैस्क्युलर बीमारी) के चलते समय-से पहले ही समाप्त हो गयी। कुछ वर्ष पहले तक, 50 से 60 वर्ष के बीच की उम्र वाले लोगों के लिए हृदय रोग चिंता का विषय हुआ करता था। लेकिन अभी 20 से 40 वर्ष की आयु वर्ग वाले लोगों में भी यह दिखना शुरू होने लगा है।

भारत में निजी अस्पतालों में सामान्य हृदय रोग के उपचार पर 1,50,000 रुपए से 6,00,000 रुपए का खर्च आता है और दवाइयों पर आने वाला मासिक खर्च अलग है। disabledworld.com की रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले 20 वर्षों में भारत में जीवन प्रत्याशा में 10 वर्षों से अधिक की वृद्धि हुई है। जीवन प्रत्याशा की दरों में वृद्धि और युवाओं में हृदय रोग के बढ़ते खतरों के मद्देनजर, हृदय रोग से जुड़ी विशिष्ट पॉलिसी का चुनाव अत्यावश्यक होता जा रहा है, क्योंकि मानक मेडिक्लेम पॉलिसी में अक्सर हृदय रोग शामिल नहीं होता है।

कार्डियक-संबंधी पॉलिसी लेते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पॉलिसी में निम्नलिखित चीज़ें शामिल हों:

कैथेटराइजेशन, सर्जिकल और मेडिकल प्रोसीजर पर खर्च : हृदय से जुड़े ऐसे प्लान खरीदना अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसमें सर्जिकल और मेडिकल खर्चें कवर हों। इसलिए, जब किसी बीमित व्यक्ति को स्टेंटिंग, एंजियोप्लास्टी या बाय-पास जैसी प्रोसीजर करानी होती है, तो पॉलिसी के तहत सारे खर्चे कवर होते हैं। उनमें से थोड़े प्रतिशत हिस्से में जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं, उनके लिए एक्सटेंडेड स्टे लेना आवश्यक होता है, जिसमें खर्च शामिल हो।

पहले से मौजूद बीमारी: अक्सर ऐसा स्वास्थ्य बीमा कवर लेना कठिन होता है, जिसमें बीमा लेने वाले व्यक्ति में हृदय रोग जैसी बीमारियाँ पहले से मौजूद हो। साथ ही, कुछ जीवन बीमा पॉलिसीज में पहले से मौजूद बीमारियाँ शामिल नहीं होती हैं, लेकिन वो उन बीमारियों को कवर करती हैं जिनमें बीमित व्यक्ति ने स्टेंटिंग, बाय-पास या एंजियोप्लास्टी कराया हो। इन प्लान्स में न केवल अस्पताल में भर्ती का खर्च शामिल होता है, बल्कि दवाएँ, आउट-पेशेंट खर्चे और डे-केयर के सभी खर्चे भी शामिल होते हैं।

लंबी अवधि का कवर: जीवन प्रत्याशा में वृद्धि और युवावस्था में ही हृदय रोगियों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर, भविष्य के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने हेतु लंबी अवधि वाले चिकित्सा उपचार की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है। इसलिए, हमें ऐसी पॉलिसी लेना ज़रूरी होता है, जिनमें न केवल पहली बार का उपचार कवर हो, बल्कि यह भविष्य की सभी बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करता हो।

नॉन-कार्डियक बीमारी: यह सामान्य धारणा है कि हृदय रोग से जुड़ी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसीज में केवल हृदय रोग ही कवर होते हैं। लेकिन हृदय रोग से जुड़ी पॉलिसीज में मेडिक्लेम पॉलिसी में शामिल सभी बीमारियों के उपचार में होने वाले खर्चे भी शामिल होते हैं।

संक्षेप में, हृदय रोग से जुड़ी बीमा पॉलिसी उन मरीजों के लिए एक वरदान है जिन्हें हृदय से जुड़ी बीमारियाँ हैं। यह सुनिश्चित करता है कि चाहे जैसी भी समस्या हो, व्यक्ति अपने हृदय और अपने प्रिय जनों के हृदय की देखभाल के लिए अच्छी तरह तैयार है।

लेखक : डॉ. एस. प्रकाश, जॉइंट मैनेजिंग डाइरेक्टर, स्टार हेल्थ ऐंड एलायड इंश्योरेंस

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.