प्रक्रिया /छोटे और मझले कारोबारियों के लिए ई-इन्वॉयसिंग की प्रक्रिया-आसान तरीके से कैसे की जा सकती है

  • इन्वॉयस और ऑटोमेशन साथ-साथ चलने वाली प्रक्रिया है। यह लघु और मध्यम कारोबारियों को पेमेंट की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी तरीके से करने के लिए सक्षम बनाता है।

Moneybhaskar.com

Jan 14,2020 04:09:00 PM IST

नई दिल्ली. पिछले कुछ वर्षों से भारत में रजिस्टर्ड एसएमबी की संख्या में काफी बढ़ोतरी देखी गई है।यह संख्या 50 लाख से बढ़कर अब 1 करोड़ तक हो गई है और दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। लघु और मध्यम कारोबार को पूरी तरह ऑटोमेशन की प्रक्रिया में ढालना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन ई-इन्वॉयसिंग के माध्यम से कई समस्याओं का समाधान किया जा सकताहै।

ई-इन्वॉयसिंग प्रक्रिया छोटे कारोबार में संचालन की लागत घटाने में मदद कर सकती हैं

हर बार सामान की खरीद और बिक्री के समय बिल बनाया जाता है। यहभुगतान की प्रक्रिया में पहला कदम है। इन्वॉयस बनाना किसी भी कारोबार के लिए सबसे जरूरी कार्यों में से एक हैं।यह भुगतान प्रक्रिया में पहला कदम है। उसी समय इन्वॉयस बनाना मानवीय तौर पर काफी कठिन हो सकता है, जिसमें काफी ग़लतियां भी हो सकती हैं लेकिन ई-इन्वॉयसिंग प्रक्रिया छोटे कारोबार में संचालन की लागत घटाने में मदद कर सकती हैं, कंपनियों के लिए तेजी से पेमेंट करना आसान बना सकती है और उनके लिए फाइनेंस के नए विकल्प खोल सकती है।

इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस से अब यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो सकती है

ई-इन्वॉयस को संगठित डिजिटल फॉर्मेट का प्रयोग करते हुए विक्रेताओं और खरीदारों के बीच सामान केआदान-प्रदान और भुगतान के अनुरोध की प्रोसेसिंग को स्वचालित ढंग से होने वाली प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकताहै। अब इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस के आने के बाद वर्ड या एक्सेल स्प्रेडशीट परअलग-अलग इन्वॉयस की सीरीज बनाने की जरूरत नहीं है। पहले इस के लिए मानवीय दखल की जरूरत पड़ती थी और इसे अपडेट करना होता था। इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस से अब यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो सकती है।

आइए देखते हैं-

ऑटोमेशन

इन्वॉयस और ऑटोमेशन साथ-साथ चलने वाली प्रक्रिया है। यह लघु और मध्यम कारोबारियों को पेमेंट की प्रक्रिया ज्यादा प्रभावी तरीके से करने के लिए सक्षम बनाता है। ऑटोमेशन केवल बिजनेस की पूरी प्रक्रिया को ही आसान नहीं बनाता , बल्कि इसके लिए काफी कम संसाधनों की जरूरत भी होती है। इसलिए यह प्रक्रिया जितनी ऑटोमेटेड और प्रभावपूर्ण होगी, कंपनी को उतने ही बड़े लाभ मिलेंगे।

समय की बचत

तेजी से पेमेंट करने की प्रक्रिया कीमती समय और संसाधनों की बचत कर सकती है। मैनुअली पेमेंट करने और पेमेंट लेने में काफी समय खराब होता है। पेमेंट के लिए बार-बार कॉल करना पड़ता है। ई-इन्वॉयसिंग से छोटे और मंझले कारोबारी, उपभोक्ता और उत्पाद के बारे में सूचना, इन्वॉयस टेम्पलेट और कई दूसरी चीजें को सेव कर सकते हैं। केवल माउस की कुछ क्लिक्स से इन्वॉयस बनाया जा सकताहै।इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस से इन्वॉयस का हरबार सही होना सुनिश्चित होता है। इसमें हरबार तारीख और इन्वॉयस नंबर को अपडेट करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

उच्च सटिकता

इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस से डाटा सीधे बिजनेस अकाउंट पे-एबल सिस्टम में फीड किया जाता है, जिससे गलती की कोई गुंजाइश नहीं रहती। इससे कारोबार को ज्यादा से ज्यादा उत्पादक बनाया जा सकता है। इससे गलतियां भी कम होती हैं। ई-इन्वॉयसिंग से कारोबारियों को पेमेंट के लिए आए बिलों को जल्द से जल्द प्रोसेस करने की इजाजत मिलती है।

ई-इन्वॉयसिंग तक पहुंचना आसान

इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयसिंग का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसे कहीं से भी बनाया जा सकता है।आप किसी भी ई-मेल और पासवर्ड से लॉगइन कर इंटरनेट कनेक्शन के साथ किसी भी डिवाइस से अपने अकाउंट तक पहुंच सकते हैं।

उपभोक्ताओं से रिश्ते सुधरते हैं

अगर इन्वॉयसमें कोई गलती मिलती है तो वह परंपरागत रूप से बनाई गई इन्वॉयस से ज्यादा जल्दी ठीक की जा सकती है। आप काफी तेजी से बातचीत कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि आप और आपके क्लाइंट्स काफी खुश रहेंगे क्योंकि अगर क्लाइंट खुश होता है तो वह दोबारा लौटकर आता है। इस स्थिति में वह दूसरे लोगों को आपकी कंपनी का नाम रेफर करता है। इसका मतलब है कि आपके छोटे बिजनेस का बढ़ना बरकरार रह सकता है। इसलिए मैनुअली बिल और रसीद बनाने की तुलना में इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयसिंग से कई कमियां दुरुस्त की जा सकती है। इससे छोटे और मध्यम कारोबारी कम से कम प्रयासों में नियमों का पालन आसानी से कर सकते हैं। इससे समय की काफी बचत हो सकती है, जिससे वह अपने बिज़नेस पर ज्यादा ध्यान दे सकते हैं।

ई-इन्वॉयसिंग की चुनौतियां

लाभ के साथ इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयसिंग की प्रक्रिया में कई चुनौतियाँ भी हैं।

ऑफलाइन कस्टमर्स

इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस का प्रभावी रूप से इस्तेमाल करने के लिए उपभोक्ताओं को सूचनाएं हासिल करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने की जरूरत होती है, लेकिन कई उपभोक्ता अक्सरऑनलाइन नहीं आते। इससे उन्हें इन्वॉयस तुरंत हासिल नहीं होती।जबकि कई कारोबारियों को कंप्यूटर का इस्तेमाल करना नहीं आताऔर वह बिल की हार्डकापी ही पसंद करते है। इसके अलावा बुजुर्ग उपभोक्ता या ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले कंस्यूमर्स के पास इंटरनेट नहीं होता और नही उनके पास कोई ई-मेल एड्रेस होता है। ऐसे हालात में इंटरनेट और टेक्नोलॉजी पर बहुत ज्यादा आश्रित होने से नुकसान हो सकताहै।

सुरक्षा में सेंध

ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम से इंटरनेट पर मौजूद स्पाईवेयर और किसी सॉफ्टवेयर की कोई फाइल से आपकी व्यक्तिगत सूचनाओं के चोरी होने और उनकी सुरक्षा पर खतरा हमेशा बना रहता है।

इसमें बोझिल प्रक्रिया शामिल है

समय रहते हुए इन्वॉयस अपलोड करने का विकल्प बड़ी कंपनियों के लिए तो लाभ दायक हो सकताहै, लेकिन छोटे कारोबार के लिए यह नुकसान दायक हो सकता है। इसके लिए अतिरिक्त खर्च और नियम-कायदों का पालन करने की जरूरत पड़तीहै।

ऑपरेशनल मुद्दे

एक बार इन्वॉयस जेनरेट करने के 24 घंटे बाद कैंसलेशन संभव नहीं है। हालांकि रिटर्न के फॉर्म में सप्लाई की जगह में गलती के होने पर बदलाव किए जा सकते है। उदाहरण के लिए अगर इन्वॉयस हासिल करने वाला कोई कारोबारी 15 दिनों के बाद इन्वॉयस के गलत होने की शिकायत करता है तो इस मामले में नए इन्वॉयस नंबर के लिए इन्वॉयस बनाना पड़ता है । एक और आईआरएन जेनरेट करने के लिए एकही नंबर का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।इससेआकलन करने वालों को संचालन प्रक्रिया में मुश्किलें हो सकती हैं। इसलिए इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस जेनरेट करने से पहले यह सावधानी बरतना सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि इन्वॉयस में सभी डिटेल ठीक तरह से भरी हुई हों।

लेखक- सह संस्थापक और निर्देशक, बिजी (अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर) राजेश गुप्ता

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