जानकारी /वित्तीय साक्षरता कोई विकल्प नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है

  • देश की 76 फीसदी वयस्क आबादी बेहद सामान्य वित्तीय सिद्धांतों को समझने में असमर्थ है
  • भारत ने वर्ष 2025 तक आर्थिक महाशक्ति बनने और अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है

Moneybhaskar.com

Nov 22,2019 05:09:27 PM IST

नई दिल्ली. 24 साल के रितेश ने अपना पे-चेक प्राप्त करने के तुरंत बाद KYC की आवश्यकताओं को पूरा किया और फिर एक इक्विटी म्यूचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की शुरुआत की। अपने माता-पिता से कम उम्र में प्राप्त वित्तीय साक्षरता से उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा मिली। हालांकि रितेश भाग्यशाली थे जिनके माता-पिता ने उन्हें यह अहम सीख दी और इसी वजह से उन्हें पैसों का समझदारी से इस्तेमाल करने में मदद मिली, लेकिन दुर्भाग्यवश भारतीय आबादी के एक बड़े हिस्से को बुनियादी वित्तीय सिद्धांतों की भी जानकारी नहीं है। हाल के सर्वेक्षण में एक दिलचस्प बात सामने आई है, जिसके अनुसार देश की 76 फीसदी वयस्क आबादी बेहद सामान्य वित्तीय सिद्धांतों को समझने में असमर्थ है। हम जानते हैं कि भारत ने वर्ष 2025 तक आर्थिक महाशक्ति बनने और अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है, जिसे देखते हुए हम कह सकते हैं कि वित्तीय साक्षरता कोई विकल्प नहीं है, बल्कि आज इसकी सख़्त जरूरत है।

वित्तीय साक्षरता क्या है?

वित्तीय साक्षरता का मतलब बुनियादी वित्तीय सिद्धांतों को अच्छी तरह जानना एवं समझना है, तथा वित्तीय रूप से साक्षर व्यक्ति के पास बचत, निवेश एवं नियोजन के संदर्भ में बेहतर मौद्रिक निर्णय लेने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल होना चाहिए। इससे आपको वित्तीय सुरक्षा हासिल करने तथा अपने जीवन के सभी प्रमुख लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिलती है।

वित्तीय साक्षरता क्यों ज़रूरी है?

हालांकि भारत का वित्तीय बाजार पूरी तरह विकसित एवं विनियमित है जहां कई तरीकों से निवेश किया जा सकता है, इसके बावजूद आबादी का एक बड़ा हिस्सा अपनी संपत्ति को बढ़ाने के लिए अपने पैसे का बेहतर ढंग से उपयोग करना नहीं जानता है। जानकारी की कमी के परिणामस्वरूप: लोग बिना सोचे-समझे निर्णय लेते हैं। वित्तीय साक्षरता की कमी के परिणामस्वरूप लोग बिना सोचे-समझे निर्णय लेते हैं और ऐसे प्रोडक्ट्स में अपना पैसा लगाते हैं जो सामान्य तौर पर उनके वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप नहीं होते हैं। मिसाल के तौर पर, आयकर अधिनियम, 1961 के तहत कई ऐसे खंड हैं जो व्यक्तियों को उनकी कर देयता कम करने में मदद करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग धारा 80C के तहत 1.5 लाख रुपये की अनुमेय सीमा का पूरी तरह लाभ उठाने के प्रयास में ऐसे साधनों में निवेश करते हैं, जो शायद ही उनके जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित हो। बाद में पुनरावर्ती प्रतिबद्धता तथा लंबी लॉक-इन अवधि की वजह से उन्हें अपने फैसले पर बेहद नाराज़गी होती है।

दूसरों के नक़्शे-क़दम पर चलने की मानसिकता

जानकारी की कमी हमें न केवल बिना सोचे-समझे और ख़राब निवेश विकल्पों की ओर ले जाती है, बल्कि हम दूसरों के नक़्शे-क़दम पर चलने की मानसिकता को भी अपनाते हैं जो लंबे समय में धन के सृजन के लिए हानिकारक है। इस मानसिकता की वजह से आप किसी ख़ास साधन के फायदे एवं नुकसान को समझे बिना इसमें निवेश के लिए प्रेरित हो जाते हैं, क्योंकि आप देखते हैं कि दूसरे लोग भी इसमें निवेश कर रहे हैं। इस मानसिकता की वजह से ही निवेशक किसी अनजान स्टॉक में पैसा लगाने या फिक्स्ड-रिटर्न वाले साधनों में निवेश करने के लिए मजबूर हो जाते हैं, और आमतौर पर इनसे मुद्रास्फीति-समायोजित रिटर्न नहीं मिल पाता है। इस तरह की सोच के कारण ही लोग रियल एस्टेट जैसे नॉन-लिक्विड एसेट्स में निवेश के लिए प्रेरित होते हैं, जिसे आसानी से नकद राशि में बदला नहीं जा सकता है।

ग़लत तरीके से बिक्री के जाल में फंसना

ग़लत तरीके से बिक्री दरअसल वित्तीय जगत की एक कड़वी सच्चाई है। हालांकि नियामक निकायों द्वारा नए-नए क़ानूनों को लागू करके और मौजूदा क़ानूनों को संशोधित करके इसे रोकने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है, फिर भी खुद जानकारी हासिल करना इस संकट से बचने का सबसे अच्छा हथियार है। इसके अलावा, जागरूकता की कमी के साथ-साथ लालच के कारण आम आदमी रिटर्न का वादा करने वाली झूठी योजनाओं के जाल में फंस जाते हैं और अपनी बचत को तुरंत खत्म कर देते हैं।

बदलाव की हवा

अच्छी बात यह है कि, इन प्रारंभिक कठिनाइयों को समझा जा चुका है और इसे हल करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। AMFI द्वारा संचालित "म्यूच्यूअल फंड्स सही हैं" जैसे कैंपेन ने म्यूचुअल फंड को जनता के बीच लोकप्रिय बनाने में बेहद अहम भूमिका निभाई गई है। हालांकि नियामक निकायों द्वारा अपने स्तर से प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन स्कूली पाठ्यक्रम में वित्तीय साक्षरता के विषय को शामिल करना बेहद जरूरी है क्योंकि बचपन में हासिल की गई सीख बाद में सही विकल्प का चयन करने में बेहद मददगार होते हैं। मां-बाप भी अपने बच्चों को धन प्रबंधन की अहमियत समझाएँ और कम उम्र में ही उन्हें अलग-अलग वित्तीय साधनों की जानकारी दें, ताकि उन्हें इन चीजों के हर पहलू को बारीकी से समझने में मदद मिल सके।

लेखक- राहुल जैन, हेड पर्सनल वेल्थ एडवाइजरी, एडलवाइस

X
COMMENT

Money Bhaskar में आपका स्वागत है |

दिनभर की बड़ी खबरें जानने के लिए Allow करे..

Disclaimer:- Money Bhaskar has taken full care in researching and producing content for the portal. However, views expressed here are that of individual analysts. Money Bhaskar does not take responsibility for any gain or loss made on recommendations of analysts. Please consult your financial advisers before investing.