बजट 2020  /अर्थव्यवस्था के लिए कड़वी गोली साबित हो सकती है आयकर दरों में कटौती : पंकज मुंजाल

  • सब्सिडी लाभ के लिए इलेक्ट्रिक साइकिल ईवीएस कैटेगरी में 
  • इलेक्ट्रिक कार की सस्ती बैटरी, रोड टैक्स को कम करने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर की जरूरत 

Saurabh Kumar Verma

Saurabh Kumar Verma

Jan 02,2020 08:59:01 PM IST

नई दिल्ली. बजट 2019 कई मायनों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिहाज से अहम साबित हुआ। इस दौरान न सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन पर जीएसटी कम करके 5 फीसदी किया गया, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों के खरीदारों को छूट के तौर पर लोन पर इनकम टैक्स में छूट भी दी गई। इस सभी प्रयासों का सीधा मकसद इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री को बढ़ाना था। केंद्र सरकार ने पिछले कुछ सालों में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपने टॉप एजेंडे में शामिल रखा है। इन सभी प्रयासों अलावा सरकार ने देश में इलेक्ट्रिक वाहनों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए फेम-2 योजना का ऐलान किया। लेकिन इसके बावजूद आंकड़ों पर गौर करें, तो इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री काफी सुस्त रही। पिछले साल अप्रैल से नवबंर के दौरान करीब 1,309 कार की बिक्री हुई। इसकी एक वजह ऑटो सेक्टर की आर्थिक सुस्ती और मांग में कमी हो सकती है। हीरो मोटर कंपनी के चेयरमैन और एमडी पंकज एम मुंजाल ने मनी भास्कर को बताया कि सरकार को ऐसे में इंडस्ट्री के लिए मागं और सप्लाई की चुनौतियों को जल्द दूर किया जाना चाहिए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना दूसरा बजट पेश करने जा रही हैं। हमें, उम्मीद है कि खपत को बढ़ाने, साथ ही खर्च करने योग्य आय को बढ़ाने संबंधी फैसलों का ऐलान करेंगी। वित्त मंत्री को इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए एक पॉलिसी लेकर आना चाहिए।

डिमांड में बढ़ोतरी की मांग

अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपनी वार्षिक समीक्षा में कहा है कि गिरते हुए कर राजस्व के साथ खपत और निवेश में गिरावट ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद में एक बार वृद्धि दर्ज की है। आईएमएफ ने इस मंदी का सामना करने के लिए तत्काल नीतिगत एक्शन लेना की मांग की है। गिरती मांग भारतीय अर्थव्यवस्था में मौजूदा मंदी के केन्द्र में रही है और हमें तत्काल ऐसे उपायों की आवश्यकता है जो लोगों के हाथों में अधिक आय डाल सकें, जिससे की मांग में इजाफा हो सके। आयकर की दरों में कटौती और आयकर स्लैब को फिर से लागू करना ऐसे समय में एक कठिन काम हो सकता है जब सरकार का राजस्व कम हो रहा हो। लेकिन यह अर्थव्यवस्था के लिए एक कड़वी गोली भी हो सकती है। पांच लाख रुपए तक की आय पर आयकर छूट वेतनभोगी करदाताओं को प्रभावित कर सकती है और खपत को बढ़ा सकती है। आर्थिक मंदी को ध्यान में रखते हुए ऑटोमोबाइल की खरीद को टालने वाले लोगों के बीच खरीद में तेजी लाई सकती है। हालांकि सिर्फ मौद्रिक उपाय पर्याप्त नहीं होंगे। भारतीय अर्थव्यवस्था को भी रोजगार और आय बढ़ाने के लिए एक प्रमुख राजकोषीय नीति की आवश्यकता है। सरकार को निर्माण और इन्फ्रास्टंक्चर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में व्यय को कम करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आय पैदा करने वाले रास्ते बनाने के लिए व्यापक उपायों की घोषणा करनी चाहिए। इसमें कम कर अर्थव्यवस्था बनाने के लिए जीएसटी स्लैब में संशोधन भी शामिल हैं।

स्क्रैपिंग पॉलिसी के लिए इंस्टीट्यूट सपोर्ट


इस वर्ष की शुरुआत में वित्त मंत्री ने पुराने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सड़कों से हटाने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से एक स्क्रैप नीति की घोषणा की है। नीति का लक्ष्य कार्बन उत्सर्जन को कम करने और उपभोक्ता मांग को बढ़ाने के दोहरे उद्देश्यों की पूर्ति करना है। सरकार को पुराने वाहनों के बदलने को प्रोत्साहित करने के लिए स्क्रैप पेज पॉलिसी तेजी से लागू करना सुनिश्चित करना चाहिए और ग्राहकों को पुराने वाहनों के निपटान के लिए सकारात्मक प्रोत्साहन देना चाहिए। प्रोत्साहन में उपभोक्ताओं के लिए सड़क करों पर छूट और पुराने वाहनों के निपटान के बाद नए वाणिज्यिक वाहनों की खरीद के लिए कम ब्याज ऋण योजनाएं शामिल हो सकती हैं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अनुसारए वाणिज्यिक वाहन उद्योग को अप्रैल और नवंबर 2019 के बीच बिक्री में 22 प्रतिशत की गिरावट का सामना करना पड़ा। हमें उम्मीद है कि यह सहायक स्क्रैपिंग नीति इस खोई हुई मांग में से कुछ को और बढ़ाने में मदद कर सकती है।


साइकिल को भी मिले फेम-2 का लाभ

इलेक्ट्रिक साइकिल को ईवीएस कैटेगरी के तहत शामिल किया जाना चाहिए, जिससे कि इनकी खरीद पर भी फेम-2 के तहत सब्सिडी का फायदा मिल सके। हमें उम्मीद है कि सरकार इलेक्ट्रिक कारों की तरह ही इलेक्ट्रिक साइकिल को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाएगी। मुंजाल के मुताबिक इलेक्ट्रिक कारें प्रदूषण की समस्या का सामना तो कर सकती हैं। लेकिन शहरों में यातायात की समस्या बढ़ा सकती हैं। ऐसे में इलेक्ट्रिक साइकिल और इको फ्रेंडली और स्पेस फ्रेंडली दोनों हैं और रेंज की चिंता की समस्या के लिए एक व्यवहार्य समाधान भी पेश करती हैं जो चार्जिंग इन्फ्रास्टंक्चर की कमी के साथ आती हैं क्योंकि बैटरी के खत्म होने पर उन्हें पैडल से भी चलाया जा सकता है। इलेक्टिंक साइकिलों पर फेम-2 की तरह सब्सिडी लाभ बढ़ाने से निर्माता और किफायती उत्पाद ग्राहकों तक पहुंचा सकते है। इस प्रकार ऐसे साइकिलों का अधिकाधिक उपयोग हो सकता है।

इलेक्ट्रिक वाहनों की कीमत में हो कटौती

सरकार ने पहले ही ईवी उत्पादन और बिक्री को बढ़ाने के लिए उपायों की घोषणा की है जिसमें निर्माताओं को सब्सिडी और खरीदारों को ऋण छूट दी गई है। ईवी की क्षमता और व्यवहार्यता के अंतर को कम करने के लिए अधिक उपायों की आवश्यकता हो सकती है। उदाहरण के लिएए वर्ष 2017 में सियाम की ओर से एक विश्लेषण में पाया गया कि इलेक्ट्रिक बसें कम बैटरी लाइफ और महंगी होने की वजह से नियमित डीजल या सीएनजी बस की तुलना व्यवहारिक नहीं है। ऐसे में सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। सरकार को इलेक्ट्रिक कार की बैटरी की कीमत में कमी लाने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनों पर रोड टैक्स हटाना चाहिए। इसके अलावा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।

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