रोटोमैक के प्रमोटर विक्रम कोठारी को एसएफआईओ ने हिरासत में लिया, उन पर लोन लेने के लिए कंपनी के खाता-बही में हेराफेरी करने का है आरोप

बैलेंसशीट में हेरोफेरी करने का आरोप बैलेंसशीट में हेरोफेरी करने का आरोप

  • रोटोमैक के पूर्व निदेशक राहुल कोठारी और प्रमोटर विक्रम कोठारी गिरफ्तार
  • फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के एमडी उदय देसाई और सीईओ सुजय देसाई को भी हिरासत में लिया गया

Moneybhaskar.com

Mar 20,2020 04:45:00 PM IST

नई दिल्ली. सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने रोटोमैक और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के चार अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। इन्हें बैंक स्टेटमेंट के साथ फर्जीवारा करने और फंड्स का राउंड-ट्रिपिंग करके धोखाधड़ी करने से सजुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। रोटोमैक पेन बनाने वाली कंपनी रोटोमैक के पूर्व निदेशक राहुल कोठारी और प्रमोटर विक्रम कोठारी को इस लिए गिरफ्तार किया गया है कि उन पर बैंक से कर्ज हासिल करने के लिए बैंक स्टेटमेंट के साथ फर्जीवारा करने का आरोप है। फ्रॉस्ट इंटरनेशनल के एमडी उदय देसाई और सीईओ सुजय देसाई को इसलिए हिरासत में लिया गया, क्योंकि उन पर बैंक से कर्ज लेने के लिए फंड की राउंड-ट्रिपिंग की धोखाधड़ी करने और वित्तीय विवरणों में फेरबदल करने का आरोप है।

रोटोमैक समूह ने 4,000 करोड़ तो फ्रॉस्ट इंटरनेशनल ने 3,500 करोड़ का डिफॉल्ट किया है

रोटोमैक समूह ने 4,000 करोड़ रुपए का कर्ज नहीं चुकाया है। फ्रॉस्ट इंटरनेशनल ने 3,500 करोड़ रुपए तक की देनदारियों का भुगतान नहीं किया है। दोनों समूहों पर कथित तौर पर सरकारी बैंकों का कर्ज बकाया है। रोटोमैक समूह और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल बैंकों से ज्यादा कर्ज लेने के लिए अपने बैलेंसशीट में फर्जीवारा कर उसे मजबूत स्थिति में दिखाया करते थे। अपने बैलेंसशीट को मजबूत दिखाने क लिए वे लगातार उसमें फर्जीवारा कर रहे थे और फंड्स का रोटेशन करने के लिए मर्चेंट ट्रेड स्कीम के नाम से जानी जाने वाली तकनीक का उपयोग करते थे।

पिछले साल सीबीआई ने रोटोमैक् ग्लोबल और उसके प्रमोटरों के विरुद्ध एक आरोप पत्र दाखिल किया था

पिछले साल सरकार ने एसएफआईओ को 11 कंपनियों के संचालन की जांच करने के लिए कहा था। इन 11 कंपनियों में रोटोमैक समूह और फ्रॉस्ट इंटरनेशनल भी शामिल थीं। 2018 में बैंक ऑफ बड़ौदा के 450 करोड़ रुपए से अधिक के लोन डिफॉल्ट मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने रोटोमैक् ग्लोबल और उसके प्रमोटरों के विरुद्ध एक आरोप पत्र दाखिल किया था। प्रवर्तन निदेशालय ने इसके खिलाफ मनी लांड्रिंग कानून के तहत एक अलग मामला भी दखिल किया था।

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