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कोरोना वायरस से देश के जीडीपी को हो सकता है 5-10 अरब डॉलर का नुकसान, निवेश में कमी को भी जोड़ लें तो नुकसान 100 अरब डॉलर से ज्यादा का हो सकता है

  • विमानन, पर्यटन, होटल व रेस्त्रां को लगा है सबसे बड़ा झटका
  • पर्यटन सेक्टर को 80 से 100 फीसदी तक का नुकसान होने की आशंका
  • रेस्तरां के कारोबार में 30-35 फीसदी की गिरावट

Moneybhaskar.com

Mar 18,2020 07:16:00 PM IST

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के कारण देश के जीडीपी को 5 से 10 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है। यह देश के जीडीपी के 0.15-0.35 फीसदी के बराबर है। कोरोना वायरस के कारण इकोनॉमी के सभी सेक्टरों पर पड़ने वाले असर और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला टूटने के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर यह मार पड़ने की आशंका है। मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि भारत में निवेश में होने वाली संभावित कमी को भी जोड़ लिया जाए, तो कुल मिलाकर यह नुकसान 100 अरब डॉलर से भी ऊपर जा सकता है।

सेंसेक्स में 13000 अंकों की गिरावट से निवेशकों का भारी नुकसान

दिसंबर के आाखिर में चीन में कोरोना वायरस का मामला सामने आने के बाद से अब तक शेयर बाजार के प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स में करीब 13000 अंकों की गिरावट आ चुकी है। इससे निवेशकों का लाखों करोड़ रुपए डूब चुका है। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पूंजी बाहर खींचने के कारण शेयर बाजार में इतनी भीषण गिरावट आई है।

विमानन, पर्यटन, होटल व रेस्त्रां को सबसे बड़ा झटका

अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पाबंदी लगा दिए जाने और वीजा को सस्पेंड कर दिए जाने के कारण देश के विमानन, पर्यटन, होटल व रेस्त्रां सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। घरेलू यात्रा की बुकिंग में करीब 20 फीसदी और अंतरराष्ट्रीय यात्रा की बुकिंग में करीब 75 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा फ्लाइट की टिकटें भी सस्ती हो जाने से कंपनियों को नुकसान हुआ है। पर्यटन सेक्टर को 80 से 100 फीसदी तक का नुकसान होने की आशंका है। होटल ऑक्यूपेंसी दर 70 फीसदी से घटकर 20 फीसदी पर आ गई है। रेस्त्रां के कारोबार में भी 30-35 फीसदी की गिरावट आई है।

पॉल्ट्री सेक्टर को हर रोज 1,500-2,000 करोड़ रुपए का नुकसान

पॉल्ट्री के जरिये कोरोना वायरस फैलने अफवाह से पॉल्ट्री सेक्टर की बिक्री में 80 फीसदी तक गिरावट आ चुकी है। इस उद्योग को हर रोज 1,500-2,000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

बीमा सेक्टर भी प्रभाावित

बीमा सेक्टर भी प्रभाावित हुआ है। जनरल हेल्थ इंश्योरेंस को लेकर पूछताछ में 30-40 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। दूसरी ओर बिजनेस ट्रैवल इंश्योरेंस में भारी गिरावट आई है।

2020 में वायरस के प्रकोप के कारण वाहन उत्पादन 8.3 % तक घट सकता है

ऑटो सेक्टर पहले ही कई महीने से मंदी से गुजर रहा था। ऑटो सेक्टर में कंपोनेंटट पार्ट्स की आपूर्ति गड़बड़ा गई है। भारत के ऑटो पार्ट्स आयात में चीन 27 फीसदी योगदान करता है। ई-वाहन सेक्टर में यह योगदान 54 से 81 फीसदी तक है। जहाज से आयात रोक दी गई है। भारतीय कंपोनेंट कंपनी ज्यादा माल बना नहीं पा रहे हैं। हवाई जहाज से आयात महंगा पड़ता है। रिपोर्ट में फिच की एक अन्य रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है कि 2020 में वायरस के प्रकोप के कारण देश में वाहन उत्पादन 8.3 फीसदी तक घट सकता है। आम लोग वायरस से बचने के लिए वाहन के शोरूम में नहीं जा रहे। इसके कारण वाहनों की मांग भी घटी है।

उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु की आपूर्ति श्रृंखला भी बाधित हुई

चीन और यूरोप से आपूर्ति बाधित होने के कारण उपभोक्ता टिकाऊ वस्तु सेक्टर भी प्रभावित हुआ है। भारत 45 फीसदी कंप्लीटली बिल्ट यूनिट का आयात चीन से करता है। इस के अलावा कंपोनेंट का भी आयात करता है। इसलिए उपभोक्ता वस्तुओं की कीमत 3-5 फीसदी बढ़ सकती है। मोबाइल का 90 फीसदी पार्ट्स चीन से आता है। भारत में इसकी असेंबलिंग होती है। इसलिए जनवरी-मार्च तिमाही में स्मार्टफोन की बिक्री 10-15 फीसदी घट सकती है। मॉल के बंद हो रहे हैं और वायरस से बचने के लिए आम लोग खरीदारी का फैसला टाल रहे हैं। इसके कारण एफएमसीजी सेक्टर में मांग घटेगी।

कपड़ा सेक्टर का प्रभावित हुआ निर्यात

चीन में टेक्सटाइल्स और गारमेंट फैक्टरी बंद हैं। इससे भारत से फैब्रिक, यार्न व अन्य कच्चे माल का निर्यात पहले ही प्रभावित हो चुका है। अब इसमें 50 फीसदी और गिरावट आ सकती है।

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