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विवाद से विश्वास स्कीम: 5 करोड़ रुपए से कम के टैक्स विवाद में मदद मिलेगी, 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन करें

सरकारी आंकड़ों के अनुसार टैक्स से जुड़े 4.83 लाख विवाद विभिन्न अदालत में लंबित हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार टैक्स से जुड़े 4.83 लाख विवाद विभिन्न अदालत में लंबित हैं।

  • वित्त मंत्रालय ने जारी किया नोटिफिकेशन, 5 फॉर्म नोटिफाई किए
  • 4.83 लाख केसों में फंसी है 9.32 लाख करोड़ रुपए की राशि

Moneybhaskar.com

Mar 20,2020 03:29:44 PM IST

नई दिल्ली। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (सीबीडीटी) ने विवाद से विश्वास स्कीम को लेकर ऑनलाइन सिस्टम के साथ रूल्स और फॉर्म जारी कर दिए हैं। इस स्कीम के तहत टैक्स विवाद का फायदा लेने वाले करदाताओं को डिक्लेरेयशन फॉर्म 31 मार्च तक आयकर विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन जमा करना होगा। इस स्कीम का फायदा लेने की अंतिम तारीख 31 मार्च ही है। 5 करोड़ रुपए से कम के टैक्स विवादों में ही इस स्कीम का फायदा मिल पाएगा। इस स्कीम के तहत 30 जून 2020 तक टैक्स का भुगतान किया जा सकता है।

पांच फॉर्म नोटिफाई किए

वित्त मंत्रालय की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि प्रॉपर्टी टैक्स और सौदा कर से संबंधित विवाद इस स्कीम के दायरे में नहीं आएंगे। कंपनियों के बीच होने वाले सौदों पर लगने वाले कर (एक्विलाइजेशन शुल्क) को सौदा कर कहा जाता है। वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने इस योजना का लाभ लेने के लिए पांच फॉर्म नोटिफाई किए हैं। यह फॉर्म ऑनलाइन भरे जाने हैं।

ये होगा प्रोसेस

  • योजना के तहत योग्य करदाता को फॉर्म-1 के जरिए नामित प्राधिकरण के पास अपनी घोषणा करनी होगी। करदाता को किसी भी कानून के तहत कर बकाया के संबंध में कोई कानूनी कार्रवाई की अनुमति नहीं होगी। इस संबंध में करदाता को फॉर्म-2 में हलफनामा देना होगा।
  • फॉर्म-1 में कर बकाया की प्रकृति, आकलन वर्ष, आदेश का ब्योरा, बकाया कर राशि में से पहले किए गए भुगतान की जानकारी देनी होगी।
  • घोषणा पत्र और हलफनामा प्राप्त होने के 15 दिनों के भीतर नामित प्राधिकरण आदेश (फॉर्म-3) जारी करेगा। इसमें पहले भुगतान की गई राशि के समायोजन के बाद कुल राशि के भुगतान का आदेश होगा।

4.83 लाख केसों में फंसी है 9.32 लाख करोड़ रुपए की राशि

आयकर विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस समय देश में टैक्स विवाद से जुड़े 4.8 लाख मामले विभिन्न अदालतों में चल रहे हैं। इन मामलों में करीब 9.32 लाख करोड़ रुपए की राशि फंसी पड़ी है। सरकार का मकसद इन विवादों का निपटारा करके ज्यादा से ज्यादा राशि का संग्रह करना है। दरअसल आयकर विभाग अधिकांश विवादों में केस हार जाता है। इससे सरकार को नुकसान होता है। इस नुकसान से बचने के लिए ही सरकार विवाद से विश्वास स्कीम लेकर आई है।

ऐसे करना होगा टैक्स का भुगतान

  • यदि करदाता ने अपील की है तो उसे 31 मार्च तक विवादित रकम का भुगतान करना होगा। इसमें पेनल्टी और ब्याज शामिल नहीं होगी। सर्च के मामलों में 25 फीसदी अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
  • यदि विवाद पेनल्टी, ब्याज या फीस की रकम पर है तो केवल विवादित राशि का 25 फीसदी चुकाना होगी। बाकी की रकम माफ कर दी जाएगी।
  • सर्च के मामलों में करदाता ने अपील की है तो उसे पेनल्टी और ब्याज को छोड़कर विवादित राशि का 35 फीसदी अतिरिक्त चुकाना होगा। इसी तरह सर्च के मामलों में पेनल्टी, ब्याज या फीस पर विवाद है तो 30 फीसदी रकम चुकानी होगी।
  • यदि इनकम टैक्स विभाग ने अपील की है तो करदाता को विवादित राशि का 50 फीसदी और सर्च के मामलों में 12.5 अतिरिक्त चुकाना होगा। ब्याज और पेनल्टी की छूट रहेगी। यदि विवाद ब्याज, पेनल्टी या फीस को लेकर है तो केवल 12.5 फीसदी का भुगतान करना होगा। बाकी राशि माफ कर दी जाएगी।

विदेशों में लंबित मामलों में भी मिलेगा लाभ

केंद्र सरकार की ओर से इस साल आम बजट में पेश की गई इस विवाद से विश्वास स्कीम का फायदा विदेशों में लंबित मामलों में भी मिलेगा। इनकम टैक्स विभाग की ओर से हाल ही में कहा गया है कि विदेशों में लंबित टैक्स विवादों में करदाता इस स्कीम के तहत आवेदन करके फायदा ले सकते हैं।

31 मार्च के बाद भुगतान पर अतिरिक्त 10% देना होगा

इस स्कीम के तहत यदि कोई करदाता विवाद समाप्त कराने के लिए 31 मार्च तक पूरा भुगतान करना होगा। 31 मार्च तक भुगतान किए जाने वाली राशि पर किसी भी प्रकार को कोई ब्याज या पैनल्टी नहीं देनी होगी। यदि कोई करदाता 31 मार्च तक भुगतान में चूक जाता है तो उसे 10 फीसदी अतिरिक्त राशि का भुगतान करना होगा। योजना के तहत टैक्स का भुगतान 30 जून 2020 तक किया जा सकता है।

कोरोना वायरस से होगी समस्या

जानकारों का कहना है कि इस स्कीम का लाभ 31 मार्च 2020 तक लिया जा सकता है। ऐसे में करदाताओं के पास इस योजना का लाभ लेने के लिए 9 कामकाजी दिन ही बचे हैं। कोरोना वायरस के कारण इस योजना का लाभ लेने में समस्या हो सकती है। इसका कारण यह है कि अधिकांश कर्मचारी और चार्टर्ड अकाउंटेंट घर से काम कर रहे हैं।

एमएसएमई को होगा फायदा

टैक्स मामलों से जुड़े जानकारों का कहना है कि विवाद से विश्वास स्कीम का मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) को बड़ा फायदा होगा। इस समय एमएसएमई का सरकारी और निजी कंपनिययों पर करीब 6 लाख करोड़ रुपए का बकाया चल रहा है। इसमें से काफी रुपया टैक्स विवादों की वजह से फंसा है। इस स्कीम में यदि यह विवाद निपट जाते हैं तो एमएसएमई को आर्थिक और कानूनी मोर्चे पर काफी राहत मिलेगी। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अनुसार देश में करीब 6 करोड़ एमएसएमई कारोबार कर रही हैं। देश की जीडीपी में एमएसएमई का 29 फीसदी और निर्यात में 48 फीसदी का योगदान है।

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सरकारी आंकड़ों के अनुसार टैक्स से जुड़े 4.83 लाख विवाद विभिन्न अदालत में लंबित हैं।सरकारी आंकड़ों के अनुसार टैक्स से जुड़े 4.83 लाख विवाद विभिन्न अदालत में लंबित हैं।

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